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स्वकर प्रभावी हुआ तो मकानों पर लगेगा तिगुना टैक्स

Mon, 21 Aug 2017 12:17 AM IST
Updated Mon, 21 Aug 2017 12:17 AM IST
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स्वकर प्रभावी हुआ तो मकानों पर लगेगा तिगुना टैक्स
स्वकर प्रभावी हुआ तो मकानों पर लगेगा तिगुना टैक्स
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ललितपुर।
यदि शहर में स्वकर प्रणाली पूरी तरह से प्रभावी हो गई तो मकान मालिकों को तिगुना टैक्स भरना पड़ेगा। इसके पीछे वजह यह है कि नगर पालिका परिषद ने इसे तीन वर्ष पहले लागू कर दिया था। लेकिन इस प्रणाली को अभी तक अमलीजामा नहीं पहनाया जा सका है। ऐसी स्थिति में जब भी मकानों का कर निर्धारण होगा तो मकान मालिकों को लागू होने की तिथि से कर देना होगा।
नगर पालिका परिषद ने अपनी आय बढ़ाने के लिए मकानों के कर निर्धारण की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए अब स्वकर प्रणाली लागू की है। निवर्तमान बोर्ड ने इसे वर्ष 2014 में हरी झंडी दे दी थी। इसके सर्वे की जिम्मेदारी अलीगढ़ की एक संस्था को दी गई। वर्ष 2015 में मकानों के सर्वे का कार्य आरंभ हुआ। लेकिन, इसका सत्यापन आज भी अधूरा है। विभागीय कर्मियों के मुताबिक सत्यापन का कार्य पंद्रह वार्डों का ही हो सका है। इस स्थिति में सभी छब्बीस वार्डों के सत्यापन में तीन माह से ज्यादा का समय लग सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि संस्था को एक साल का समय दिया गया था लेकिन कार्य पूरा करते-करते तीन साल हो गए। जिसका बोझ मकान मालिकों पर बढ़ना तय माना जा रहा है। मकानों पर उस दिन से टैक्स वसूला जाएगा, जिस दिन इसे लागू किया गया था। इस तरह मालिकों तीन साल का एक साथ टैक्स देना होगा। इन हालात में निर्धन परिवारों की मुश्किल बढ़ना तय मानी जा रही है। इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद के कर्मियों की मिलीभगत सामने आ रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि जिस कार्यदायी संस्था ने अपना काम तय समयसीमा नहीं कर पाया हो, उस पर कार्रवाई नोटिस देने तक सीमित रही। बीते महीनों में तो संस्था को आंशिक भुगतान भी कर दिया गया।
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ये रह गए अधूरे
स्वकर निर्धारण के लिए अभी रजिस्टर तैयार नहीं हो सके हैं और न ही डिमांड रजिस्टर व बिल बनाए जा सके हैं, मकान मालिकों को नोटिस देना दूर की बात। वर्तमान में जो नए मकान बन रहे हैं उन पर ही स्वकर वसूला जा रहा है जबकि पुराने मकानों पर टैक्स की कार्रवाई लंबित है।
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सर्वे में बढ़े मकान
स्वकर के लिए कराए सर्वे में मकानों की संख्या 24 हजार से बढ़कर करीब 37 हजार हो गई है। इसमें प्लाट भी शामिल हैं, लेकिन प्लॉटों की संख्या का पृथक से कोई ब्योरा तैयार नहीं है।

राजस्व निरीक्षकों के पास नहीं काम
स्वकर प्रणाली के अभाव में राजस्व निरीक्षकों के पास कोई स्थायी काम नहीं है। गत वर्ष एक राजस्व निरीक्षक कार्यरत था अब उसकी जगह तीन राजस्व निरीक्षक हो गए हैं। ऐसे में राजस्व निरीक्षक कार्यालय में समय बिताते नजर आते हैं।


क्या है स्वकर प्रणाली
स्वकर प्रणाली में मालिक को स्वयं अपने मकान या प्लॉट के कर का आंकलन करना होता है। जिसे निश्चित प्रारूप में भरकर देना होता है। इसमें मालिक अपने मकान या प्लॉट का एरिया छिपा नहीं सकते हैं। इसका कारण यह है कि पालिका ने पहले ही संस्था से मकान, प्लॉट के एरिया का सर्वे करा लिया है।

स्वकर वसूली में लग जाएंगे तीन साल
स्वकर वसूलने में अभी तीन माह और लग जाएंगे। वर्तमान में पंद्रह वार्डों का सत्यापन काम पूरा हो गया है। अवशेष वार्डों के सत्यापन का काम चल रहा है।
हेमंत कुमार, कर निरीक्षक
नगर पालिका परिषद ललितपुर।
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