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बाघ और वन्यजीवों की सुरक्षा और उनसे बचाव के लिए किया जागरूक
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महरताला की गोष्ठी में विचार रखते वनकर्मी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
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गोला गोकर्णनाथ। गोला रेंज के वनकर्मियों ने बांकेगंज ब्लॉक के ग्राम महरताला और महेशपुर रेंज के वनकर्मियों ने सिंगहा में गोष्ठी कर लोगों को बाघ से बचाव और वन्यजीवों की सुरक्षा के उपाय बताए।
महरताला में हुई वन्यजीव संरक्षण गोष्ठी में फॉरेस्टर धनीराम वर्मा ने वन्यजीवों की सुरक्षा के उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि लोगों को अपनी फसल बचाने के लिए मचान पर बैठना चाहिए। गन्ने की छिलाई खड़े होकर करें और अकेले खेतों में न जाएं। बच्चों को स्कूल स्वयं भेजने जाएं। रात के अंधरे में हांका लगाते हुए निकले, आग का प्रबंध रखे। वनकर्मी एमके वर्मा ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी जरूरी है, इनसे न केवल वनों को लाभ है बल्कि खेती किसानी में भी सुरक्षा की दृष्टि से लाभ मिलता है।
ममरी। सिंगहा के प्राथमिक विद्यालय में पूर्व प्रधान श्याम बिहारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षक प्रियनयन ने कहा कि मकान और गांव के आसपास झाड़ी साफ रखें, ताकि हिंसक वन्यजीवों वहां पहुंचने न पाए। बच्चों को अकेले खेत, बाजार न भेजें। फॉरेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि बाघ, तेंदुए हमारे शत्रु नहीं मित्र होते हैं। इंसान पर हमला तभी करते हैं जब खुद को घिरा, असुरक्षित महसूस करते हैं या फिर कोई उनकी शिकार में खलल डालता है। जिनसे बचने के लिए दूरी बनाए रखें और खेतों में काम झुक कर न करें। यदि कहीं पर बाघ की आहट मिलती है तो उसकी सूचना वन चौकी पर दें। बाघ द्वारा किए गए शिकार के पास न जाएं वरना वह हमला कर सकता है। संवाद
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महरताला में हुई वन्यजीव संरक्षण गोष्ठी में फॉरेस्टर धनीराम वर्मा ने वन्यजीवों की सुरक्षा के उपायों की जानकारी देते हुए कहा कि लोगों को अपनी फसल बचाने के लिए मचान पर बैठना चाहिए। गन्ने की छिलाई खड़े होकर करें और अकेले खेतों में न जाएं। बच्चों को स्कूल स्वयं भेजने जाएं। रात के अंधरे में हांका लगाते हुए निकले, आग का प्रबंध रखे। वनकर्मी एमके वर्मा ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी जरूरी है, इनसे न केवल वनों को लाभ है बल्कि खेती किसानी में भी सुरक्षा की दृष्टि से लाभ मिलता है।
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ममरी। सिंगहा के प्राथमिक विद्यालय में पूर्व प्रधान श्याम बिहारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शिक्षक प्रियनयन ने कहा कि मकान और गांव के आसपास झाड़ी साफ रखें, ताकि हिंसक वन्यजीवों वहां पहुंचने न पाए। बच्चों को अकेले खेत, बाजार न भेजें। फॉरेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि बाघ, तेंदुए हमारे शत्रु नहीं मित्र होते हैं। इंसान पर हमला तभी करते हैं जब खुद को घिरा, असुरक्षित महसूस करते हैं या फिर कोई उनकी शिकार में खलल डालता है। जिनसे बचने के लिए दूरी बनाए रखें और खेतों में काम झुक कर न करें। यदि कहीं पर बाघ की आहट मिलती है तो उसकी सूचना वन चौकी पर दें। बाघ द्वारा किए गए शिकार के पास न जाएं वरना वह हमला कर सकता है। संवाद
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