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धूमधाम से मनाया गुरु हरगोविंद का प्रकाशोत्सव
Updated Sun, 11 Jun 2017 02:39 AM IST
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धूमधाम से मनाया गुरु हरगोविंद का प्रकाशोत्सव
गुरुद्वारा में आयोजित हुआ अखंड पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाया गया। इसमें गुरु विचारों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया।
गुरुद्वारा में आयोजित श्रीअखंड पाठ का आयोजन किया गया। इसके बाद यहां ग्रंथी मोहकम सिंह द्वारा शब्द गायन और गुरु विचारों को रखा गया। उन्होंने कहा कि पंचम बादशाह गुरु अर्जुन देव की शहादत के बाद यह महसूस किया गया कि अब जुल्म की टक्कर के लिए हथियार उठाए जाए, इसीलिए गुरु हरगोविंद सिंह ने दो तलवारें धारण की। एक तलवार मीरी और एक पीरी यानि भक्ति के साथ शक्ति की भी जरूरत पूरी करे। गुरु सिंह सभा के ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि मुगल शासक जहांगीर द्वारा गुरु के बड़े भाई पृथ्वीचंद केे बहकावे में आकर गुरु को अमृतसर से दिल्ली बुलवाकर उन्हें कैद कर लिया और ग्वालियर की जेल में कैद कर दिया। लाहौर से सूफी संत सांई मियास मीर के समझाने पर गुरु को रिहा करने का आदेश किया, लेकिन गुरु हरगोविंद ने उस जेल में बंद बावन यमन राहो को भी साथ में रिहा करने की शर्त रखी, जिसे जहांगीर ने मान लिया और सबको रिहा कर दिया। उस दिन से इनका नाम दाता बंदी छोड़ पड़ा। यहां मंत्री दरबीर सिंह अरोरा ने कहा कि जब गुरु को रिहा करने के बाद दिल्ली में अपने पास ही रखा और उनका खूब स्वागत किया। उसे भय था कि कहीं यह अमृतसर पहुंचकर बगावत न कर दे। जहांगीर की मृत्यु के बाद उसके पुत्र शाहजहां ने उन्हें लाहौर बुला लिया, जहां एक बार शिकार खेलते वक्त एक शेर ने शाहजहां पर हमला कर दिया, तब गुरु ने तलवार के एक ही बार से उसके दो टुकड़े कर दिए थे। अंत में आभार उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सलूजा व संचालन दरबीर सिंह अरोरा ने किया। इस मौके पर सरदार परसन सिंह, सतवंत सिंह, मंत्री भोगल, सरदार परमजीत सिंह, छतवाल, सुरजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, कुलदीप सिंह अरोरा, मनजीत कौर परमार, हरजीत सिंह, तेजवंत सिंह रीन, सतनाम सिंह, मनिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, आदि उपस्थित रहे।
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गुरुद्वारा में आयोजित हुआ अखंड पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव लक्ष्मीपुरा स्थित गुरुद्वारा में धूमधाम से मनाया गया। इसमें गुरु विचारों से श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया।
गुरुद्वारा में आयोजित श्रीअखंड पाठ का आयोजन किया गया। इसके बाद यहां ग्रंथी मोहकम सिंह द्वारा शब्द गायन और गुरु विचारों को रखा गया। उन्होंने कहा कि पंचम बादशाह गुरु अर्जुन देव की शहादत के बाद यह महसूस किया गया कि अब जुल्म की टक्कर के लिए हथियार उठाए जाए, इसीलिए गुरु हरगोविंद सिंह ने दो तलवारें धारण की। एक तलवार मीरी और एक पीरी यानि भक्ति के साथ शक्ति की भी जरूरत पूरी करे। गुरु सिंह सभा के ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि मुगल शासक जहांगीर द्वारा गुरु के बड़े भाई पृथ्वीचंद केे बहकावे में आकर गुरु को अमृतसर से दिल्ली बुलवाकर उन्हें कैद कर लिया और ग्वालियर की जेल में कैद कर दिया। लाहौर से सूफी संत सांई मियास मीर के समझाने पर गुरु को रिहा करने का आदेश किया, लेकिन गुरु हरगोविंद ने उस जेल में बंद बावन यमन राहो को भी साथ में रिहा करने की शर्त रखी, जिसे जहांगीर ने मान लिया और सबको रिहा कर दिया। उस दिन से इनका नाम दाता बंदी छोड़ पड़ा। यहां मंत्री दरबीर सिंह अरोरा ने कहा कि जब गुरु को रिहा करने के बाद दिल्ली में अपने पास ही रखा और उनका खूब स्वागत किया। उसे भय था कि कहीं यह अमृतसर पहुंचकर बगावत न कर दे। जहांगीर की मृत्यु के बाद उसके पुत्र शाहजहां ने उन्हें लाहौर बुला लिया, जहां एक बार शिकार खेलते वक्त एक शेर ने शाहजहां पर हमला कर दिया, तब गुरु ने तलवार के एक ही बार से उसके दो टुकड़े कर दिए थे। अंत में आभार उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सलूजा व संचालन दरबीर सिंह अरोरा ने किया। इस मौके पर सरदार परसन सिंह, सतवंत सिंह, मंत्री भोगल, सरदार परमजीत सिंह, छतवाल, सुरजीत सिंह सलूजा, मनजीत सिंह सलूजा, कुलदीप सिंह अरोरा, मनजीत कौर परमार, हरजीत सिंह, तेजवंत सिंह रीन, सतनाम सिंह, मनिंदर सिंह, चरनजीत सिंह, आदि उपस्थित रहे।
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