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जालसाजी कर हड़पा अमृत योजना का 2.17 करोड़ का काम
Updated Sun, 01 Jul 2018 12:57 AM IST
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जालसाजी कर हड़पा अमृत योजना का 2.17 करोड़ का काम
- अधिकारियों की मिलीभगत से बनवा लिया फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र
- जन सूचना अधिकार से मांगी गई सूचना में हुआ खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जल निगम के एक ठेकेदार ने फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना का करीब दो करोड़ 17 लाख रुपये का काम हड़प लिया। इसका खुलासा (जन सूचना अधिकार) आरटीआई के जरिये होते ही विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। यह कार्य अनुभव प्रमाणपत्र जल संस्थान से ही जारी किया गया है। आईटीआई में दिए जवाब में अधिकारियों ने इस प्रमाणपत्र को जारी करने के संबंध में कोई भी कागज कार्यालय में न होने की बात स्वीकारी है। इस जालसाजी में केवल ठेकेदार ही नहीं जल संस्थान के अधिकारी भी संदेह के घेरे में शामिल हो गए हैं।
शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने के लिए भारत सरकार अमृत योजना संचालित कर रही है। इसी अमृत योजना के तहत विगत वित्तीय वर्ष 2016 में शहर के शत-प्रतिशत घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें बिना नल कनेक्शन वाले 4,942 घरों ने नल कनेक्शन किए जाने थे। इस कार्ययोजना की कुल लागत करीब 02 करोड़ 17 लाख रुपये स्वीकृत की गई थी। भारत सरकार इस महत्वपूर्ण योजना में मानकों व गुणवत्ता के दृष्टिकोण से जारी शासनादेश में यह नियम-शर्त रखी गई थी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाले ठेकेदार का कुल लागत यानि 2.17 करोड़ का कम से कम 80 फीसदी लागत का एक कार्य, 50 प्रतिशत लागत का दो कार्य या फिर 40 प्रतिशत लागत के तीन कार्यों का कार्य अनुभव होना चाहिए। इस टेंडर प्रक्रिया में विभाग के ए-क्लास गवर्नमेंट ठेकेदार ने जल संस्थान के अधिकारियों से सांठगांठ करके या फिर अन्य तरह से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करा लिया था। उसी अनुभव के आधार पर इस महत्वपूर्ण योजना कार्य का ठेका भी अपने नाम ले लिया। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। जिसमें जल संस्थान के पूर्व अधिशासी अभियंता रघुवेंद्र कुमार ने खुद ही आरटीआई में यह लिखित रुप में दिया है कि अनुभव प्रमाण पत्र में जो पांच कार्यों के कागजों में से तीन के कागज विभाग में नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की सांठगांठ से यह फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवा लिया है। ठेकेदार ने जालसाजी करके करोड़ों रुपये का काम तो हड़प लिया है, लेकिन शासन की मंशा के अनुरूप व तय समय सीमा के भीतर कार्ययोजना का सिर्फ 40 फीसदी ही काम करा पाया है।
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अनुभव प्रमाण पत्र में साफ दिखा फर्जीवाड़ा
जल संस्थान ने ठेकेदार का जो फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया है, उसमें जालसाजी व फर्जीवाड़ा अलग ही झलक रहा है। इस अनुभव प्रमाण पत्र में पांच में से तीन अभिलेखों को अधिकारी खुद गलत बता रहे है, दो में से जल संस्थान के अधिकारियों ने चंद लाख रुपये के कार्यों में लाखों रुपये के पाइपों की लागत भी जोड़ दी है, जिससे ठेकेदार का कोई सरोकार नहीं होता है। पाइप लाइन विभाग ही आपूर्ति कराता है। इसके अलावा इस अनुबंध प्रमाण पत्र में पांचों कार्यों की लागत 90 लाख रुपये दर्शाई गई है, उसका सीधा उद्देश्य केवल ठेकेदार को अमृत योजना का कार्य दिलाने का रहा है। नियमानुसार ठेकेदार के पास अमृत योजना की कुल लागत यानि 2.17 करोड़ की 40 फीसदी यानि 86.8 लाख रुपये होना चाहिए थे।
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विभागीय बजट से ज्यादा का बना दिया अनुभव प्रमाण पत्र
विभाग ने जो अनुभव प्रमाण बनाया है उसमें उक्त ठेकेदार द्वारा मई 2015 से जून 2016 तक यानि एक वर्ष के कार्यकाल में कुल 04 करोड़ 45 लाख 81 हजार रुपये कार्य लागत का केवल मरम्मत कार्यों का अनुभव दर्शा दिया है। सूत्रों के मुताबिक इतना तो बजट विभाग को पूरे एक वित्तीय वर्ष में नहीं मिलता है। शासन को मिलने वाले बजट में कार्यालय के समस्त अधिकारियों, कर्मियों व कर्मचारियों का वेतन और आउट सोर्सिंग कर्मचारियों का मानदेय व विभाग के अन्य खर्च भी होते हैं। विभाग के अन्य अधिकारियों के भी गले से यह बात नहीं उतर रही है कि एक वर्ष में साढ़े 4 करोड़ का मरम्मत का कार्य और केवल एक ही ठेकेदार को देना यह कैसे संभव है।
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मामला संज्ञान में नहीं है
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान ललितपुर।
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होगी सख्त कार्रवाई
मामला संज्ञान में नही था। मामला बहुत गंभीर है, इसकी जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही जांच में दोषी पाए जाने अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कराई जाएगी।
- मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी, ललितपुर।
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- अधिकारियों की मिलीभगत से बनवा लिया फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र
- जन सूचना अधिकार से मांगी गई सूचना में हुआ खुलासा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जल निगम के एक ठेकेदार ने फर्जी कार्य अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत योजना का करीब दो करोड़ 17 लाख रुपये का काम हड़प लिया। इसका खुलासा (जन सूचना अधिकार) आरटीआई के जरिये होते ही विभागीय अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। यह कार्य अनुभव प्रमाणपत्र जल संस्थान से ही जारी किया गया है। आईटीआई में दिए जवाब में अधिकारियों ने इस प्रमाणपत्र को जारी करने के संबंध में कोई भी कागज कार्यालय में न होने की बात स्वीकारी है। इस जालसाजी में केवल ठेकेदार ही नहीं जल संस्थान के अधिकारी भी संदेह के घेरे में शामिल हो गए हैं।
शहरी क्षेत्रों की कायाकल्प करने के लिए भारत सरकार अमृत योजना संचालित कर रही है। इसी अमृत योजना के तहत विगत वित्तीय वर्ष 2016 में शहर के शत-प्रतिशत घरों में स्वच्छ पेयजल पहुंचाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई थी, जिसमें बिना नल कनेक्शन वाले 4,942 घरों ने नल कनेक्शन किए जाने थे। इस कार्ययोजना की कुल लागत करीब 02 करोड़ 17 लाख रुपये स्वीकृत की गई थी। भारत सरकार इस महत्वपूर्ण योजना में मानकों व गुणवत्ता के दृष्टिकोण से जारी शासनादेश में यह नियम-शर्त रखी गई थी टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाले ठेकेदार का कुल लागत यानि 2.17 करोड़ का कम से कम 80 फीसदी लागत का एक कार्य, 50 प्रतिशत लागत का दो कार्य या फिर 40 प्रतिशत लागत के तीन कार्यों का कार्य अनुभव होना चाहिए। इस टेंडर प्रक्रिया में विभाग के ए-क्लास गवर्नमेंट ठेकेदार ने जल संस्थान के अधिकारियों से सांठगांठ करके या फिर अन्य तरह से फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करा लिया था। उसी अनुभव के आधार पर इस महत्वपूर्ण योजना कार्य का ठेका भी अपने नाम ले लिया। इस बात का खुलासा एक आरटीआई में हुआ है। जिसमें जल संस्थान के पूर्व अधिशासी अभियंता रघुवेंद्र कुमार ने खुद ही आरटीआई में यह लिखित रुप में दिया है कि अनुभव प्रमाण पत्र में जो पांच कार्यों के कागजों में से तीन के कागज विभाग में नहीं है। इसका सीधा मतलब है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की सांठगांठ से यह फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र बनवा लिया है। ठेकेदार ने जालसाजी करके करोड़ों रुपये का काम तो हड़प लिया है, लेकिन शासन की मंशा के अनुरूप व तय समय सीमा के भीतर कार्ययोजना का सिर्फ 40 फीसदी ही काम करा पाया है।
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अनुभव प्रमाण पत्र में साफ दिखा फर्जीवाड़ा
जल संस्थान ने ठेकेदार का जो फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी किया है, उसमें जालसाजी व फर्जीवाड़ा अलग ही झलक रहा है। इस अनुभव प्रमाण पत्र में पांच में से तीन अभिलेखों को अधिकारी खुद गलत बता रहे है, दो में से जल संस्थान के अधिकारियों ने चंद लाख रुपये के कार्यों में लाखों रुपये के पाइपों की लागत भी जोड़ दी है, जिससे ठेकेदार का कोई सरोकार नहीं होता है। पाइप लाइन विभाग ही आपूर्ति कराता है। इसके अलावा इस अनुबंध प्रमाण पत्र में पांचों कार्यों की लागत 90 लाख रुपये दर्शाई गई है, उसका सीधा उद्देश्य केवल ठेकेदार को अमृत योजना का कार्य दिलाने का रहा है। नियमानुसार ठेकेदार के पास अमृत योजना की कुल लागत यानि 2.17 करोड़ की 40 फीसदी यानि 86.8 लाख रुपये होना चाहिए थे।
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विभागीय बजट से ज्यादा का बना दिया अनुभव प्रमाण पत्र
विभाग ने जो अनुभव प्रमाण बनाया है उसमें उक्त ठेकेदार द्वारा मई 2015 से जून 2016 तक यानि एक वर्ष के कार्यकाल में कुल 04 करोड़ 45 लाख 81 हजार रुपये कार्य लागत का केवल मरम्मत कार्यों का अनुभव दर्शा दिया है। सूत्रों के मुताबिक इतना तो बजट विभाग को पूरे एक वित्तीय वर्ष में नहीं मिलता है। शासन को मिलने वाले बजट में कार्यालय के समस्त अधिकारियों, कर्मियों व कर्मचारियों का वेतन और आउट सोर्सिंग कर्मचारियों का मानदेय व विभाग के अन्य खर्च भी होते हैं। विभाग के अन्य अधिकारियों के भी गले से यह बात नहीं उतर रही है कि एक वर्ष में साढ़े 4 करोड़ का मरम्मत का कार्य और केवल एक ही ठेकेदार को देना यह कैसे संभव है।
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मामला संज्ञान में नहीं है
यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मामले की जांच कराकर उचित कार्रवाई की जाएगी।
- सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान ललितपुर।
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होगी सख्त कार्रवाई
मामला संज्ञान में नही था। मामला बहुत गंभीर है, इसकी जांच कराई जाएगी। इसके साथ ही जांच में दोषी पाए जाने अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कराई जाएगी।
- मानवेंद्र सिंह, जिलाधिकारी, ललितपुर।