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बाघ के डर से खेतों में जाने से कतरा रहे हैं ग्रामीण
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मझगईं। क्षेत्र के बेला गांव के ग्रामीण बाघ के डर से अपने खेतों की ओर जाने से कतरा रहे हैं। इतना ही नहीं किसानों की पर्चियां भी आ गईं हैं, लेकिन बाघ की दहशत के कारण ग्रामीण गन्ने की छिलाई नहीं करा पा रहे हैं। वनकर्मियों ने ग्रामीणों को समूह बनाकर खेतों की ओर जाने की सलाह दी है।
शुक्रवार को बेलाकलां गांव निवासी गुलजार के गन्ने के खेत में बछड़े को मारने वाला बाघ अब तक खेतों में डेरा जमाए है। किसान रियाजुल उस्मानी ने बताया कि बाघ उसके गन्ने के खेत के साथ ही आसपास के खेतों में भी चहल-कदमी करता है। गन्ने की पर्ची आईं हुईं हैं, मगर बाघ के डर से ग्रामीण गन्ना छीलने खेतों की ओर नहीं जा पा रहे हैं। लोगों ने बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग वन विभाग से की है। उधर फॉरेस्ट गार्ड शरद मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार को मारे गए बछड़े का शव बाघ खा गया था, उसकी सिर्फ एक टांग मिली थी जिसे दफना दिया गया। बाघ पशुओं की तलाश में वहीं आसपास मंडरा रहा है। ग्रामीणों को समूह बनाकर जाने को कहा गया है, गश्त भी की जा रही है। संवाद
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शुक्रवार को बेलाकलां गांव निवासी गुलजार के गन्ने के खेत में बछड़े को मारने वाला बाघ अब तक खेतों में डेरा जमाए है। किसान रियाजुल उस्मानी ने बताया कि बाघ उसके गन्ने के खेत के साथ ही आसपास के खेतों में भी चहल-कदमी करता है। गन्ने की पर्ची आईं हुईं हैं, मगर बाघ के डर से ग्रामीण गन्ना छीलने खेतों की ओर नहीं जा पा रहे हैं। लोगों ने बाघ के आतंक से निजात दिलाने की मांग वन विभाग से की है। उधर फॉरेस्ट गार्ड शरद मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार को मारे गए बछड़े का शव बाघ खा गया था, उसकी सिर्फ एक टांग मिली थी जिसे दफना दिया गया। बाघ पशुओं की तलाश में वहीं आसपास मंडरा रहा है। ग्रामीणों को समूह बनाकर जाने को कहा गया है, गश्त भी की जा रही है। संवाद
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