फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The last person to be hanged during British rule was a youth from Kheri

Lakhimpur Kheri News: ब्रितानी हुकूमत में अंतिम फांसी खीरी के युवा को दी गई थी

Thu, 14 Aug 2025 10:48 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 14 Aug 2025 10:48 PM IST
विज्ञापन
The last person to be hanged during British rule was a youth from Kheri
सगे भतीजे नागेश्वर प्रसाद मिश्रा -संवाद
भीखमपुर। स्वतंत्रता संग्राम में हजारों नौजवानों ने देश के लिए कुर्बानियां दीं, लेकिन स्वतंत्रता संग्राम में अंतिम फांसी खीरी जिले के भीखमपुर कस्बे के 24 वर्षीय युवा को हुई। 1857 की क्रांति का मंगल पांडे जैसे वीर ने स्वतंत्रता के लिए बिगुल फूंकने का काम किया तो भीखमपुर के अमर शहीद राजनारायण मिश्र ने हंसते-हंसते ब्रिटिश हुकूमत की अंतिम फांसी को गले लगाया।
विज्ञापन

भीखमपुर कस्बे के राजनारायण मिश्र का जन्म 1920 को बसंत पंचमी के दिन हुआ था। वह युवावस्था से ही क्रांतिकारी बन गए थे। वह सशस्त्र क्रांति के लिए साथियों के साथ मिलकर शस्त्र इकट्ठा करने लगे। इसके लिए वह पास पड़ोस के गांव मढिया, मोहम्मदाबाद के गांवों में साथियों के साथ भी गए।
विज्ञापन

इसी सिलसिले में 14 अगस्त 1943 को महमूदाबाद स्टेट के कोठार भीखमपुर में जिलेदार से बंदूक मांगने साथी सेनानी भगवानदास और कैलाशनाथ बाजपेई के साथ गए थे। जिलेदार ने बंदूक देने से मना किया, साथ ही उन पर ही बंदूक तान दी। उसे हमलावर होते देख राजनारायण मिश्र बंदूक से गोली मारकर साथियों सहित भाग गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस घटना के बाद अंग्रेजों ने उनके घर और पूरे गांव में कहर बरपाते हुए कई लोगों को प्रताड़ित किया। उनके घर को गिरा दिया। जो मिला उसको बैलों की तरह हल से बंधवाकर नमक की बोआई करा दी थी। करीब 20 लोगों को जेल भेजा गया।

उनके सगे बड़े भाई सेनानी बाबूराम मिश्र जटायु को 38 वर्ष की तन्हाई की सजा सुनाई गई। राजनारायण की गिरफ्तारी के लिए 500 रुपये का इनाम रखा गया। फरार होकर राजनारायण आजादी की क्रांति का प्रचार करते रहे। अंत में अक्तूबर 1943 को मेरठ से राजनारायण को गिरफ्तार कर लिया गया। लखीमपुर में मुकदमा चला। 27 जून 1944 को उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई। फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से फांसी के दिन तक शहादत के जोश में राजनारायण का वजन छह पौंड तक बढ़ गया था।
9 दिसंबर 1944 की सुबह 4 बजे लखनऊ जेल में उनको फांसी पर लटका दिया गया। वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए 24 वर्षीय खीरी का लाल हंसते-हंसते फांसी पर झूल गया। राजनारायण को ब्रितानी हुकूमत की अंतिम फांसी थी। आज उनके पैतृक गांव में उनकी मूर्ति लगी है। उनके सगे भतीजे नागेश्वर प्रसाद रहते हैं, जबकि शहीद का परिवार कहीं गोरखपुर में प्राइवेट नौकरी के लिए संघर्ष कर रहा है।


शहीद के गांव में उनके नाम से विद्यालय जीर्ण शीर्ण अवस्था पड़ा है। शासन प्रशासन से कोई ऐसा विशेष कार्य नहीं हुआ। जिस पर शहीद के परिजन और ग्रामीण गर्व करें।

सगे भतीजे नागेश्वर प्रसाद मिश्रा -संवाद

सगे भतीजे नागेश्वर प्रसाद मिश्रा -संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed