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मृत बाघिन के विसरे में नहीं मिला कोई जहरीला पदार्थ
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कांबिंग करती वन कर्मियों की टीम। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज जंगल से सटे एक खेत में मिले बाघिन के शव की विसरा रिपोर्ट आ गई है। जिसमें कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिला है। इससे जहर देकर शिकार किए जाने की आशंका खत्म हो गई है। इधर बाघिन के शिकार मामले में दो वन विभाग की लगातार जांच जारी है।
मैलानी रेंज जंगल की जटपुरा बीट और बांकेगंज कस्बे से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में मिले बाघिन के शव के गले में नायलान की रस्सी का फंदा कसा हुआ था। प्रथम दृष्टया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि गले में रस्सी काफी कस जाने से बाघिन कई दिनों तक कुछ खा पी नहीं सकी। जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के विसरे को सुरक्षित कर परीक्षण के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया था।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि आईवीआरआई बरेली से बाघिन की विसरा रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। जिसके अनुसार बाघिन के पेट में किसी तरह का कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिला है। अब वन विभाग गले में फंदा डालकर शिकार किए जाने को केंद्र बिंदु में रखकर मामले की जांच कर रहा है। इस बावत अब तक कई संदिग्धों से भी पूछताछ की जा चुकी है।
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करीब दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में वन विभाग के हाथ कुछ नया तथ्य नहीं लगा है। सुराग तलाशने के लिए जांच अधिकारी/एसडीओ निघासन जेपी श्रीवास्तव, ट्रेनी आईएफएस / प्रभारी रेंजर मैलानी राजेश कुमार के नेतृत्व में वन कर्मियों की टीम पूरे इलाके में जंगल और खेतों की सघन कांबिंग कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों से पूछताछ जारी है।
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मैलानी रेंज जंगल की जटपुरा बीट और बांकेगंज कस्बे से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में मिले बाघिन के शव के गले में नायलान की रस्सी का फंदा कसा हुआ था। प्रथम दृष्टया और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी इस बात की पुष्टि हुई थी कि गले में रस्सी काफी कस जाने से बाघिन कई दिनों तक कुछ खा पी नहीं सकी। जिससे उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के दौरान बाघिन के विसरे को सुरक्षित कर परीक्षण के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया था।
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल ने बताया कि आईवीआरआई बरेली से बाघिन की विसरा रिपोर्ट प्राप्त हो गई है। जिसके अनुसार बाघिन के पेट में किसी तरह का कोई जहरीला पदार्थ नहीं मिला है। अब वन विभाग गले में फंदा डालकर शिकार किए जाने को केंद्र बिंदु में रखकर मामले की जांच कर रहा है। इस बावत अब तक कई संदिग्धों से भी पूछताछ की जा चुकी है।
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करीब दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अब तक इस मामले में वन विभाग के हाथ कुछ नया तथ्य नहीं लगा है। सुराग तलाशने के लिए जांच अधिकारी/एसडीओ निघासन जेपी श्रीवास्तव, ट्रेनी आईएफएस / प्रभारी रेंजर मैलानी राजेश कुमार के नेतृत्व में वन कर्मियों की टीम पूरे इलाके में जंगल और खेतों की सघन कांबिंग कर रही है। इसके साथ ही ग्रामीणों से पूछताछ जारी है।