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प्राचीन भद्र कुंड पर अतिक्रमण हटाने गई टीमे खाली हाथ वापस
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गोला में भद्र कुंड खाली कराने के लिए लाई गई जेसीबी।
- फोटो : LAKHIMPUR
गोला गोकर्णनाथ। छोटी काशी के प्राचीन भद्र कुंड पर वर्षों से अवैध कब्जेदार काबिज होते जा रहे हैं। प्रशासन भद्रकुंड खाली कराने के लिए कई बार कोशिश कर चुका है, लेकिन खाली होना तो दूर नए मकानों का निर्माण होता जा रहा है। शुक्रवार को तहसील और नगर पालिका की टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची और कुछ प्लाटों की भरी हुई नींव को ढहाकर अपनी पीठ थपथपा ली।
छोटी काशी में प्राचीन भद्र कुंड पद्म पुराण में तीर्थ के रूप में वर्णित है पर बंदोबस्त अभियान में भू माफिया ने भद्र तीर्थ का नाम हटाकर तालाब के रूप में अंकित करवा दिया। इसके बाद भू माफिया ने भद्र कुंड की पटाई शुरू करवा दी। धीरे धीरे जब मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो तहसील प्रशासन सक्रिय हुआ और तत्कालीन एसडीएम शंभु कुमार ने तालाब का चिह्नीकरण कराया। उनके बाद आए एसडीएम योगानंद पांडे ने पैमाइश करवाकर तालाब का सीमांकन कराकर चारों ओर गहरी खाईं बनवा दी, किंतु उनके स्थानांतरण के बाद भू माफिया ने वह खाई पटवा दी और फिर प्लाटों की बिक्री शुरू हो गई।
शुक्रवार को नायब तहसीलदार अमित पांडे और नगर पालिका के ईओ पीएन दीक्षित के नेतृत्व में टीम जेसीबी और दो लोडर के साथ पहुंची। इस दौरान दो मकानों की नींव ढहाने के बाद काम बंद हो गया। इसके बाद दोनों टीमें जेसीबी और लोडर साथ लौट आईं।
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बिना नक्शा पास बन गए मकान
भद्रकुंड में बिना नगर पालिका से नक्शा पास कराए काफी मकान बन गए हैं। नगर पालिका परिषद ने किसी को नोटिस तक जारी नहीं किया है। यही नहीं भद्र कुंड की सीमा में नगर पालिका परिषद ने सड़क तक बना दी है।
गरीबों को ही बेचते हैं प्लाट
भू माफिया भद्र कुंड की सीमा में प्लाट काटकर उन गरीबों को ही बेच देते हैं जो जमीनों के बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते। उनसे धन वसूलकर रसीद काटकर दे देते हैं।
चार अस्थायी कब्जेदारों के कब्जे हटाकर पुन: निर्माण न करने की चेतावनी दी गई है। बने हुए मकानों के मालिकों के विरुद्ध मुकदमा चल रहा है।
-अमित पांडे, नायब तहसीलदार गोला गोकर्णनाथ
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छोटी काशी में प्राचीन भद्र कुंड पद्म पुराण में तीर्थ के रूप में वर्णित है पर बंदोबस्त अभियान में भू माफिया ने भद्र तीर्थ का नाम हटाकर तालाब के रूप में अंकित करवा दिया। इसके बाद भू माफिया ने भद्र कुंड की पटाई शुरू करवा दी। धीरे धीरे जब मामला अखबारों की सुर्खियां बना तो तहसील प्रशासन सक्रिय हुआ और तत्कालीन एसडीएम शंभु कुमार ने तालाब का चिह्नीकरण कराया। उनके बाद आए एसडीएम योगानंद पांडे ने पैमाइश करवाकर तालाब का सीमांकन कराकर चारों ओर गहरी खाईं बनवा दी, किंतु उनके स्थानांतरण के बाद भू माफिया ने वह खाई पटवा दी और फिर प्लाटों की बिक्री शुरू हो गई।
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शुक्रवार को नायब तहसीलदार अमित पांडे और नगर पालिका के ईओ पीएन दीक्षित के नेतृत्व में टीम जेसीबी और दो लोडर के साथ पहुंची। इस दौरान दो मकानों की नींव ढहाने के बाद काम बंद हो गया। इसके बाद दोनों टीमें जेसीबी और लोडर साथ लौट आईं।
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बिना नक्शा पास बन गए मकान
भद्रकुंड में बिना नगर पालिका से नक्शा पास कराए काफी मकान बन गए हैं। नगर पालिका परिषद ने किसी को नोटिस तक जारी नहीं किया है। यही नहीं भद्र कुंड की सीमा में नगर पालिका परिषद ने सड़क तक बना दी है।
गरीबों को ही बेचते हैं प्लाट
भू माफिया भद्र कुंड की सीमा में प्लाट काटकर उन गरीबों को ही बेच देते हैं जो जमीनों के बारे में अधिक जानकारी नहीं रखते। उनसे धन वसूलकर रसीद काटकर दे देते हैं।
चार अस्थायी कब्जेदारों के कब्जे हटाकर पुन: निर्माण न करने की चेतावनी दी गई है। बने हुए मकानों के मालिकों के विरुद्ध मुकदमा चल रहा है।
-अमित पांडे, नायब तहसीलदार गोला गोकर्णनाथ