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गैर इरादतन हत्या में भतीजे को दस वर्ष की सजा
Updated Sat, 07 Apr 2018 01:48 AM IST
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गैर इरादतन हत्या में भतीजे को दस वर्ष की सजा
ललितपुर।
अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने थाना तालबेहट अंतर्गत ग्राम पिपरई निवासी एक व्यक्ति को अपने ही चाचा की गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उक्त अपराधी की जेल में बिताई अवधि को भी सजा में समायोजित करने के आदेश दिए हैं।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व तालबेहट थाना अंतर्गत ग्राम पिपरई निवासी शोभाराम पुत्र पंचू ने तहरीर देकर बताया था कि छह जून 2016 को सुबह आठ बजे उसके पिता पंचू अपने खेत में खपरा पाथ रहे थे। सूका और उसकी मां चिल्लू ने खपरा पाथने से मना किया। इसी बात पर उनका विवाद हो गया। सूका ने कुदाल से उसके पिता की नाक पर उल्टी तरफ से प्रहार कर दिया। जिससे पिता मौके पर ही गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना को कुछ दूर से उसके भाई शिवचरन ने भी देखा था। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों मां बेटा मौके से भाग गए थे। शोभाराम की तहरीर पर पुलिस ने उक्त घटना का मौका मुआयना करने के बाद हत्या की धारा में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू दी थी। पुलिस ने विवेचना में महिला चिल्लू का नाम हटा दिया था और सूका को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में दी गई दलीलों, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने शुक्रवार को उक्त मामले को गैर इरादतन हत्या का मामला पाया और अभियुक्त सूूका को दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय में अभियुक्त सूका की जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के आदेश भी दिए।
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ललितपुर।
अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने थाना तालबेहट अंतर्गत ग्राम पिपरई निवासी एक व्यक्ति को अपने ही चाचा की गैर इरादतन हत्या का दोषी पाते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उक्त अपराधी की जेल में बिताई अवधि को भी सजा में समायोजित करने के आदेश दिए हैं।
सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव ने बताया कि करीब दो वर्ष पूर्व तालबेहट थाना अंतर्गत ग्राम पिपरई निवासी शोभाराम पुत्र पंचू ने तहरीर देकर बताया था कि छह जून 2016 को सुबह आठ बजे उसके पिता पंचू अपने खेत में खपरा पाथ रहे थे। सूका और उसकी मां चिल्लू ने खपरा पाथने से मना किया। इसी बात पर उनका विवाद हो गया। सूका ने कुदाल से उसके पिता की नाक पर उल्टी तरफ से प्रहार कर दिया। जिससे पिता मौके पर ही गिर पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना को कुछ दूर से उसके भाई शिवचरन ने भी देखा था। घटना को अंजाम देने के बाद दोनों मां बेटा मौके से भाग गए थे। शोभाराम की तहरीर पर पुलिस ने उक्त घटना का मौका मुआयना करने के बाद हत्या की धारा में मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना शुरू दी थी। पुलिस ने विवेचना में महिला चिल्लू का नाम हटा दिया था और सूका को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में दी गई दलीलों, गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर न्यायाधीश ने शुक्रवार को उक्त मामले को गैर इरादतन हत्या का मामला पाया और अभियुक्त सूूका को दोषी पाते हुए दस वर्ष के कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय में अभियुक्त सूका की जेल में बिताई अवधि को सजा में समायोजित करने के आदेश भी दिए।
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