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लापरवाही: पाली समाचार
Updated Sun, 15 Jul 2018 03:52 AM IST
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लापरवाह मीटर रीडर्स बना गए उपभोक्ताओं को कर्जदार
भारी बिल देख अधिकारियों के समक्ष रो पड़ी महिला
समाधान के नाम पर ललितपुर कार्यालय आने की करते बात..
अमर उजाला ब्यूरो
पाली। बिजली विभाग के उपभोक्ता त्रस्त बने हैं। वहीं, इन सबसे बेखबर विद्युत कर्मचारी मस्त बने हैं। वहीं, अधिकारी समाधान कैंप लगाते तो पाली में है लेकिन ज्यादातर पीड़ितों को ललितपुर कार्यालय आ जाने की कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि नगर पंचायत के सूचना तंत्र से उपभोक्ताओं के बिल समाधान की मुनादी भी कराई जाती है।
शनिवार को आयोजित कैंप में एक महिला अधिकारियों के समक्ष अपने बिल संशोधन की गुहार लगाती। जब उसे मालूम पड़ता कि बिल का संशोधन नहीं हो पायेगा। यह सुनते ही महिला फफककर रो पड़ती कि साहब मिड-डे मील में रसोइया हूँ, वेतन भी एक हजार के करीब है। एक महीने पहले बिल चुकता किया था, अब चौदह हजार का बिल आया इसे कैसे जमा करूंगी। यह तो एक वानगी मात्र है, कस्बे में ऐसे कई उपभोक्ता है जो मीटर रीडर्स की लापरवाही का शिकार वन विभाग के बड़े कर्जदार बन गए हैं। गरीब उपभोक्ताओं पर तो मानो बड़ी शामत आन पड़ी हो। कस्बे में तैनात मीटर रीडर्स उपभोक्ताओं के घर न पहुंचकर अपने हिसाब से घर बैठे अंदाजी मीटर रीडिंग विभाग को भेजते रहे। इन सब से अनजान उपभोक्ता इसी को सही समझ अपने बिल का भुगतान अदा करते रहे। इसी बीच कस्बे में बड़े पैमाने पर पुराने मीटर हटाकर नए मीटर लगाए गए। इसके बाद मीटर रीडर्स की लापरवाही उजागर हुई। ऐसे कई उपभोक्ता है जिनकी स्टोर रीडिंग नए मीटर में जुड़ कर आई। इसके बाद जो बिल आए उसे देख गरीब उपभोक्ता तो मानो जैसे सदमे में आ गया हो। मीटर बदलते समय जो उपभोक्ता कर्मचारियों से सांठगांठ कर गए उन्हें स्टोर रीडिंग से निजात भी मिल गयी। ऐसे उपभोक्ता कैम्प में बड़े परेशान नजर आए। वहीं गोविंददास रसिया ने बताया कि 16000 रुपये की बिल अदा किया था, जिसकी रसीद भी । तहसील दिवस में शिकायत की इसके बाद विभाग से एक फोन आया, जिसमें बताया गया कि विल संशोधित कर दिया गया। इसमें भरने के लिए जमा के लिए सात हजार रुपए के करीब बताए गए थे। कैंप में बिल जमा करने गया तो वहां निराशा हाथ। अधिकारी ने बताया कि अभी आपका डाटा फीट नहीं किया गया। इसके लिए ललितपुर कार्यालय आना पड़ेगा। ऐसे और भी उपभोक्ता रहे जिनसे समस्या समाधान के नाम पर कार्यालय बुलाया गया । समाधान का डाटा रिसीव कराने के लिए उपभोक्ताओं को कई चक्कर काटने पड़ते है ।
कैंप में ऐसे भी उपभोक्ता रहे, जिन्होंने शिकायत की कि मीटर बदले महीनों गुजर गए लेकिन बिल में लगकर नहीं आ रहा है। बिना रीडिंग का बिल उन्हें थमाया जा रहा है। कैंप में बैठे कर्मचारियों ने लोगों की समस्याएं सुनी साथ ही उपभोक्ताओं से बिल राशि भी जमा कराई।
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फोटो- 22
बिल देखकर हाथ पांव फूल रहे
जनवरी में बिल चुकता किया था। अब साठ हजार से ऊपर की बिल राशि आयी है। मीटर रीडर्स तो हमें विभाग का बड़ा कर्जदार बना गए। समस्या का कैसे समाधान होगा अधिकारी बताने को तैयार नहीं।
रामरतन कुशवाहा, किसान
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फोटो- 21
छोटी बेतन से कैसे चुकाऊंगा बड़ा कर्ज
एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक के रूप में काम करता हूं। वेतन भी ऐसे जिससे परिवार का गुजारा ही चल पाता। मीटर बदले जाने के बाद पचहत्तर हजार रुपए का बिल आया। जिसे देख पूरा परिवार सदमे में है।
मुकेश परिहार
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अधिकारियों के बड़े करीबी है ऐ मीटर रीडर्स
घर बैठे अपने हिसाब से उपभोक्ताओं के गले में मुशीबत डालने वाले मीटर रीडर्स पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई । जिससे विभाग का लाखों रुपए का नुकसान हुया तो वहीं आज उपभोक्ता परेशान बने घूम रहे हैं । पूर्व में मीटर रीडर्स का जिम्मा लिए कर्मचारी अधिकारियों के बड़े करीबी बताया जाता है ।
जांच में दोषी पर होगी कार्रवाई
जांच में जो मीटर रीडर्स दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं के बिल में जो स्टोर रीडिंग जुड़कर आयी है। उसका बिल जमा करना पड़ेगा ।
- जगदीश प्रसाद , एसडीओ विधुत
विद्युत विभाग ने शिविर लगाकर वसूले ढाई लाख
पाली। शनिवार को आयोजित विद्युत विभाग के शिविर में दो लाख बासठ हजार पांच सौ रुपए की वसूली की गई।12 उपभोक्ताओं की समस्या का मौके पर समाधान किया गया। एक लाख सत्तर हजार रुपये से ज्यादा के बकाये पर 13 संयोजन काटे गए। इस मौके पर एसडीओ जगदीश प्रसाद, अवर अभियंता चंद्रप्रकाश, विभाष सोनी, हेमंत शुक्ला, नितिन चौरसिया, इकबाल, अशोक, तिलक, कैलाश, हरगोविंद मौजूद रहे ।
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भारी बिल देख अधिकारियों के समक्ष रो पड़ी महिला
समाधान के नाम पर ललितपुर कार्यालय आने की करते बात..
अमर उजाला ब्यूरो
पाली। बिजली विभाग के उपभोक्ता त्रस्त बने हैं। वहीं, इन सबसे बेखबर विद्युत कर्मचारी मस्त बने हैं। वहीं, अधिकारी समाधान कैंप लगाते तो पाली में है लेकिन ज्यादातर पीड़ितों को ललितपुर कार्यालय आ जाने की कहकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं। जबकि नगर पंचायत के सूचना तंत्र से उपभोक्ताओं के बिल समाधान की मुनादी भी कराई जाती है।
शनिवार को आयोजित कैंप में एक महिला अधिकारियों के समक्ष अपने बिल संशोधन की गुहार लगाती। जब उसे मालूम पड़ता कि बिल का संशोधन नहीं हो पायेगा। यह सुनते ही महिला फफककर रो पड़ती कि साहब मिड-डे मील में रसोइया हूँ, वेतन भी एक हजार के करीब है। एक महीने पहले बिल चुकता किया था, अब चौदह हजार का बिल आया इसे कैसे जमा करूंगी। यह तो एक वानगी मात्र है, कस्बे में ऐसे कई उपभोक्ता है जो मीटर रीडर्स की लापरवाही का शिकार वन विभाग के बड़े कर्जदार बन गए हैं। गरीब उपभोक्ताओं पर तो मानो बड़ी शामत आन पड़ी हो। कस्बे में तैनात मीटर रीडर्स उपभोक्ताओं के घर न पहुंचकर अपने हिसाब से घर बैठे अंदाजी मीटर रीडिंग विभाग को भेजते रहे। इन सब से अनजान उपभोक्ता इसी को सही समझ अपने बिल का भुगतान अदा करते रहे। इसी बीच कस्बे में बड़े पैमाने पर पुराने मीटर हटाकर नए मीटर लगाए गए। इसके बाद मीटर रीडर्स की लापरवाही उजागर हुई। ऐसे कई उपभोक्ता है जिनकी स्टोर रीडिंग नए मीटर में जुड़ कर आई। इसके बाद जो बिल आए उसे देख गरीब उपभोक्ता तो मानो जैसे सदमे में आ गया हो। मीटर बदलते समय जो उपभोक्ता कर्मचारियों से सांठगांठ कर गए उन्हें स्टोर रीडिंग से निजात भी मिल गयी। ऐसे उपभोक्ता कैम्प में बड़े परेशान नजर आए। वहीं गोविंददास रसिया ने बताया कि 16000 रुपये की बिल अदा किया था, जिसकी रसीद भी । तहसील दिवस में शिकायत की इसके बाद विभाग से एक फोन आया, जिसमें बताया गया कि विल संशोधित कर दिया गया। इसमें भरने के लिए जमा के लिए सात हजार रुपए के करीब बताए गए थे। कैंप में बिल जमा करने गया तो वहां निराशा हाथ। अधिकारी ने बताया कि अभी आपका डाटा फीट नहीं किया गया। इसके लिए ललितपुर कार्यालय आना पड़ेगा। ऐसे और भी उपभोक्ता रहे जिनसे समस्या समाधान के नाम पर कार्यालय बुलाया गया । समाधान का डाटा रिसीव कराने के लिए उपभोक्ताओं को कई चक्कर काटने पड़ते है ।
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कैंप में ऐसे भी उपभोक्ता रहे, जिन्होंने शिकायत की कि मीटर बदले महीनों गुजर गए लेकिन बिल में लगकर नहीं आ रहा है। बिना रीडिंग का बिल उन्हें थमाया जा रहा है। कैंप में बैठे कर्मचारियों ने लोगों की समस्याएं सुनी साथ ही उपभोक्ताओं से बिल राशि भी जमा कराई।
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फोटो- 22
बिल देखकर हाथ पांव फूल रहे
जनवरी में बिल चुकता किया था। अब साठ हजार से ऊपर की बिल राशि आयी है। मीटर रीडर्स तो हमें विभाग का बड़ा कर्जदार बना गए। समस्या का कैसे समाधान होगा अधिकारी बताने को तैयार नहीं।
रामरतन कुशवाहा, किसान
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फोटो- 21
छोटी बेतन से कैसे चुकाऊंगा बड़ा कर्ज
एक प्राइवेट स्कूल में अध्यापक के रूप में काम करता हूं। वेतन भी ऐसे जिससे परिवार का गुजारा ही चल पाता। मीटर बदले जाने के बाद पचहत्तर हजार रुपए का बिल आया। जिसे देख पूरा परिवार सदमे में है।
मुकेश परिहार
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अधिकारियों के बड़े करीबी है ऐ मीटर रीडर्स
घर बैठे अपने हिसाब से उपभोक्ताओं के गले में मुशीबत डालने वाले मीटर रीडर्स पर कभी कोई कार्रवाई नहीं की गई । जिससे विभाग का लाखों रुपए का नुकसान हुया तो वहीं आज उपभोक्ता परेशान बने घूम रहे हैं । पूर्व में मीटर रीडर्स का जिम्मा लिए कर्मचारी अधिकारियों के बड़े करीबी बताया जाता है ।
जांच में दोषी पर होगी कार्रवाई
जांच में जो मीटर रीडर्स दोषी पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। उपभोक्ताओं के बिल में जो स्टोर रीडिंग जुड़कर आयी है। उसका बिल जमा करना पड़ेगा ।
- जगदीश प्रसाद , एसडीओ विधुत
विद्युत विभाग ने शिविर लगाकर वसूले ढाई लाख
पाली। शनिवार को आयोजित विद्युत विभाग के शिविर में दो लाख बासठ हजार पांच सौ रुपए की वसूली की गई।12 उपभोक्ताओं की समस्या का मौके पर समाधान किया गया। एक लाख सत्तर हजार रुपये से ज्यादा के बकाये पर 13 संयोजन काटे गए। इस मौके पर एसडीओ जगदीश प्रसाद, अवर अभियंता चंद्रप्रकाश, विभाष सोनी, हेमंत शुक्ला, नितिन चौरसिया, इकबाल, अशोक, तिलक, कैलाश, हरगोविंद मौजूद रहे ।