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भिक्खु जगदीश कश्यप को याद किया
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भिक्खु जगदीश कश्यप को याद किया
ललितपुर। सुमेध भूमि बुद्ध विहार डॉ. अंबेडकर पार्क झांसीपुरा में भिक्खु जगदीश कश्यप को 121 वें जन्मदिन पर उन्हें याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने आल इंडिया भिक्खु संघ की स्थापना की। राजगीर में जापान पैगोडा के विकास में योगदान और ह्वेनसॉंग संग्रहालय की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो ने बताया कि भिक्खु जगदीश कश्यप का जन्म रांची में दो मई 1908 को हुआ था। इनका नाम जगदीश नारायण था। पटना कॉलेज से स्नातक तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1931 में संस्कृत, 1933 में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर परीक्षाएं पास करने के बाद बौद्ध भिक्खु बन गए। श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1936 में जापान जाते समय मलेशिया के पेनांग में गांधीजी का साथ देने के कारण उनको गिरफ्तार कर पेनांग (मलेशिया) की जेल में भेज दिया गया। यहां साहित्य का सृजन किया और 1937 में भारत आए। बीएचयू में पाली भाषा की कक्षाएं शुरू कराईं। 1960 के दशक में आल इंडिया भिक्खु संघ की स्थापना की। भिक्खु की लगन तथा प्रतिष्ठा को देखते हुए महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के स्कूल में प्राध्यापक रहने के साथ-साथ बीएचयू में पाली की कक्षाओं को देखते रहे। नालंदा में पाली की कक्षायें इस आशय से शुरू की गईं कि नालंदा को गौरव प्राप्त हो। राजगीर में जापान पैगोडा तथा इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ह्वेनसांग संग्रहालय की स्थापना का प्रयास शुरू किया, जो अब बनकर तैयार है। 28 जनवरी 1976 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
इस मौके पर प्रंबध समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, सचिव सूर्यनाथ राम, नबाव सिंह, राजाराम बौद्ध, जमुना प्रसाद, श्रवण कुमार, सतीश चंद्र गौरव, डा. राजेंद्र प्रसाद, दिपेंद्र, ज्ञानेंद्र्र कुमार, सिद्धार्थ, मंजूलता सिंह, राजकुमारी, शशी राज, मनीषा रिंकी, रूबी अहिरवार, दीप्ति सिंह आदि मौजूद रहीं। संचालन छोटे लाल सिद्धार्थ ने किया।
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ललितपुर। सुमेध भूमि बुद्ध विहार डॉ. अंबेडकर पार्क झांसीपुरा में भिक्खु जगदीश कश्यप को 121 वें जन्मदिन पर उन्हें याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने आल इंडिया भिक्खु संघ की स्थापना की। राजगीर में जापान पैगोडा के विकास में योगदान और ह्वेनसॉंग संग्रहालय की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
भिक्खु डॉ. सुमेध थेरो ने बताया कि भिक्खु जगदीश कश्यप का जन्म रांची में दो मई 1908 को हुआ था। इनका नाम जगदीश नारायण था। पटना कॉलेज से स्नातक तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1931 में संस्कृत, 1933 में दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर परीक्षाएं पास करने के बाद बौद्ध भिक्खु बन गए। श्रीलंका के केलानिया विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। 1936 में जापान जाते समय मलेशिया के पेनांग में गांधीजी का साथ देने के कारण उनको गिरफ्तार कर पेनांग (मलेशिया) की जेल में भेज दिया गया। यहां साहित्य का सृजन किया और 1937 में भारत आए। बीएचयू में पाली भाषा की कक्षाएं शुरू कराईं। 1960 के दशक में आल इंडिया भिक्खु संघ की स्थापना की। भिक्खु की लगन तथा प्रतिष्ठा को देखते हुए महाबोधि सोसाइटी आफ इंडिया के स्कूल में प्राध्यापक रहने के साथ-साथ बीएचयू में पाली की कक्षाओं को देखते रहे। नालंदा में पाली की कक्षायें इस आशय से शुरू की गईं कि नालंदा को गौरव प्राप्त हो। राजगीर में जापान पैगोडा तथा इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। ह्वेनसांग संग्रहालय की स्थापना का प्रयास शुरू किया, जो अब बनकर तैयार है। 28 जनवरी 1976 को उन्होंने अंतिम सांस ली।
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इस मौके पर प्रंबध समिति के उपाध्यक्ष राजेंद्र कुमार, सचिव सूर्यनाथ राम, नबाव सिंह, राजाराम बौद्ध, जमुना प्रसाद, श्रवण कुमार, सतीश चंद्र गौरव, डा. राजेंद्र प्रसाद, दिपेंद्र, ज्ञानेंद्र्र कुमार, सिद्धार्थ, मंजूलता सिंह, राजकुमारी, शशी राज, मनीषा रिंकी, रूबी अहिरवार, दीप्ति सिंह आदि मौजूद रहीं। संचालन छोटे लाल सिद्धार्थ ने किया।
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