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Lakhimpur Kheri News: गला घोंटू बीमारी से बचाने के लिए पशुओं का टीकाकरण शुरू
Wed, 11 Jun 2025 11:25 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 11 Jun 2025 11:25 PM IST
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लखीमपुर खीरी। पशुओं को गला घोंटू जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के लिए जिले में टीकाकरण अभियान शुरू हो गया। जनपद में करीब 10 लाख पशुओं को निशुल्क टीका लगाया जाएगा। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में टीकाकरण को प्राथमिकता दी जाएगी। इसको लेकर कर्मचारियों को विशेष दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विभाग ने पशु पालकों से अपील की है कि वह अपने पशुओं को टीका जरूर लगवा लें।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि गलाघोंटू एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है। यह वैसे तो सभी पशुओं में होती है, लेकिन सबसे ज्यादा महिषवंशीय पशुओं में इसका खतरा रहता है। गलाघोंटू बीमारी में सबसे पहले पशु को बुखार आता है। इसके बाद गले में सूजन आ जाती है। इससे पशुओं को सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे पशुओं की मृत्यु हो सकती है। टीका लग जाने से बीमारी का खतरा बहुत कम हो जाता है।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि तीन माह से कम आयु वाले पशुओं और छह माह से अधिक गर्भावस्था वाले पशुओं को टीका नहीं लगेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जब भी टीम गांव में पहुंचे तो टीका जरूर लगाएं। गला घोंटू की बीमारी से बचाने के लिए हर साल टीकाकरण कराया जाता है। गला घोंटू का संक्रमण बरसात में ज्यादा होता है। इसको ध्यान में रखते हुए बरसात से पहले अभियान शुरू किया गया है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सचान ने बताया कि गलाघोंटू एक जीवाणु जनित संक्रामक रोग है। यह वैसे तो सभी पशुओं में होती है, लेकिन सबसे ज्यादा महिषवंशीय पशुओं में इसका खतरा रहता है। गलाघोंटू बीमारी में सबसे पहले पशु को बुखार आता है। इसके बाद गले में सूजन आ जाती है। इससे पशुओं को सांस लेने में दिक्कत होती है। इससे पशुओं की मृत्यु हो सकती है। टीका लग जाने से बीमारी का खतरा बहुत कम हो जाता है।
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मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि तीन माह से कम आयु वाले पशुओं और छह माह से अधिक गर्भावस्था वाले पशुओं को टीका नहीं लगेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि जब भी टीम गांव में पहुंचे तो टीका जरूर लगाएं। गला घोंटू की बीमारी से बचाने के लिए हर साल टीकाकरण कराया जाता है। गला घोंटू का संक्रमण बरसात में ज्यादा होता है। इसको ध्यान में रखते हुए बरसात से पहले अभियान शुरू किया गया है।
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