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आचार्य शंकर व रामानुज की जयंती मनाई
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आचार्य शंकर व रामानुज की जयंती मनाई
ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय के हिंदी विभाग में साहित्य और कला मंच की ओर से आठवीं-नौवीं शताब्दी में अवतरित अद्वैतवाद के ध्वजवाहक आचार्य शंकर एवं ग्यारहवीं व बारहवीं शताब्दी के तत्वदर्शी विशिष्टाद्वैतवादी आचार्य रामानुज की जयंती मनाई गई।
महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक कमलेश चौधरी ने कहा कि भारतीय दर्शन के दो नेत्र हैं, आचार्य शंकर और रामानुज, जिनके विचारों पर समय की जंग नहीं लग सकती है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि वे महान तत्वज्ञानी थे। उनका मानना था कि प्राणिमात्र चैतन्य स्वरूप हैं, किंतु अज्ञानता के कारण उसकी दृष्टि भेदभावपूर्ण हो जाती है। आचार्य रामानुज और आचार्य शंकर निंबार्क ने रामोपासक एवं कृष्णोपासक भक्ति द्वार शील-शक्ति और सौंदर्य का समावेष करके ज्ञान के सोने में भक्ति की सुंगध भर दी। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने कहा कि दोनों आचार्य जन-जन में गोचर- ब्रह्म के दर्शन करके हमेशा - हमेशा के लिए तू - तू- मैं - मैं का खटराग बंद कर धरती को ही एक कुटुंब बना दिया।
इस मौके पर चौधरी प्रदीप, प्रवीण, प्रो. आदित्य मिश्रा, प्रो. केपी कोरी, राकेश राजन, पुष्पेंद्र कुमार वर्मा, सुमिता पांडेय, राखी वर्मा, प्रज्ञा सिसौदिया, कामिनी जैन, किरन तिवारी, नितिन जैन, एकता शर्मा, पलक जैन, प्रदीप कुमार गंगेले, सुरेंद्र कुमार साहू, हाशिम अली, महेंद्र कुमार झा, अनुज सेन, नीलेश नामदेव आदि मौजूद रहे।
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ललितपुर। श्री दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय के हिंदी विभाग में साहित्य और कला मंच की ओर से आठवीं-नौवीं शताब्दी में अवतरित अद्वैतवाद के ध्वजवाहक आचार्य शंकर एवं ग्यारहवीं व बारहवीं शताब्दी के तत्वदर्शी विशिष्टाद्वैतवादी आचार्य रामानुज की जयंती मनाई गई।
महाविद्यालय के संस्थापक प्रबंधक कमलेश चौधरी ने कहा कि भारतीय दर्शन के दो नेत्र हैं, आचार्य शंकर और रामानुज, जिनके विचारों पर समय की जंग नहीं लग सकती है। हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. भगवत नारायण शर्मा ने कहा कि वे महान तत्वज्ञानी थे। उनका मानना था कि प्राणिमात्र चैतन्य स्वरूप हैं, किंतु अज्ञानता के कारण उसकी दृष्टि भेदभावपूर्ण हो जाती है। आचार्य रामानुज और आचार्य शंकर निंबार्क ने रामोपासक एवं कृष्णोपासक भक्ति द्वार शील-शक्ति और सौंदर्य का समावेष करके ज्ञान के सोने में भक्ति की सुंगध भर दी। प्राचार्य डॉ. जेएस तोमर ने कहा कि दोनों आचार्य जन-जन में गोचर- ब्रह्म के दर्शन करके हमेशा - हमेशा के लिए तू - तू- मैं - मैं का खटराग बंद कर धरती को ही एक कुटुंब बना दिया।
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इस मौके पर चौधरी प्रदीप, प्रवीण, प्रो. आदित्य मिश्रा, प्रो. केपी कोरी, राकेश राजन, पुष्पेंद्र कुमार वर्मा, सुमिता पांडेय, राखी वर्मा, प्रज्ञा सिसौदिया, कामिनी जैन, किरन तिवारी, नितिन जैन, एकता शर्मा, पलक जैन, प्रदीप कुमार गंगेले, सुरेंद्र कुमार साहू, हाशिम अली, महेंद्र कुमार झा, अनुज सेन, नीलेश नामदेव आदि मौजूद रहे।
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