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मौनिया नृत्य बिखेरेगी बुंदेलखंडी छटा
Updated Fri, 20 Oct 2017 12:34 AM IST
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मौनी अमावस्या आज, ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचेंगी टोलियां
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बुंदेलखंड में दीपावली पर्व धनतेरस के दिन से भैया दूज तक पांच दिनों तक मनाया जाता है। गत मंगलवार के दिन धनतेरस का पर्व, फिर बुधवार को छोटी दीपावली और बृहस्पतिवार को दीपोत्सव पर्व शहर में उत्साह के साथ मनाया गया। इसके बाद चौथे दिन शुक्रवार को प्रथमा के दिन गोवर्धन पूजा और मौनी अमावस्या मनाई जाएगी, जबकि पांचवे दिन शनिवार को भैया दूज मनेगी।
दीपावली के बाद अगले दिन शुक्रवार को प्रथमा दिवस पर गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन अन्नकूट का आयोजन विभिन्न मंदिरों में भी किया जाता है। साथ ही इसी दिन मौनिया अमावस्या भी मनाई जाती है। जिसमें मौनिया की टोलियां पूरे दिन भर मौन व्रत धारण कर अपने साथियों के साथ गांव-गांव घूमने को निकलते हैं और जगह-जगह रुककर मौनिया नूूत्य कर बुंदेलखंडी छटा बिखेरते हैं। इसके लिए मौनिया नर्तकों ने कई दिनों पूर्व से ही तैयारियां शुरु कर दी हैं। मौनियां टोली का हर सदस्य अपने बदन से मोर के पंखों को बांधकर विशेष आकर्षण पोषाक पहनकर एक साथ टोलियों में निकलते हैं। मौनिया नृत्य के दौरान उनके पांव के घुंघरु और विशेष ढोल नगाड़ों का संगीत इस दिन विशेष आकर्षण होता है। मोनी अमावस्या के दिन मौनिया की टोलियां 12 गांव में भ्रमण करते हैं और इसके बाद ही वह अपना मौन व्रत तोड़ते हैं। अब शुक्रवार की सुबह से ही मौनिया टोलियां गांव घेरने को निकलेंगी और विशेष ढोल नगाढ़ों की थाप पर जगह-जगह आकर्षक नृत्य करते हुए आगे बढ़ेंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। बुंदेलखंड में दीपावली पर्व धनतेरस के दिन से भैया दूज तक पांच दिनों तक मनाया जाता है। गत मंगलवार के दिन धनतेरस का पर्व, फिर बुधवार को छोटी दीपावली और बृहस्पतिवार को दीपोत्सव पर्व शहर में उत्साह के साथ मनाया गया। इसके बाद चौथे दिन शुक्रवार को प्रथमा के दिन गोवर्धन पूजा और मौनी अमावस्या मनाई जाएगी, जबकि पांचवे दिन शनिवार को भैया दूज मनेगी।
दीपावली के बाद अगले दिन शुक्रवार को प्रथमा दिवस पर गोवर्धन पूजा की जाती है। इस दिन अन्नकूट का आयोजन विभिन्न मंदिरों में भी किया जाता है। साथ ही इसी दिन मौनिया अमावस्या भी मनाई जाती है। जिसमें मौनिया की टोलियां पूरे दिन भर मौन व्रत धारण कर अपने साथियों के साथ गांव-गांव घूमने को निकलते हैं और जगह-जगह रुककर मौनिया नूूत्य कर बुंदेलखंडी छटा बिखेरते हैं। इसके लिए मौनिया नर्तकों ने कई दिनों पूर्व से ही तैयारियां शुरु कर दी हैं। मौनियां टोली का हर सदस्य अपने बदन से मोर के पंखों को बांधकर विशेष आकर्षण पोषाक पहनकर एक साथ टोलियों में निकलते हैं। मौनिया नृत्य के दौरान उनके पांव के घुंघरु और विशेष ढोल नगाड़ों का संगीत इस दिन विशेष आकर्षण होता है। मोनी अमावस्या के दिन मौनिया की टोलियां 12 गांव में भ्रमण करते हैं और इसके बाद ही वह अपना मौन व्रत तोड़ते हैं। अब शुक्रवार की सुबह से ही मौनिया टोलियां गांव घेरने को निकलेंगी और विशेष ढोल नगाढ़ों की थाप पर जगह-जगह आकर्षक नृत्य करते हुए आगे बढ़ेंगी।
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