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समाज में फैली कुरीतियां दूर कर संगठित होने का आह्वान
Updated Mon, 01 Oct 2018 04:36 AM IST
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समाज में फैली कुरीतियां दूर कर संगठित होने का आह्वान
ललितपुर। पंथ कोरी समाज द्वारा तालबेहट में संत कबीर मंदिर में एक बैठक आयोजित कर समाज में फैली कुरीतियां, विद्वेषता और आपसी मनमुटाव को दूर कर समाज को संगठित होने का आह्वान किया। तालबेहट स्थित संत कबीर मंदिर पर आयोजित बैठक में एक सभा में वक्ताओं ने समाज में वर्षों से फैली कुरीतियां, विद्वेषता और आपसी मनमुटाव को दूर कर समाज के विकास के लिए संगठित होने पर बल दिया। समिति के कोषाध्यक्ष मथुरा मास्टर ने कहा कि संत कबीर दूरदर्शी महान सूफी संत थे, जिन्होंने अपना जीवन फक्कड़पन में निकाल दिया। आडंबरों से मुक्त समाज की स्थापना कर सत्य पथ पर चलने का रास्ता बताया और संत कबीर ईर्ष्या द्वेष, राग और वैमनस्यता से परे थे। ऐसा संदेश उन्होंने समाज का जाग्रत करने के लिए दिया। मंदिर के विकास एवं उन्नति पर भी समाज के लोगों को अपने-अपने विचार रखे और समता मूलक समाज का निर्माण करने का संकल्प लिया। सभा में मौजूद बृजेंद्र कुमार, हल्केराम मलैया, मथुरा मास्टर, जमुना प्रसाद, विजय पंथ, प्रेमनारायण, दशरथ, घनश्याम, चंद्रप्रकाश, गनेश, मानसिंह, नरेंद्र उर्फ गोलू, रतन, लक्ष्मीनारायण, मनीराम, लालाराम, कृपाराम, जगदीश, हरीराम, कांशीराम, विजय, शंकरलाल आदि शामिल रहे। आभार समिति संरक्षक हल्के राम मलैया ने जताया।
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ललितपुर। पंथ कोरी समाज द्वारा तालबेहट में संत कबीर मंदिर में एक बैठक आयोजित कर समाज में फैली कुरीतियां, विद्वेषता और आपसी मनमुटाव को दूर कर समाज को संगठित होने का आह्वान किया। तालबेहट स्थित संत कबीर मंदिर पर आयोजित बैठक में एक सभा में वक्ताओं ने समाज में वर्षों से फैली कुरीतियां, विद्वेषता और आपसी मनमुटाव को दूर कर समाज के विकास के लिए संगठित होने पर बल दिया। समिति के कोषाध्यक्ष मथुरा मास्टर ने कहा कि संत कबीर दूरदर्शी महान सूफी संत थे, जिन्होंने अपना जीवन फक्कड़पन में निकाल दिया। आडंबरों से मुक्त समाज की स्थापना कर सत्य पथ पर चलने का रास्ता बताया और संत कबीर ईर्ष्या द्वेष, राग और वैमनस्यता से परे थे। ऐसा संदेश उन्होंने समाज का जाग्रत करने के लिए दिया। मंदिर के विकास एवं उन्नति पर भी समाज के लोगों को अपने-अपने विचार रखे और समता मूलक समाज का निर्माण करने का संकल्प लिया। सभा में मौजूद बृजेंद्र कुमार, हल्केराम मलैया, मथुरा मास्टर, जमुना प्रसाद, विजय पंथ, प्रेमनारायण, दशरथ, घनश्याम, चंद्रप्रकाश, गनेश, मानसिंह, नरेंद्र उर्फ गोलू, रतन, लक्ष्मीनारायण, मनीराम, लालाराम, कृपाराम, जगदीश, हरीराम, कांशीराम, विजय, शंकरलाल आदि शामिल रहे। आभार समिति संरक्षक हल्के राम मलैया ने जताया।