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नई बीमारियों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आया बदलाव
Updated Mon, 02 Jul 2018 01:32 AM IST
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नई बीमारियों के साथ स्वास्थ्य क्षेत्र में भी आया बदलाव
राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर चिकित्सकों का महत्व बताया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इस परिवर्तन के दौर में जहां नई-नई बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं, वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है और चिकित्सकों के सामने हर दिन नई बीमारियों से लड़ने के लिए चुनौतियां भी रहती हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर आयोजित एक संगोष्ठी में चिकित्सकों के महत्व को बताया गया है।
राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर आयोजित रविवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह दिन सभी डॉक्टर्स को समर्पित किया गया और वक्ताओं ने कहा कि भारत में यह दिन देश के प्रसिद्ध फिजीशियन और पश्चिम बंगाल के दो बार मुख्यमंत्री रहे डा. बिधानचंद्र राय की याद में मनाया जाता हैं। उनका जन्म और फिर उनकी मृत्यु भी एक जुलाई को ही हुई थी। बिरधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉक्टर क्षत्रपाल ने कहा कि जब उनकी नियुक्ति इस ब्लॉक में हुई थी, तब यहां आसपास रहने वाले लोग इलाज करवाने से डरते थे। उनको यह लगता था कि सरकारी अस्पताल में न ही कोई ध्यान देता है और न ही साफ-सफाई रहती थी, जिस वजह से यहां के लोग निजी सेवाएं लेना ही बेहतर समझते थे। धीरे-धीरे इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने खुद गांव-गांव जाकर घरों में सरकारी तंत्र के लिए लोगों में जागरूक किया, जिसके बाद धीरे-धीरे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बिरधा सीएचसी को कायाकल्प अवार्ड भी दिया गया था। इसके अलावा नियमित तौर पर हर माह 9 तारीख को होने वाले प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान दिवस में सभी गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है तथा प्रत्येक माह ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस(वीएचएनडी)परगांव में विजिट की जाती है। इस दौरान वहां मौजूद किशोरियों और बच्चों से भी उनके स्वास्थ्य के बारे में उनके माता पितासे चर्चा की जाती है। सीएचसी बिरधा में अब तक कोई महिला चिकित्सक नहीं है, जिसे वजह से महिलाएं व किशोरी अपनी बात सामने नहीं रख पाते, हालांकि आशा और एएनएम के जरिये उनकी समस्याओं को दूर किया जा रहा है। वहीं, महिला चिकित्सक न होने की वजह से प्रसव भी उनके द्वारा ही किए जाते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि हाल ही में 1 से 15 जून तक बिरधा ब्लॉक के सीएचसी से 50 से 60 किलोमीटर दूर गांव जाखलौन, सिथौरा, विजयपुरा आदि में स्वास्थ्य चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी से लोगों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी भी बहुत से गांव ऐसे हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच नहीं हैं, ऐस ेमें समय दर समय वहां चौपाल लगाकर उन्हें सुविधाएं देना ही बेहतर विकल्प साबित हो रहा है।
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राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर चिकित्सकों का महत्व बताया
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। इस परिवर्तन के दौर में जहां नई-नई बीमारियों ने पैर पसार लिए हैं, वहीं स्वास्थ्य क्षेत्र में भी काफी बदलाव आया है और चिकित्सकों के सामने हर दिन नई बीमारियों से लड़ने के लिए चुनौतियां भी रहती हैं। राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर आयोजित एक संगोष्ठी में चिकित्सकों के महत्व को बताया गया है।
राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस पर आयोजित रविवार को एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह दिन सभी डॉक्टर्स को समर्पित किया गया और वक्ताओं ने कहा कि भारत में यह दिन देश के प्रसिद्ध फिजीशियन और पश्चिम बंगाल के दो बार मुख्यमंत्री रहे डा. बिधानचंद्र राय की याद में मनाया जाता हैं। उनका जन्म और फिर उनकी मृत्यु भी एक जुलाई को ही हुई थी। बिरधा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सक डॉक्टर क्षत्रपाल ने कहा कि जब उनकी नियुक्ति इस ब्लॉक में हुई थी, तब यहां आसपास रहने वाले लोग इलाज करवाने से डरते थे। उनको यह लगता था कि सरकारी अस्पताल में न ही कोई ध्यान देता है और न ही साफ-सफाई रहती थी, जिस वजह से यहां के लोग निजी सेवाएं लेना ही बेहतर समझते थे। धीरे-धीरे इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए उन्होंने खुद गांव-गांव जाकर घरों में सरकारी तंत्र के लिए लोगों में जागरूक किया, जिसके बाद धीरे-धीरे लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बिरधा सीएचसी को कायाकल्प अवार्ड भी दिया गया था। इसके अलावा नियमित तौर पर हर माह 9 तारीख को होने वाले प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान दिवस में सभी गर्भवती महिलाओं की जांच की जाती है तथा प्रत्येक माह ग्रामीण स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस(वीएचएनडी)परगांव में विजिट की जाती है। इस दौरान वहां मौजूद किशोरियों और बच्चों से भी उनके स्वास्थ्य के बारे में उनके माता पितासे चर्चा की जाती है। सीएचसी बिरधा में अब तक कोई महिला चिकित्सक नहीं है, जिसे वजह से महिलाएं व किशोरी अपनी बात सामने नहीं रख पाते, हालांकि आशा और एएनएम के जरिये उनकी समस्याओं को दूर किया जा रहा है। वहीं, महिला चिकित्सक न होने की वजह से प्रसव भी उनके द्वारा ही किए जाते हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रताप सिंह ने बताया कि हाल ही में 1 से 15 जून तक बिरधा ब्लॉक के सीएचसी से 50 से 60 किलोमीटर दूर गांव जाखलौन, सिथौरा, विजयपुरा आदि में स्वास्थ्य चौपाल का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी से लोगों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी भी बहुत से गांव ऐसे हैं, जहां स्वास्थ्य सुविधा की पहुंच नहीं हैं, ऐस ेमें समय दर समय वहां चौपाल लगाकर उन्हें सुविधाएं देना ही बेहतर विकल्प साबित हो रहा है।
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