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क्रय केंद्रों पर धान खरीद के मुकाबले सीएमआर की डिलीवरी बेहद धीमी

Wed, 10 Nov 2021 11:58 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:58 PM IST
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The delivery of CMR is very slow as compared to the purchase of paddy at the purchasing centers
पलिया में धान के बोरों को देखते डीएम और अन्य अधिकारी।
अब तक 25 हजार मीट्रिक टन धान खरीद की तुलना में 202 मीट्रिक टन सीएमआर की हुई डिलीवरी
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लखीमपुर खीरी। सरकारी धान खरीद के सापेक्ष सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की डिलीवरी बेहद धीमी है, जिससे अधिकारियों को अंदरखाने चावल के फंसने की चिंता सताने लगी है। करीब 25970 मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है, लेकिन एफसीआई डिपो में सीएमआर सिर्फ 202 मीट्रिक टन ही डिलीवर किया गया है, जबकि धान खरीद शुरू हुए एक माह दस दिन हो चुके हैं।
धान खरीद प्रारंभ होने से पहले राइस मिलर्स हड़ताल कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने धान से चावल की रिकवरी कम होने, चावल में ब्रोकेन अधिक होने, लागत से कुटाई का कम पैसा मिलने आदि समस्याओं के निराकरण की मांग की थी। साथ ही सरकारी धान की कुटाई करने से भी मना कर दिया था। हालांकि एक अक्तूबर से सरकारी धान खरीद शुरू होने के बाद राइस मिलों का क्रय केंद्रों से संबद्घीकरण किया गया, लेकिन राइस मिलर्स की समस्याएं जस की तस हैं। शासन-प्रशासन के आश्वासन पर राइस मिलर्स ने सरकारी धान की कुटाई प्रारंभ कर दी है, लेकिन कुछ क्रय एजेंसियों द्वारा राइस मिलों में धान भेजने की गति धीमी है तो कुछ ने अब तक राइस मिलों में धान ही नहीं भेजा है। इसमें यूपीएसएस, मंडी परिषद व एफसीआई प्रमुख हैं। वहीं दो क्रय एजेंसियों मार्केटिंग, पीसीएफ और पीसीयू ने राइस मिलों को धान भेजा है, लेकिन सीएमआर की डिलीवरी मार्केटिंग व पीसीएफ ने कराई है। मार्केटिंग ने 144 मीट्रिक टन और पीसीएफ ने 58 मीट्रिक टन सीएमआर की डिलीवरी एफसीआई डिपो में कराई है।
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धान की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों और राइस मिलर्स में गतिरोध
इस वर्ष अक्तूबर में हुई बेमौसम बारिश से आई बाढ़ के कारण खेतों में पानी भर जाने से कहीं-कहीं धान काला पड़ चुका है। काले पड़ चुके धान से चावल की रिकवरी कम होने के साथ ही टूटन की मात्रा बढ़ गई है। सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों के दबाव के चलते कई एजेंसियों ने मानकविहीन धान भी खरीद लिया है, जिसकी कुटाई करने में राइस मिलर्स असहज की स्थिति में हैं। क्योंकि उन्हें सीएमआर की डिलीवरी के दौरान एफसीआई के कड़े मानकों का सामना करना पड़ेगा, जहां पर खराब गुणवत्ता के चावल को अक्सर रिजेक्ट करके लौटा दिया जाता है। ऐसी स्थिति में सीएमआर के फंसने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
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सीएमआर की डिलीवरी में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित क्रय एजेंसियों व राइस मिलों को निर्देश दिए गए हैं। क्रय केंद्रों से राइस मिलों के संबद्घीकरण में देरी होने से सीएमआर की डिलीवरी अपेक्षित गति से धीमी हुई है। कुछ क्रय केंद्रों पर हैंडलिंग ठेकेदारों की नियुक्ति देर से होने के कारण ऐसी स्थिति बनी है।
- लालमणि पांडेय, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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