फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   The challenge of saving its stronghold in front of the BJP trapped in the caste cycle

जातीय चक्रव्यूह में फंसी भाजपा के सामने अपना गढ़ बचाने की चुनौती

Sun, 20 Feb 2022 12:01 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 20 Feb 2022 12:01 AM IST
विज्ञापन
The challenge of saving its stronghold in front of the BJP trapped in the caste cycle
दाऊद अहमद। - फोटो : LAKHIMPUR
हरिश्चंद्र सिंह
विज्ञापन

मोहम्मदी। भाजपा की गढ़ कहे जाने वाली मोहम्मदी विधानसभा सीट पर इस बार भाजपा सपा और बसपा के चक्रव्यूह में फंस गई है। पं. दीनदयाल उपाध्याय की कर्मस्थली रहे मुस्लिम बहुल इस क्षेत्र में अब तक हुए 17 विधानसभा चुनावों में पांच बार जनसंघ, पांच बार भाजपा के उम्मीदवार जीते हैं। पांच बार कांग्रेस के विधायक रहे हैं। जबकि सपा और बसपा को सिर्फ एक एक बार मौका मिल सका है। मुस्लिम बाहुल्य होने के बावजूद इस सीट पर अभी तक कोई मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब नहीं हो पाया है जबकि सपा और बसपा दोनों ने यहां मुस्लिम उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे हैं। इससे मुस्लिम वोटों में बंटवारा तय हो गया है।
महाभारत काल में मोहम्मदी क्षेत्र राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था। क्षेत्र के बलमियां बरखर में पांडवों के अज्ञातवास बिताने के अनेक प्रमाण आज भी यहां मौजूद हैं। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम तक मोहम्मदी ही जिला मुख्यालय था। 1858 में मोहम्मदी का यह रुतबा छिन गया। आजादी के बाद से ही मोहम्मदी के लोग इस खोए रुतबे को लौटाने की मांग करते आ रहे हैं। मोहम्मदी में खिलने वाला केतकी का फूल भी यहां की बड़ी विशेषता है जो मोहम्मदी के अलावा दूसरी जगह नहीं खिलता है। जिले का यह ऐतिहासिक क्षेत्र विकास के मामले में आज भी काफी पिछड़ा है। मतदताओं का कहना है कि जनप्रतिनिधियों ने हमेशा मोहम्मदी को छला है।
विज्ञापन

वर्ष 1952 में हुए पहले विधानसभा चुनाव में मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र मोहम्मदी ईस्ट के नाम से जानी जाती थी। इसके बाद 1957 से यह सीट केवल मोहम्मदी के नाम से जानी गई। इसे सुरक्षित सीट का दर्जा दिया गया। वर्ष 2008 के परिसीमन में यह सीट सुरक्षित से सामान्य हो गई। आजादी के बाद से अब तक इस सीट पर पांच बार कांग्रेस, चार बार जनसंघ, चार बार भारतीय जनता पार्टी, एक बार जनता पार्टी, एक बार सपा और एक बार बसपा उम्मीदवार जीत कर विधायक बने हैं। 1952 के पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस कमाल अहमद रिजवी चुनाव जीते।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसके बाद लगातार तीन बार जनसंघ से मन्ना लाल चुनाव जीते। 1969 में कांग्रेस के सेवाराम विधायक बने। इसके बाद फिर मन्ना लाल एक बार जनसंघ से और एक बार जनता पार्टी से चुनाव जीते। 1980 और 1985 में कांग्रेस से बंशीधर राज विधायक बने। 1989 में भाजपा के छोटे लाल चुनाव जीते। 1991 में फिर कांग्रेस के बंशीधर राज विधायक बने। 1993 में भाजपा के जगन्नाथ प्रसाद चुनाव जीते।
1996 में भाजपा की कृष्णा राज, 2002 में सपा के बंशीधर राज, 2007 में भाजपा की कृष्णा राज, 2012 में बसपा के बाला प्रसाद अवस्थी और 2017 में भाजपा के लोकेंद्र प्रताप सिंह चुनाव जीते। 1957 के चुनाव से लेकर 2007 के चुनाव तक यह सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित रही। 2008 में हुए नए परिसीमन के बाद मोहम्मदी सीट सामान्य कर दी गई।
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र आज भी तरक्की को तरस रहा है। क्षेत्र की जर्जर सड़कें, बदहाल परिवहन सेवाएं, बदहाल अच्छे शिक्षा संस्थानों की कमी, बालिकाओं के लिए अलग से शिक्षण संस्थानों की कमी है। स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। मोहम्मदी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरवर मे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और पसगवां में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पूरे विधानसभा क्षेत्र के इलाज का दारोमदार है। पूरे क्षेत्र में न कोई हृदय रोग विशेषज्ञ और न ही कोई न्यूरोलॉजिस्ट। न्यूरोलॉजिस्ट की बात दूर फिजिशियन भी ढंग का नहीं है। इलाज के लिए लोगों को लखनऊ और बरेली के लिए दौड़ना पड़ता है। अच्छी पढ़ाई के लिए भी युवाओं को बाहर जाने के अलावा कोई चारा नहीं है। (संवाद)
मुद्दों पर मुखर हैं मतदाता
जब मतदताओं का मन टटोलने की कोशिश की गई तो सब्जी मंडी में मिले रिटायर्ड संग्रह अमीन राजेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सरकार ने पांच साल में खूब काम किए महंगाई को लेकर कुछ परेशानी हुई फिर भी लोग सरकार से संतुष्ट हैं। कस्बे के एक इंटर कालेज के पास मिले मनोज शुक्ला का कहना है कि प्रदेश सरकार ने अपराधियों पर लगाम कसने का काम किया है, अपराधी जेलों में है, कानून व्यवस्था ठीक है रात दिन में कहीं घूमे कोई डर नहीं है।
मगरेना के रफायत खां से कहचरी के पास मिले भाजपा कहती कुछ और है लेकिन देती सबको बराबर है। मुस्लिमो का कोई नुक़सान भाजपा मे नहीं हुआ भाजपा में अपने को सुरक्षित मान रहा है। केहुआ के छात्र रवि सिंह कहते हैं कि छात्रों को के लिए विशेष व्यवस्था की जाए परिवाहन बसों पर छात्रों के लिए आने जाने की व्यवस्था मुफ्त होनी चाहिए। खजुहा के किसान अमित वर्मा आवारा पशुओं की समस्या से किसान परेशान है। महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी है।
यह महारथी है मोहम्मदी के चुनावी रण में
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने मौजूदा विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह को ही अपना उम्मीदवार बनाया है। वह भाजपा के पुराने कार्यकर्ता हैं और भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने हाल ही में बसपा में छोड़कर सपा में आए दाउद अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया है। दाउद अहमद बसपा के टिकट पर एक बार शाहाबाद संसदीय क्षेत्र से सांसद और एक बार पिहानी क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। वहीं बसपा ने शाहाबाद संसदीय क्षेत्र से एक बार सांसद रहे इलियास आजमी के पुत्र शकील सिद्दीकी को अपना उम्मीदवार बनाया है। जबकि कांग्रेस ने पसगवां कांड की पीड़िता रितु सिंह को टिकट दिया है।

वर्ष 2017 का चुनाव परिणाम
लोकेंद्र प्रताप सिंह..भाजपा..........93000 वोट
संजय शर्मा...........कांग्रेस...........59082 वोट
दाउद अहमद.........बसपा............57902 वोट
क्षेत्र में मतदाता
कुल वोटर.................338565
पुरुष मतदाता...........181249
महिला मतदाता.......157302
अन्य मतदाता.................14
मुस्लिम वोट निर्णायक
मुस्लिम बहुल क्षेत्र होने के कारण यहां मुस्लिम वोट निर्णायक रहे हैं। बावजूद इसके यहां जनसंघ और भाजपा का दबदबा रहा है। जब जब मुस्लिम वोट एकजुट हुए तभी भाजपा का नुकसान हुआ है। इस बार मुस्लिम वोटों का रुझान सपा की तरफ है लेकिन दो सशक्त मुस्लिम उम्मीदवार होने के कारण मुस्लिम वोटों के बटवारे की संभावनाएं दिख रहीं हैं। फिलहाल तो यहां भाजपा और सपा में सीधी टक्कर नजर आ रही है लेकिन मुस्लिम वोटों के बंटवारे से समीकरण बदल सकते हैं। बसपा मुस्लिम वोट बैंक में जितनी गहरी सेंधमारी करेगी उतना ही भाजपा को फायदा होगा। सपा इस सेंधमारी को रोकने और दलित वोटों में सेंध लगाने की कोशिश में है।
जातीय गणित
ब्राह्मण.................. 38000
ठाकुर....................33000
मुस्लिम............... 90000
यादव................... 16000
दलित....................66000
पिछड़ी जातियां .....56000
कायस्थ..................8000
वैश्य.....................22000
अन्य.....................8500
प्रमुख मुद्दे........
मोहम्मदी में तकनीकी और मेडिकल शिक्षण संस्थान
-महिलाओं के उच्च शिक्षा के लिए शिक्षण संस्थान
-मोहम्मदी को रेलवे लाइन से जोड़ा जाना
-क्षेत्र का औद्योगिक विकास और कुटीर उधोग धंधों का विकास
-युवाओं के खेल स्टेडियम का निर्माण
-क्षेत्र की जर्जर सड़कें
-सिंचाई सुविधाओं का अभाव

शकील सिद्दीकी

शकील सिद्दीकी- फोटो : LAKHIMPUR

रितू सिंह

रितू सिंह- फोटो : LAKHIMPUR

लोकेंद्र प्रताप सिंह

लोकेंद्र प्रताप सिंह- फोटो : LAKHIMPUR

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed