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Lakhimpur Kheri News: स्कूल की रसोई निगली, जमीन काटी... अब रास्तों पर शारदा का प्रहार

Wed, 22 Jul 2026 11:45 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 22 Jul 2026 11:45 PM IST
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Swallowed the school kitchen, cut the land... now Sharda attacks the roads
नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद
लखीमपुर खीरी। शारदा नदी कहीं जमीन निगल रही है तो कहीं उसका पानी रास्तों पर मुश्किलें बढ़ा रहा है। निघासन के ग्रंट नंबर-12 में मंगलवार रात कटान की जद में आकर संविलियन स्कूल की रसोई नदी में समा गई और गांव को जोड़ने वाली मुख्य डामर सड़क भी कट गई।
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बिजुआ के करसौर, गुजारा और सिंघिया फार्म समेत कई इलाकों में पानी पहुंचने के साथ कृषि भूमि का कटान हो रहा है। वहीं, पलिया में शारदा खतरे के निशान से नीचे आ गई है, लेकिन कई रास्तों और खेतों में जलभराव बरकरार है। दौलतापुर में स्कूल का रास्ता भी पानी में डूबा है, जहां मगरमच्छों की मौजूदगी के ग्रामीणों के दावे ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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ग्रंट नंबर-12 में शारदा का कटान तेज हो गया है। मंगलवार रात संविलियन स्कूल की रसोई कटान की जद में आकर नदी में समा गई। गांव को जोड़ने वाली मुख्य डामर सड़क भी कट गई है। ग्रामीणों का कहना है कि जल्द कटानरोधी कार्य नहीं हुआ तो बची सड़क भी नदी में समा सकती है। इससे आसपास के क्षेत्रों से संपर्क और राहत एवं बचाव कार्य प्रभावित होने की आशंका है।
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ग्रामीणों के मुताबिक, तीन वर्षों से शारदा गांव का भूभाग निगल रही है। बड़ी संख्या में परिवार घर छोड़कर तटबंध और अन्य सुरक्षित स्थानों पर झोंपड़ियां डालकर रहने े लिए मजबूर हैं। ग्रंट नंबर-12 ग्राम पंचायत में रंडौहा, मंझरी, हड़हीपुरवा आदि चार गांव शामिल हैं। पंचायत की आबादी करीब 2,800 है, जबकि अकेले ग्रंट नंबर-12 की आबादी लगभग 800 है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, गांव में कभी करीब साढ़े तीन से चार सौ मकान थे, जिनमें अब लगभग 150 ही बचे हैं।
एसडीएम यदुवीर सिंह ने बताया कि विस्थापितों के पुनर्वास के लिए लुधौरी और बैलहा गांव में भूमि उपलब्ध है, लेकिन ग्रामीण अपने गांव के आसपास श्रीनगर क्षेत्र में बसाए जाने की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर जिला प्रशासन को भेजा जाएगा।
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बिजुआ में गांवों तक पहुंचा पानी
बिजुआ। शारदा का जलस्तर बढ़ने से करसौर, गुजारा और सिंघिया फार्म समेत कई गांवों के निचले इलाकों और खेतों में पानी पहुंच गया है। तीन दिनों से पानी बहने से रास्ते जलमग्न हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, इससे बच्चों को स्कूल जाने और मवेशियों को चराने में परेशानी हो रही है। कृषि भूमि का भी कटान शुरू हो गया है, जिससे लोगों में दहशत है। स्थिति का जायजा लेने बुधवार को सिंघिया गांव में नायब तहसीलदार आलोक मिश्रा, राजस्व निरीक्षक बाबूराम चौधरी, लेखपाल राकेश कुमार शुक्ल और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि गुरजीत सिंह पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का मुआयना किया। टीम के मुताबिक, कृषि भूमि में कटान हो रहा है, लेकिन अभी आबादी प्रभावित नहीं है। लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है। रामऔतार समेत अन्य किसानों ने तटबंधों की मरम्मत, अस्थायी बचाव कार्य कराने और प्रभावितों को मुआवजा देने की मांग की है। संवाद
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खतरे के निशान से नीचे शारदा, जलभराव से राहत नहीं
पलियाकलां। बनबसा बैराज से पानी छोड़े जाने का स्तर कम होने के बाद शारदा खतरे के निशान से नीचे आ गई है, लेकिन जलभराव से अभी राहत नहीं मिली है। निर्धारित 154.590 मीटर की खतरे की सीमा के मुकाबले नदी का जलस्तर 154.530 मीटर दर्ज किया गया। मेला घाट रोड पर कब्रिस्तान के पास और कर्बला के निकट खैराना मार्ग के रपटा पुल पर पानी अब भी बह रहा है। मझौरा से इमलिया जाने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद है। इससे इमलिया फॉर्म, जंगल नंबर-7, छंगा टांडा, जमुनहा, ग्राम सूरजपुर, देशराज टांडा, ढकिया, बजेड़ा, कुंवरपुर और रेती पुरवा के लोगों का संपर्क कटा हुआ है। बाढ़ और बरसात के पानी से किसानों को भी नुकसान हो रहा है। बोझवा ग्राम पंचायत के मटहिया में रेलवे लाइन के किनारे बाढ़ का पानी भरा है। बरुआ कला, छोटा बरुआ और दौलतापुर में धान और गन्ने की लहलहाती फसलें पानी में डूबी हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। संवाद
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दौलतापुर में स्कूल के रास्ते पर पानी, मगरमच्छों का डर

भीरा। विकासखंड बिजुआ के दौलतापुर में प्राथमिक विद्यालय के आसपास जलभराव है और स्कूल तक जाने वाला पूरा रास्ता पानी में डूब गया है। बच्चों को पानी से होकर स्कूल आना-जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल के पास एक तालाब है और रेलवे लाइन के पार बह रही शारदा इन दिनों उफान पर है। उनका कहना है कि नदी से मगरमच्छ निकलकर तालाबों और खेतों में आ जाते हैं। कई बार मगरमच्छों को स्कूल के आसपास भी देखा गया है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

ग्रामीण महेश, राजू, लछमन और डालचंद ने प्रशासन से स्कूल मार्ग से पानी की निकासी कराने और मगरमच्छों से बचाव के उचित कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि स्थायी समाधान होने तक बच्चों की जान को खतरा बना रहेगा। स्थानीय लोगों ने सिंचाई और वन विभाग से तालाबों व आसपास के क्षेत्रों में गश्त बढ़ाने की भी अपील की है। ग्राम प्रशासक प्रतिनिधि शकील अहमद ने बताया कि वन क्षेत्राधिकारी भीरा को मामले की सूचना दी गई है, लेकिन वन विभाग की ओर से अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

नाव से खेतिहर इलाके में आवागमन करते बोझवा मटहिया के लोग। संवाद

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