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सड़क पर भवन निर्माण सामग्री डालने पर लगेगा दंड
Updated Thu, 29 Jun 2017 06:59 PM IST
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जुर्माना वसूलने में नगरपालिका फिसड्डी
ललितपुर। नगर पालिका परिषद सड़कों को गंदा करने वालों पर सख्ती से पेश नहीं आ रही है, जिससे सड़क पर भवन निर्माण सामग्री डालने पर पचास हजार एवं कचरा फैलाने व जलाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने की व्यवस्था कागजों में सिमटकर रह गई है।
पौधरोपण सरीखे कार्यक्रम चलाने के बाद भी प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, जिससे नागरिकों को तमाम बीमारियां हो रहीं हैं। इसके मद्देनजर बीते सालों में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली ने वर्धमान कौशिक एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की सुनवाई के दौरान आदेश पारित किया था। वहीं, उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच ने वायु प्रदूषण रोके जाने के संबंध में स्वत: संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए आदेशित किया है, इसके अनुपालन में बीते माह में शासन के विशेष सचिव डा. अनिल कुमार सिंह ने जिलाधिकारी सहित नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को निर्देश जारी किए। इसके बाद निर्देशों का अक्षरश: पालन नहीं हो सका। इस दौरान पाया गया कि गाजियाबाद, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, बरेली एवं मुरादाबाद ने न्यायाधिकरण के आदेश के अनुपालन में भवन सामग्री को सड़क पर रखे जाने, नगरीय ठोस अपशिष्ट को सड़क के किनारे फेेंके जाने एवं अपशिष्ट को जलाये जाने के संबंध में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ अर्थदंड की वसूली एवं चालान किए गए हैं। अन्य नगर निगम एवं नगर पालिका परिषद ने कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है, जबकि एनजीटी एक्ट 2000 की धारा 15 एवं 16 में किए गए प्रावधानों के अनुसार सड़क किनारे भवन निर्माण सामग्री के अवशेष को सड़क पर रखे जाने पर पचास हजार रुपये एवं नगरीय ठोस अपशिष्ट को सड़क के किनारे फेंकने एवं अपशिष्टों को जलाए जाने की घटना पर पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड दोषी के खिलाफ अधिरोपित किए जाने के निर्देश दिए हैं।
......
जताई अनभिज्ञता
गत दिवस ही चार्ज लिया है, इसलिए इसकी जानकारी नहीं है। इसका पता लगाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अनिल कुमार अरूण
प्रभारी अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।
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ललितपुर। नगर पालिका परिषद सड़कों को गंदा करने वालों पर सख्ती से पेश नहीं आ रही है, जिससे सड़क पर भवन निर्माण सामग्री डालने पर पचास हजार एवं कचरा फैलाने व जलाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाने की व्यवस्था कागजों में सिमटकर रह गई है।
पौधरोपण सरीखे कार्यक्रम चलाने के बाद भी प्रदेश में वायु प्रदूषण की समस्या बनी हुई है, जिससे नागरिकों को तमाम बीमारियां हो रहीं हैं। इसके मद्देनजर बीते सालों में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण नई दिल्ली ने वर्धमान कौशिक एवं अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया की सुनवाई के दौरान आदेश पारित किया था। वहीं, उच्च न्यायालय लखनऊ बेंच ने वायु प्रदूषण रोके जाने के संबंध में स्वत: संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए आदेशित किया है, इसके अनुपालन में बीते माह में शासन के विशेष सचिव डा. अनिल कुमार सिंह ने जिलाधिकारी सहित नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को निर्देश जारी किए। इसके बाद निर्देशों का अक्षरश: पालन नहीं हो सका। इस दौरान पाया गया कि गाजियाबाद, लखनऊ, इलाहाबाद, कानपुर, बरेली एवं मुरादाबाद ने न्यायाधिकरण के आदेश के अनुपालन में भवन सामग्री को सड़क पर रखे जाने, नगरीय ठोस अपशिष्ट को सड़क के किनारे फेेंके जाने एवं अपशिष्ट को जलाये जाने के संबंध में दोषी व्यक्तियों के खिलाफ अर्थदंड की वसूली एवं चालान किए गए हैं। अन्य नगर निगम एवं नगर पालिका परिषद ने कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की है, जबकि एनजीटी एक्ट 2000 की धारा 15 एवं 16 में किए गए प्रावधानों के अनुसार सड़क किनारे भवन निर्माण सामग्री के अवशेष को सड़क पर रखे जाने पर पचास हजार रुपये एवं नगरीय ठोस अपशिष्ट को सड़क के किनारे फेंकने एवं अपशिष्टों को जलाए जाने की घटना पर पांच हजार रुपये का आर्थिक दंड दोषी के खिलाफ अधिरोपित किए जाने के निर्देश दिए हैं।
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जताई अनभिज्ञता
गत दिवस ही चार्ज लिया है, इसलिए इसकी जानकारी नहीं है। इसका पता लगाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अनिल कुमार अरूण
प्रभारी अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।