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घटनास्थल पर फिर आया तेंदुआ, पकड़ने को एक पिंजरा तथा तीन कैमरे और लगाए
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तेंदुए के पग ङ्क्षचह देखते हुए
- फोटो : LAKHIMPUR
धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के बफरजोन की धौरहरा रेंज में रविवार की रात तेंदुआ उस स्थान पर दोबारा पहुंचा, जहां उसने सुबह चंदन (13) को मार डाला था। वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए प्रभावित इलाके में भी बहराइच की मोतीपुर रेंज से एक पिंजरा मंगवाकर लगाया है। साथ ही तीन कैमरे लगाए गए है। यहां बता दें कि 14 सितंबर को हुई घटना के बाद पहले से नौ नाइट विजन कैमरे और दो पिंजरे लगे हुए हैं।
साहबदीन पुरवा गांव निवासी 13 वर्षीय चंदन अपने पिता को खाना देने गया था। वह खेत में जानवरों के चारे के लिए गन्ने की पत्तियां तोड़ने लगा। इसी बीच खेत में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने हमला कर बच्चे को मार डाला था। रविवार देर रात पोस्टमार्टम के बाद जब उसका शव गांव पहुंचा तो ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। वन विभाग की ट्रैक्टर ट्रॉली पर अपना गुस्सा उतारा। वन कर्मचारियों से भी गालीगलौज की। रेंजर अनिल शाह के समझाने पर वे माने। इधर रविवार की रात में तेंदुआ फिर उस स्थान पर आया, जहां उसने चंदन की जान ली थी। इस बात की पुष्टि घटनास्थल पर मिले पगचिह्नों से हुई। वन दरोगा सत्यप्रकाश वर्मा, लतीफ, सतीश मिश्रा, बृजेश शुक्ला ने घटनास्थल पर तीन नाइट विजन कैमरे लगाकर निगरानी शुरू कर दी है। बहराइच जनपद के मोतीपुर रेंज से एक पिंजरा भी मंगवाया गया है जो देर शाम तक लगा दिया गया।
एक ही तेंदुआ कर रहा बच्चों पर हमला..
चकदहा गांव के चमारनपुरवा निवासी पुतान के 12 वर्षीय पुत्र बृजेश और चंदन को एक ही तेंदुए ने अपना शिकार बनाया है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब वन विभाग ने तेंदुए के पगचिह्नों का मिलान किया। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने भी इस बात की पुष्टि की।
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वन विभाग ने कराई मुनादी.. 16 साल तक के बच्चों को न भेजें खेत
पखवाड़े भर में तेंदुए के हमले में दो बच्चों को मौत से क्षेत्र में दहशत है। वन विभाग ने घटनास्थल से 25 किलोमीटर के दायरे के गांवों में मुनादी कराई है कि 16 साल तक के बच्चों को खेतों पर न भेजें।
इस संबंध में ग्राम प्रधानों को एसडीएम और बीडीओ के माध्यम से भी जानकारी दी गई है।
पहुंचे रेंजर, व्यवस्थाओं को परखा
वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह घटनास्थल पर पहुंचे। तेंदुए के पगचिह्नों के हिसाब से वन विभाग की टीम को तैनात किया। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि तेंदुआ 25 किलोमीटर वर्ग परिधि में चहलकदमी कर रहा है, जिससे यह कहना कठिन है कि उसकी उपस्थिति कहां है। ऐसे में सभी के सतर्क रहने की जरूरत है।
आदमखोर तो नहीं हो गया तेंदुआ..
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पहली घटना के बाद दो पिंजरे लगवाने के बाद दोनों में बकरी भी बंधवाई, लेकिन तेंदुआ पिंजरे में बंधी बकरियों तक नहीं आया। ग्रामीण को अंदेशा है कि तेंदुआ आदमखोर हो गया है। हालांकि वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा कि यदि तेंदुआ आदमखोर हुआ होता तो बच्चों को खा जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया।
वन विभाग की व्यवस्थाओं से खुश नहीं ग्रामीण
साल भर से गांव के आसपास बाघ और तेंदुए चहलकदमी कर रहे हैं। वन विभाग सिर्फ हिंसक पशु बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया। यह तेंदुआ आदमखोर हो चुका है।
-हरीश कुमार
तेंदुए के हमले में बच्चे की मौत से गांव वाले काफी दहशत है। लोग मजदूरी करने तक नहीं जा रहे। घरों से बच्चों एवं महिलाओं को बाघ के डर के कारण बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। पीड़ित परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। वन जल्द कदम उठाए और तेंदुए को पकड़े।
-छोटेलाल यादव
तेंदुआ पिंजरे के पास आकर वापस चला गया, जबकि उसमें बकरी भी बंधी थी। वह बच्चों पर हमला कर रहा है, इससे अंदेशा है कि वह आदमखोर हो चुका है।
-रामसागर यादव
तेंदुए के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण अकेले गांव से नहीं निकल रहे हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों ने खेत पर जाना बंद कर दिया है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण खौफजदा हैं, जबकि वन विभाग की तेंदुए को पकड़ने की कोई तरकीब कामयाब नहीं हो रही है।
-परमुख यादव
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साहबदीन पुरवा गांव निवासी 13 वर्षीय चंदन अपने पिता को खाना देने गया था। वह खेत में जानवरों के चारे के लिए गन्ने की पत्तियां तोड़ने लगा। इसी बीच खेत में घात लगाकर बैठे तेंदुए ने हमला कर बच्चे को मार डाला था। रविवार देर रात पोस्टमार्टम के बाद जब उसका शव गांव पहुंचा तो ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। वन विभाग की ट्रैक्टर ट्रॉली पर अपना गुस्सा उतारा। वन कर्मचारियों से भी गालीगलौज की। रेंजर अनिल शाह के समझाने पर वे माने। इधर रविवार की रात में तेंदुआ फिर उस स्थान पर आया, जहां उसने चंदन की जान ली थी। इस बात की पुष्टि घटनास्थल पर मिले पगचिह्नों से हुई। वन दरोगा सत्यप्रकाश वर्मा, लतीफ, सतीश मिश्रा, बृजेश शुक्ला ने घटनास्थल पर तीन नाइट विजन कैमरे लगाकर निगरानी शुरू कर दी है। बहराइच जनपद के मोतीपुर रेंज से एक पिंजरा भी मंगवाया गया है जो देर शाम तक लगा दिया गया।
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एक ही तेंदुआ कर रहा बच्चों पर हमला..
चकदहा गांव के चमारनपुरवा निवासी पुतान के 12 वर्षीय पुत्र बृजेश और चंदन को एक ही तेंदुए ने अपना शिकार बनाया है। इस बात का खुलासा तब हुआ जब वन विभाग ने तेंदुए के पगचिह्नों का मिलान किया। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने भी इस बात की पुष्टि की।
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वन विभाग ने कराई मुनादी.. 16 साल तक के बच्चों को न भेजें खेत
पखवाड़े भर में तेंदुए के हमले में दो बच्चों को मौत से क्षेत्र में दहशत है। वन विभाग ने घटनास्थल से 25 किलोमीटर के दायरे के गांवों में मुनादी कराई है कि 16 साल तक के बच्चों को खेतों पर न भेजें।
इस संबंध में ग्राम प्रधानों को एसडीएम और बीडीओ के माध्यम से भी जानकारी दी गई है।
पहुंचे रेंजर, व्यवस्थाओं को परखा
वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह घटनास्थल पर पहुंचे। तेंदुए के पगचिह्नों के हिसाब से वन विभाग की टीम को तैनात किया। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि तेंदुआ 25 किलोमीटर वर्ग परिधि में चहलकदमी कर रहा है, जिससे यह कहना कठिन है कि उसकी उपस्थिति कहां है। ऐसे में सभी के सतर्क रहने की जरूरत है।
आदमखोर तो नहीं हो गया तेंदुआ..
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने पहली घटना के बाद दो पिंजरे लगवाने के बाद दोनों में बकरी भी बंधवाई, लेकिन तेंदुआ पिंजरे में बंधी बकरियों तक नहीं आया। ग्रामीण को अंदेशा है कि तेंदुआ आदमखोर हो गया है। हालांकि वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने इसका खंडन किया है। उन्होंने कहा कि यदि तेंदुआ आदमखोर हुआ होता तो बच्चों को खा जाता, लेकिन ऐसा नहीं किया।
वन विभाग की व्यवस्थाओं से खुश नहीं ग्रामीण
साल भर से गांव के आसपास बाघ और तेंदुए चहलकदमी कर रहे हैं। वन विभाग सिर्फ हिंसक पशु बताकर अपना पल्ला झाड़ लेता है। आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया। यह तेंदुआ आदमखोर हो चुका है।
-हरीश कुमार
तेंदुए के हमले में बच्चे की मौत से गांव वाले काफी दहशत है। लोग मजदूरी करने तक नहीं जा रहे। घरों से बच्चों एवं महिलाओं को बाघ के डर के कारण बाहर नहीं निकलने दिया जा रहा है। पीड़ित परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा। वन जल्द कदम उठाए और तेंदुए को पकड़े।
-छोटेलाल यादव
तेंदुआ पिंजरे के पास आकर वापस चला गया, जबकि उसमें बकरी भी बंधी थी। वह बच्चों पर हमला कर रहा है, इससे अंदेशा है कि वह आदमखोर हो चुका है।
-रामसागर यादव
तेंदुए के हमले के बाद ग्रामीणों में दहशत है। ग्रामीण अकेले गांव से नहीं निकल रहे हैं। खासकर महिलाओं और बच्चों ने खेत पर जाना बंद कर दिया है। लगातार हो रही घटनाओं से ग्रामीण खौफजदा हैं, जबकि वन विभाग की तेंदुए को पकड़ने की कोई तरकीब कामयाब नहीं हो रही है।
-परमुख यादव