UP Nikay Chunav 2023: यूपी की इस सीट पर कांग्रेस ने आठ बार दर्ज की जीत, तीन बार भाजपा का परचम
वर्ष 1910 में लखीमपुर नगर पालिका का पहला बोर्ड गठित हुआ था। राजेंद्र बहादुर सिंह पहले अध्यक्ष बने थे। अब तक 26 बार अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ है, जबकि 14 बार प्रशासकों को पालिका की कमान संभालने का मौका मिला है।
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लखीमपुर नगर पालिका परिषद के चुनावी इतिहास में प्रत्यक्ष तौर पर आठ बार कांग्रेस और तीन बार भाजपा का कब्जा रहा है। शुरुआती दौर में नगर पालिका के चुनाव दलगत आधार पर न होकर व्यक्तित्व और व्यक्ति के काम के आधार पर होते थे। पहले नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता से नहीं होता था। बल्कि नगर पालिका सदस्य बहुमत के आधार पर चुनाव करते थे।
154 साल पहले 1868 में लखीमपुर को नोटीफाइड एरिया घोषित किया गया था, जबकि 1910 में नगर पालिका का पहला बोर्ड गठित हुआ था। राजेंद्र बहादुर सिंह पहले अध्यक्ष बने थे। अब तक 26 बार अध्यक्ष पद का चुनाव हुआ है, जबकि 14 बार प्रशासकों को पालिका की कमान संभालने का मौका मिला है। वर्ष 1990 में पहली बार नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव सीधे जनता के वोटों से हुआ। इस चुनाव में कांग्रेस के अवधेश कुमार मिश्र पहली बार जनता से निर्वाचित अध्यक्ष बने।
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1995 में नगर पालिका को नगर पालिका परिषद का दर्जा दिया गया और आरक्षण व्यवस्था लागू हुई। पहली बार यह सीट महिला के लिए आरक्षित हुई और नीरू पुरी को लखीमपुर नगर पालिका परिषद की पहली महिला अध्यक्ष बनने का गौरव हासिल हुआ।
कांग्रेस के हाथ में रही सबसे ज्यादा कमान
अब तक आठ बार नगर पालिका की कमान कांग्रेस के पास रही है। कांग्रेस से 1919 से 1922 तक मोहन लाल तिवारी, 1944 से 1946 तक कुंवर खुशवक्त राय, 1953 से 1957 तक बंशीधर मिश्र, 1969 से 1971 तक कृष्ण प्रमोद तिवारी, 1974 से 1977 तक कृष्ण प्रमोद तिवारी, 1990 से 1995 तक अवधेश मिश्र, 2000 से 2005 तक ज्ञान प्रकाश बाजपेई, 2006 से 2011 तक ज्ञान प्रकाश बाजपेई अध्यक्ष रहे। जबकि भाजपा से 1995 से 2000 तक नीरू पुरी, 2012 से 2017 तक डॉ. इरा श्रीवास्तव और 2017 से 2022 निरुपमा मौनी बाजपेई अध्यक्ष रहीं हैं।
बसपा नहीं पा सकी एक भी मौका
वर्ष 2006 में डॉ. इरा श्रीवास्तव बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। अगली बार भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ी और विजयी रहीं। ज्ञान प्रकाश बाजपेई 2000 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते बाद में वह शक्तिदल और फिर बसपा में चले गए लेकिन अगला चुनाव वह निर्दलीय उम्मीदवादर के रूप में जीते। इस तरह बसपा लखीमपुर नगर पालिका में एक बार भी पैर नहीं जमा सकी।
निर्दलीयों का भी रहा बड़ा दबदबा
लखीमपुर नगर पालिका में शुरुआती दौर में निर्दलीय उम्मीदवारों का दबदबा रहा है। राजेंद्र बहादुर सिंह, संकटा प्रसाद बाजपेयी, सरस्वती प्रसाद सक्सेना और लक्ष्मी नरायन आगा निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनाव जीते। वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी नरायन आगा लखीमपुर नगर पालिका के तीन बार अध्यक्ष रहे। पहली बार वह 1953 से 1957 तक अध्यक्ष बने, इसके बाद 1959 से 1964 तक, फिर 1971 से 1974 तक अध्यक्ष रहे।