लखीमपुर खीरी में उफान पर नदियां: शारदा में समाए छह घर, अहिराना गांव के वजूद पर खतरा; घाघरा भी कर रही कटान
लखीमपुर खीरी जनपद में शारदा और घाघरा किनारे बसी आबादी हर साल बाढ़ कटान का दंश झेलने को मजबूर है। इस साल नदियों ने फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। लगातार हो रही बारिश के कारण नदियां उफान पर बह रही है, जिससे तेजी से कटान हो रहा है।
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लखीमपुर खीरी की सदर और निघासन तहसील से जुड़े अहिराना मंझरी गांव में शारदा नदी ने फिर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बृहस्पतिवार को गांव के शिव प्रकाश का पक्का मकान नदी में समा गया। ये एक घर की कहानी नहीं है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के ठोस प्रयास भी नहीं किए गए। पानी अधिक होने का हवाला देकर जिम्मेदार पहले ही हाथ खड़े कर देते हैं। इससे हर साल दर्जनों लोग विस्थापित हो रहे हैं।
बीते तीन दिनों में नदी ने शिव प्रकाश, कमलेश, मुजफ्फिर, राम बचन, शारदा देवी और संकरा देवी के घरों को निगल लिया। नदी का रौद्र रूप अभी थमता नहीं दिख रहा है। गांव के अन्य 60 घरों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इससे गांव के वजूद पर खतरा मंडरा रहा है।
पिछले साल नदी में समाए थे 35 घर
पिछले साल तीन दर्जन घर नदी में समा गए थे। तहसील प्रशासन ने पीड़ितों को श्रीनगर गांव के पास खाली पड़ी सरकारी जमीन पर बसाया था। ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ कटान रोकने के ठोस उपाय नही किए जा रहे हैं। बाढ़ के समय राहत सामग्री बांट कर मरहम लगाने की कोशिश होती है। कटान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाता।
राजस्व विभाग के मुताबिक कटान पीड़ितों को दूसरी जगह बसने के लिए प्रति परिवार को 100 वर्ग मीटर भूभाग का आवंटन किया जाता है। एसडीएम सदर श्रद्धा सिंह ने बताया कि नदी कटान कर रही है। मौका मुआयना किया गया है। कटान का कोई मुआवजा नहीं बनता। 22 परिवारों को रहने के लिए श्रीनगर में भूमि आवंटित की गई है।
खेती की जमीन घाघरा नदी में समाई
पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश से धौरहरा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने लगा है। कई ग्रामीणों की खेती की जमीन नदी में समा गई है। घाघरा नदी का जलस्तर बढ़ने से कई गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। गांवों को खतरे में देखते हुए अब सिंचाई विभाग अलर्ट मोड पर आया है।