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जीएसटी की सही जानकारी के अभाव में व्यापारी भ्रमित...
Updated Thu, 29 Jun 2017 08:55 PM IST
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जीएसटी के विरोध में आज बाजार बंद करेंगे व्यापारी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को तीन चरणों में रिटर्न भरने की की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जबकि बड़े व्यापारियों से कर वसूली के लिए कड़ाई से नियम लागू किए जा रहे हैं। जीएसटी में संशोधन के लिए व्यापारी बृहस्पतिवार से बाजार बंद कर भारत बंद का समर्थन करेंगे। लेकिन सही जानकारी के अभाव में व्यापारियों में जीएसटी के नियमों के बारे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
जीएसटी लागू होने में कुछ ही घंटे बचे हैं, लेकिन व्यापारियों व आम लोगों को जीएसटी की सही जानकारी नहीं है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। हर कोई जीएसटी के बारे में जानने को इच्छुक तो है लेकिन जीएसटी के सभी प्रावधान उन तक नहीं पहुंच सके हैं। हालांकि वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी जीएसटी से छोटे व्यापारियों को कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ने का दावा कर रहे हैं। वह मानते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद पूर्ण व्यापार ऑनलाइन हो जाएगा और अब तो सभी खाते पैन कार्ड व आधार कार्ड से लिंक होने के चलते सभी का डाटा अपने आप अपलोड हो जाएगा, जिससे अब कोई भी व्यापार करने पर टैक्स चोरी नहीं हो सकेगी। इसके साथ ही व्यापार का टर्न ओवर भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
असिस्टेंट कमिश्नर दिनेश पाल ने बताया कि पूर्व में वैट के तहत ई-तामीली लागू होने से नोटिस आदि में काफी आसानी हो गई है। अब जीएसटी लागू होने से सब कुछ ऑनलाइन होने वाला है। जिसमें रिटर्न की प्रक्रिया तीन चरणों में व्यापारियों को पूरी करनी होगी। इसके तहत व्यापारियों को अपनी खरीद बिक्री का विवरण ऑनलाइन दाखिल करना होगा। इसमें अधिकारियों से संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी। व्यापारी को महीने की दस तारीख को अपनी ऑउटवर्ड सप्लाई का विवरण जीएसटी की बेबसाइट पर अपलोड करना होगा। जिसमें क्रेता व्यापारी के खरीद खाते में प्रविष्टियां खुद भरनी होगीं। इस विवरण को संशोधित, परिमार्जित या नई प्रविष्टियां भरने का अधिकार क्रेता को ही होगा। यह सब कुछ 15 तारीख को अपलोड करना होगा। इसके बाद 17 तारीख तक विक्रेता एवं क्रेता को आपसी सहमति के आधार पर पूर्व में घोषित आंकड़ों में संशोधन कर सकेगा और 20 तारीख तक रिटर्न दाखिल करना होगा। उन्होंने बताया कि रिटर्न की यह नवीन प्रणाली बेहद सरल एवं सुविधाजनक है। हालांकि, रिटर्न विलंब से देने पर न्यूनतम सौ रुपए प्रतिदिन व मासिक त्रैमासिक रिटर्न हेतु अधिकतम पांच हजार रुपए और वॉक रिटर्न के लिए अधिकतम वार्षिक टर्न ओवर का 0.25 प्रतिशत तक विलंब शुल्क देय होगा। इसमें पचास लाख रुपए तक के टर्न ओवर के पंजीकृत व्यापारी समाधान योजना अपना सकते हैं। समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले व्यापारी को आईटीसी की सुविधा अनुमन्य नहीं होगी एवं कुल टर्न ओवर पर एकमुश्त समाधान राशि जमा करनी होगी।
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फोटो नंबर-1
कैप्सन-संजीव समैया।
जीएसटी में कागजी कार्यवाही बढ़ जाएगी
जीएसटी लागू होने से व्यापार में हिसाब रखने के लिए कागजी कार्यवाही अधिक बढ़ जाएगी। अब कोई भी सामान बिना बिल के संभव नहीं हो सकेगा। जिससे जीएसटी से सब कुछ छह माह में सिस्टम में आ जाएगा। जीएसटी पारदर्शिता के हिसाब से ठीक है, लेकिन इसमें कठोर दंड की कुछ धाराओं में सुधार की आवश्यकता है। जिसको लेकर व्यापारियों का विरोध है।
- संजीव समैया, नवीन मेडिकल स्टोर संचालक।
फोटो नंबर-2
कैप्सन-संदीप।
जीएसटी से बढ़ सकती है महंगाई
जीएसटी लागू होने से महंगाई में इजाफा हो सकता है, इसके चलते लोग जीएसटी लागू होने से पहले ही अधिक सामान खरीद रहे हैं। जीएसटी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे व्यापारी व आम लोग अब भी असमंजस की स्थिति में है। जीएसटी में इंस्पेक्टर राज से अधिक परेशानी आ सकती है, जिससे संशोधन किया जाना चाहिए।
- संदीप, अलंकार ज्वैलर्स संचालक।
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों को तीन चरणों में रिटर्न भरने की की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जबकि बड़े व्यापारियों से कर वसूली के लिए कड़ाई से नियम लागू किए जा रहे हैं। जीएसटी में संशोधन के लिए व्यापारी बृहस्पतिवार से बाजार बंद कर भारत बंद का समर्थन करेंगे। लेकिन सही जानकारी के अभाव में व्यापारियों में जीएसटी के नियमों के बारे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
जीएसटी लागू होने में कुछ ही घंटे बचे हैं, लेकिन व्यापारियों व आम लोगों को जीएसटी की सही जानकारी नहीं है। इससे लोगों में भ्रम की स्थिति बन गई है। हर कोई जीएसटी के बारे में जानने को इच्छुक तो है लेकिन जीएसटी के सभी प्रावधान उन तक नहीं पहुंच सके हैं। हालांकि वाणिज्यकर विभाग के अधिकारी जीएसटी से छोटे व्यापारियों को कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ने का दावा कर रहे हैं। वह मानते हैं कि जीएसटी लागू होने के बाद पूर्ण व्यापार ऑनलाइन हो जाएगा और अब तो सभी खाते पैन कार्ड व आधार कार्ड से लिंक होने के चलते सभी का डाटा अपने आप अपलोड हो जाएगा, जिससे अब कोई भी व्यापार करने पर टैक्स चोरी नहीं हो सकेगी। इसके साथ ही व्यापार का टर्न ओवर भी ऑनलाइन देखा जा सकेगा।
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असिस्टेंट कमिश्नर दिनेश पाल ने बताया कि पूर्व में वैट के तहत ई-तामीली लागू होने से नोटिस आदि में काफी आसानी हो गई है। अब जीएसटी लागू होने से सब कुछ ऑनलाइन होने वाला है। जिसमें रिटर्न की प्रक्रिया तीन चरणों में व्यापारियों को पूरी करनी होगी। इसके तहत व्यापारियों को अपनी खरीद बिक्री का विवरण ऑनलाइन दाखिल करना होगा। इसमें अधिकारियों से संपर्क की आवश्यकता नहीं होगी। व्यापारी को महीने की दस तारीख को अपनी ऑउटवर्ड सप्लाई का विवरण जीएसटी की बेबसाइट पर अपलोड करना होगा। जिसमें क्रेता व्यापारी के खरीद खाते में प्रविष्टियां खुद भरनी होगीं। इस विवरण को संशोधित, परिमार्जित या नई प्रविष्टियां भरने का अधिकार क्रेता को ही होगा। यह सब कुछ 15 तारीख को अपलोड करना होगा। इसके बाद 17 तारीख तक विक्रेता एवं क्रेता को आपसी सहमति के आधार पर पूर्व में घोषित आंकड़ों में संशोधन कर सकेगा और 20 तारीख तक रिटर्न दाखिल करना होगा। उन्होंने बताया कि रिटर्न की यह नवीन प्रणाली बेहद सरल एवं सुविधाजनक है। हालांकि, रिटर्न विलंब से देने पर न्यूनतम सौ रुपए प्रतिदिन व मासिक त्रैमासिक रिटर्न हेतु अधिकतम पांच हजार रुपए और वॉक रिटर्न के लिए अधिकतम वार्षिक टर्न ओवर का 0.25 प्रतिशत तक विलंब शुल्क देय होगा। इसमें पचास लाख रुपए तक के टर्न ओवर के पंजीकृत व्यापारी समाधान योजना अपना सकते हैं। समाधान योजना के अंतर्गत आने वाले व्यापारी को आईटीसी की सुविधा अनुमन्य नहीं होगी एवं कुल टर्न ओवर पर एकमुश्त समाधान राशि जमा करनी होगी।
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कैप्सन-संजीव समैया।
जीएसटी में कागजी कार्यवाही बढ़ जाएगी
जीएसटी लागू होने से व्यापार में हिसाब रखने के लिए कागजी कार्यवाही अधिक बढ़ जाएगी। अब कोई भी सामान बिना बिल के संभव नहीं हो सकेगा। जिससे जीएसटी से सब कुछ छह माह में सिस्टम में आ जाएगा। जीएसटी पारदर्शिता के हिसाब से ठीक है, लेकिन इसमें कठोर दंड की कुछ धाराओं में सुधार की आवश्यकता है। जिसको लेकर व्यापारियों का विरोध है।
- संजीव समैया, नवीन मेडिकल स्टोर संचालक।
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जीएसटी से बढ़ सकती है महंगाई
जीएसटी लागू होने से महंगाई में इजाफा हो सकता है, इसके चलते लोग जीएसटी लागू होने से पहले ही अधिक सामान खरीद रहे हैं। जीएसटी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे व्यापारी व आम लोग अब भी असमंजस की स्थिति में है। जीएसटी में इंस्पेक्टर राज से अधिक परेशानी आ सकती है, जिससे संशोधन किया जाना चाहिए।
- संदीप, अलंकार ज्वैलर्स संचालक।