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फिर नगरिया लौटी ग्रेलेग गूस
बांकेगंज
Updated Sat, 26 Dec 2015 07:29 PM IST
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मैलानी रेंज की महुरेना बीट जंगल से सटी नगरिया झील में इन दिनों मेहमान पक्षियों की रंग-बिरंगी दुनिया आबाद है। सर्दियों की दस्तक के साथ ही ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की लंबी उड़ान भरकर आए मेहमान पक्षियों को नगरिया तालाब की आबोहवा खूब लुभा रही है। इस बार कुछ ऐसे प्रवासी पक्षी यहां आए हैं जो पिछले दो सालों से नहीं आए थे। दो सालों बाद आई ग्रेलेग गूस झील के नीले पानी में कलरव करते हुए लोगों का मन मोह रही है।
सर्दियों की आहट के साथ ही ठंडे देशों से आए प्रवासी पक्षियों ने जंगल से सटे नगरा ताल जिसे धनुषाकार होने के कारण धनुहा ताल भी कहते है को अपना बसेरा बना लिया है। पिछले कुछ वर्ष में बदलती आबोहवा और प्राकृतिक आवास बिगड़ने के कारण कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने धनुहा तालाब की तरफ रुख नहीं किया था। इस बार यह बड़ी संख्या में नगरा तालाब आए है। डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि इसमें विशेष रूप से पिछले दो सालों से नगरा तालाब में प्रवासी पक्षी ग्रेलेग गूस नहीं आई थी, जो इस बार बहुत बड़ी संख्या में यहां पहुंची है। इस साल ग्रेलेग गूस के नगरिया तालाब में आने से पक्षी विशेषज्ञ और स्थानीय पक्षी प्रेमी इस बात से बहुत खुश है। और बह इसके अध्ययन में जुटे हुए हैं।
डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि इस साल नगरिया झील में पिछले सालों की अपेक्षा बड़ी संख्या में ठंडे देशों से प्रवासी पक्षी आए हैं। वनकर्मियों की टीम पूरी तैयारी के साथ दक्षिण खीरी वन प्रभाग के जलाशयों में आए विदेशी मेहमानों की बराबर निगरानी कर रही है।
इनका होता है आगमन
नगरिया तालाब में मुख्य रूप से यूूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन, लद्दाख से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट विल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रेलेग गूस, बार हेडड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राम्हनी डक, कूट, मूर हेन, अबलक ,कुर्चिया बत्तख समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में हर साल यहां आते है।
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सर्दियों की आहट के साथ ही ठंडे देशों से आए प्रवासी पक्षियों ने जंगल से सटे नगरा ताल जिसे धनुषाकार होने के कारण धनुहा ताल भी कहते है को अपना बसेरा बना लिया है। पिछले कुछ वर्ष में बदलती आबोहवा और प्राकृतिक आवास बिगड़ने के कारण कई प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने धनुहा तालाब की तरफ रुख नहीं किया था। इस बार यह बड़ी संख्या में नगरा तालाब आए है। डीएफओ साउथ नीरज कुमार ने बताया कि इसमें विशेष रूप से पिछले दो सालों से नगरा तालाब में प्रवासी पक्षी ग्रेलेग गूस नहीं आई थी, जो इस बार बहुत बड़ी संख्या में यहां पहुंची है। इस साल ग्रेलेग गूस के नगरिया तालाब में आने से पक्षी विशेषज्ञ और स्थानीय पक्षी प्रेमी इस बात से बहुत खुश है। और बह इसके अध्ययन में जुटे हुए हैं।
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डीएफओ साउथ खीरी नीरज कुमार ने बताया कि इस साल नगरिया झील में पिछले सालों की अपेक्षा बड़ी संख्या में ठंडे देशों से प्रवासी पक्षी आए हैं। वनकर्मियों की टीम पूरी तैयारी के साथ दक्षिण खीरी वन प्रभाग के जलाशयों में आए विदेशी मेहमानों की बराबर निगरानी कर रही है।
इनका होता है आगमन
नगरिया तालाब में मुख्य रूप से यूूरोप, मध्य एशिया, पूर्वी साइबेरिया, चीन, लद्दाख से खूबसूरत पक्षी आते हैं। इसमें स्पॉट विल्ड डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, ग्रेलेग गूस, बार हेडड गूस, टस्टेड डक, कामन टील, पिन टील, ब्राम्हनी डक, कूट, मूर हेन, अबलक ,कुर्चिया बत्तख समेत कई प्रजातियों के पक्षी हजारों की संख्या में हर साल यहां आते है।
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