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वितीय वर्ष का लक्ष्य छूता नहीं दिख रही मनरेगा
Updated Mon, 19 Feb 2018 01:48 AM IST
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ललितपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना मौजूदा वित्तीय वर्ष में निर्धारित मानव दिवस के लक्ष्य तक पहुंचती दिखाई नहीं दे रही है। इस माह के शनिवार तक 19 लाख 72 हजार मानव दिवस सृजित हो सके हैं, जबकि 27 लाख 99 वें हजार मानव दिवस लक्ष्य है। यदि रोजगार सृजन की यही रफ्तार रही तो मनरेगा का पिछड़ना तय माना जा रहा है।
मनरेगा साल भर हिचकोले खाती रही। कभी मजदूरों व सामग्री का भुगतान नहीं होना तो कभी मस्टररोल जारी नहीं होने की समस्या देखी गई। परिणाम यह हुआ कि मानव दिवस सृजन के मामले में मनरेगा लक्ष्य को पाती नहीं दिख रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान वित्तीय वर्ष में 27 लाख 99 वें हजार लक्ष्य के सापेक्ष 19 लाख 72 हजार मानव दिवस ही सृजित किया जा सके। आधी फरवरी निकल चुकी है और वित्तीय वर्ष का केवल एक माह ही शेष रह गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि कार्य में श्रमिक व्यस्त हैं। यदि विभाग ज्यादा मानव दिवस भी सृजित करती हैं तो श्रमिकों की उपलब्धता बड़ी समस्या बन सकती है। यदि यही परिस्थिति रही तो निर्धारित लक्ष्य पूरा होना नामुमकिन माना जा रहा है। हालांकि, विभागीय अधिकारी लक्ष्य के करीब तक पहुंचने के लिए आश्वस्त हैं।
सौ दिन का रोजगार दिलाने में महरौनी पिछड़ा
जिले में ब्लाक महरौनी 100 दिन के रोजगार दिलाने के मामले में पिछड़ता दिख रहा है। अभी तक केवल 83 कार्डधारकों को रोजगार मिला है। वहीं, विकासखंड बार में 137, बिरधा में 166, जखौरा में 178, मड़ावरा में 429, तालबेहट में 242 जाबकार्डधारकों को सौ दिन रोजगार दिया गया। इस तरह समूचे जिले में 1235 कार्डधारक ही रोजगार पा सके हैं।
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लाखों में चल रहा बकाया
मनरेगा में भुगतान की प्रक्रिया काफी धीमी है। जहां 114.14 लाख रुपये मजदूरों का फंसा हुआ है। वहीं, जिले का कुल मिलाकर 345.31 लाख रुपये बकाया बना हुआ है।
पहुंच जाएंगे मानव दिवस सृजन के लक्ष्य तक
100 दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या कम रह गई है। लेकिन हम मौजूदा वित्तीय वर्ष में मानव दिवस सृजन के लक्ष्य के करीब तक पहुंच जाएंगे।
जय सिंह, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार
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मनरेगा साल भर हिचकोले खाती रही। कभी मजदूरों व सामग्री का भुगतान नहीं होना तो कभी मस्टररोल जारी नहीं होने की समस्या देखी गई। परिणाम यह हुआ कि मानव दिवस सृजन के मामले में मनरेगा लक्ष्य को पाती नहीं दिख रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान वित्तीय वर्ष में 27 लाख 99 वें हजार लक्ष्य के सापेक्ष 19 लाख 72 हजार मानव दिवस ही सृजित किया जा सके। आधी फरवरी निकल चुकी है और वित्तीय वर्ष का केवल एक माह ही शेष रह गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि कार्य में श्रमिक व्यस्त हैं। यदि विभाग ज्यादा मानव दिवस भी सृजित करती हैं तो श्रमिकों की उपलब्धता बड़ी समस्या बन सकती है। यदि यही परिस्थिति रही तो निर्धारित लक्ष्य पूरा होना नामुमकिन माना जा रहा है। हालांकि, विभागीय अधिकारी लक्ष्य के करीब तक पहुंचने के लिए आश्वस्त हैं।
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सौ दिन का रोजगार दिलाने में महरौनी पिछड़ा
जिले में ब्लाक महरौनी 100 दिन के रोजगार दिलाने के मामले में पिछड़ता दिख रहा है। अभी तक केवल 83 कार्डधारकों को रोजगार मिला है। वहीं, विकासखंड बार में 137, बिरधा में 166, जखौरा में 178, मड़ावरा में 429, तालबेहट में 242 जाबकार्डधारकों को सौ दिन रोजगार दिया गया। इस तरह समूचे जिले में 1235 कार्डधारक ही रोजगार पा सके हैं।
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लाखों में चल रहा बकाया
मनरेगा में भुगतान की प्रक्रिया काफी धीमी है। जहां 114.14 लाख रुपये मजदूरों का फंसा हुआ है। वहीं, जिले का कुल मिलाकर 345.31 लाख रुपये बकाया बना हुआ है।
पहुंच जाएंगे मानव दिवस सृजन के लक्ष्य तक
100 दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या कम रह गई है। लेकिन हम मौजूदा वित्तीय वर्ष में मानव दिवस सृजन के लक्ष्य के करीब तक पहुंच जाएंगे।
जय सिंह, उपायुक्त, श्रम एवं रोजगार