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यदि टहलना हो तो ही जाए चंद्रेशखर उ्द्यान पार्क
Updated Sun, 14 Jan 2018 03:29 AM IST
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अब सुबह शाम ही खुलेगा चंद्रशेखर पार्क
ललितपुर। यदि शहर के बीचोबीच बने चंद्रशेखर उद्यान पार्क में दो पल सुकून से गुजारने की सोच रहे हों तो यह भूल जाइये। अब पार्क केवल सुबह-शाम ही खुलता है। उद्यान विभाग के अफसरों ने इसे दोपहर में बंद रखने का फैसला किया है। इसका विपरीत असर उन ग्रामीणों पर पड़ा है जो शहर में काम पूरा होने के उपरांत पार्क में कुछ समय के लिए ठहर लेते थे। लेकिन, विभाग के नए फरमान से उन्हें मायूसी हाथ लग रही है।
गुलामी के समय ललितपुर में अंग्रेजों की कंपनी का डेरा हुआ करता था। उन्होंने अपनी सुविधा के लिए एक बाग का निर्माण कराया था जो स्वीमिंग पुल से लैस था। जब देश आजादी हुआ तो इसे नगर पालिका ने अपनी देखरेख में ले लिया। नगर पालिका अध्यक्षों ने पार्क पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन यह पार्क लंबे समय तक पालिका की सुपुर्दगी में नहीं रह सका। शासन के निर्देश पर इसे उद्यान विभाग ने अपनी निगरानी में ले लिया। यहीं से इसकी बदहाली की कहानी शुरू हो गई। पार्क के रखरखाव के प्रति उदासीनता बरती जाने लगी। नगर पालिका ने शहर के बीच में और कोई पार्क नहीं होने से इसके विकास में अपना योगदान देना दोबारा शुरू कर दिया। लेकिन, पार्क पुराने स्वरूप में नहीं लौट पाया। वर्तमान में पार्क की यह हालात हो गई कि उद्यान विभाग ने पार्क को खोलने का समय सुबह-शाम तक सीमित कर दिया है। इसका सबसे प्रभाव उन ग्रामीणों पर पड़ा है जो सुबह शहर में किसी काम के लिए आते हैं और उनकी बस, टैक्सी या फिर अन्य वाहन से वापस लौटने का समय शाम को है, ऐसे लोग इस पार्क में समय बिताते थे। कुछ मजदूर काम नहीं मिलने की दशा में पार्क में रुक जाते थे। जब से पार्क दिन में बंद होने लगा है तब से ग्रामीण समय बिताने के लिए यहां-वहां भटकते रहते हैं। कई ग्रामीण तो पार्क के गेट के पास ही बैठ जाते हैं। इसके अलावा तमाम संगठनों की बैठकें भी बंद हो गई हैं। उधर, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा का कहना है कि पार्क ठहरने के लिए बनाए जाते हैं। जहां तक पार्क की साफ-सफाई की बात है तो नगर पालिका को इसकी जिम्मेदारी उठाना चाहिए। यदि पार्क को पूर्व की तरह दिन में नहीं खोला जाता है तो कांग्रेस इसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी।
अब तो नगर भवन भी नहीं रहा
पूर्व के समय में नगर पालिका ने लोगों को ठहरने की सुविधा प्रदान कर रखी थी, इसे नगर भवन का नाम दिया गया था जो अब पालिका का स्टोर बन गया है। इन हालात में लोग पार्क का सहारा लेते थे, उसे भी रोक दिया गया। उद्यान विभाग के सुबह शाम पार्क खोलने की फैसले की नगर में आलोचना हो रही है।
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पार्क में बैठते हैं अनावश्यक लोग
पार्क में अराजकतत्व बैठकर गंदगी फैलाते हैं। इस वजह से सुबह दस बजे के बाद गेट में ताला लगवा दिया जाता है। इसे शाम साढ़े चार बजे खोला जाता है। इस तरह पार्क साफ-सुथरा बना रहता है।
सुघर सिंह
जिला उद्यान अधिकारी
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ललितपुर। यदि शहर के बीचोबीच बने चंद्रशेखर उद्यान पार्क में दो पल सुकून से गुजारने की सोच रहे हों तो यह भूल जाइये। अब पार्क केवल सुबह-शाम ही खुलता है। उद्यान विभाग के अफसरों ने इसे दोपहर में बंद रखने का फैसला किया है। इसका विपरीत असर उन ग्रामीणों पर पड़ा है जो शहर में काम पूरा होने के उपरांत पार्क में कुछ समय के लिए ठहर लेते थे। लेकिन, विभाग के नए फरमान से उन्हें मायूसी हाथ लग रही है।
गुलामी के समय ललितपुर में अंग्रेजों की कंपनी का डेरा हुआ करता था। उन्होंने अपनी सुविधा के लिए एक बाग का निर्माण कराया था जो स्वीमिंग पुल से लैस था। जब देश आजादी हुआ तो इसे नगर पालिका ने अपनी देखरेख में ले लिया। नगर पालिका अध्यक्षों ने पार्क पर लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन यह पार्क लंबे समय तक पालिका की सुपुर्दगी में नहीं रह सका। शासन के निर्देश पर इसे उद्यान विभाग ने अपनी निगरानी में ले लिया। यहीं से इसकी बदहाली की कहानी शुरू हो गई। पार्क के रखरखाव के प्रति उदासीनता बरती जाने लगी। नगर पालिका ने शहर के बीच में और कोई पार्क नहीं होने से इसके विकास में अपना योगदान देना दोबारा शुरू कर दिया। लेकिन, पार्क पुराने स्वरूप में नहीं लौट पाया। वर्तमान में पार्क की यह हालात हो गई कि उद्यान विभाग ने पार्क को खोलने का समय सुबह-शाम तक सीमित कर दिया है। इसका सबसे प्रभाव उन ग्रामीणों पर पड़ा है जो सुबह शहर में किसी काम के लिए आते हैं और उनकी बस, टैक्सी या फिर अन्य वाहन से वापस लौटने का समय शाम को है, ऐसे लोग इस पार्क में समय बिताते थे। कुछ मजदूर काम नहीं मिलने की दशा में पार्क में रुक जाते थे। जब से पार्क दिन में बंद होने लगा है तब से ग्रामीण समय बिताने के लिए यहां-वहां भटकते रहते हैं। कई ग्रामीण तो पार्क के गेट के पास ही बैठ जाते हैं। इसके अलावा तमाम संगठनों की बैठकें भी बंद हो गई हैं। उधर, कांग्रेस के नगर अध्यक्ष हरीबाबू शर्मा का कहना है कि पार्क ठहरने के लिए बनाए जाते हैं। जहां तक पार्क की साफ-सफाई की बात है तो नगर पालिका को इसकी जिम्मेदारी उठाना चाहिए। यदि पार्क को पूर्व की तरह दिन में नहीं खोला जाता है तो कांग्रेस इसके खिलाफ प्रदर्शन करेगी।
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अब तो नगर भवन भी नहीं रहा
पूर्व के समय में नगर पालिका ने लोगों को ठहरने की सुविधा प्रदान कर रखी थी, इसे नगर भवन का नाम दिया गया था जो अब पालिका का स्टोर बन गया है। इन हालात में लोग पार्क का सहारा लेते थे, उसे भी रोक दिया गया। उद्यान विभाग के सुबह शाम पार्क खोलने की फैसले की नगर में आलोचना हो रही है।
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पार्क में बैठते हैं अनावश्यक लोग
पार्क में अराजकतत्व बैठकर गंदगी फैलाते हैं। इस वजह से सुबह दस बजे के बाद गेट में ताला लगवा दिया जाता है। इसे शाम साढ़े चार बजे खोला जाता है। इस तरह पार्क साफ-सुथरा बना रहता है।
सुघर सिंह
जिला उद्यान अधिकारी