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Lakhimpur Kheri News: रुरासुल्तानपुर में गांव की ओर बढ़ रही शारदा
Sat, 05 Sep 2026 11:24 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Sat, 05 Sep 2026 11:24 PM IST
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रुरासुल्तानपुर में अपनी गन्ने की फसल शारदा में कटती देखता किसान। स्रोत: ग्रामीण
बिजुआ। शारदा नदी का रौद्र रूप रुरासुल्तानपुर के किसानों के लिए खेतों की तबाही के साथ गांव के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन गया है। तेज धार से हो रही कटान में खेत लगातार नदी में समाते जा रहे हैं।
नदी अब आबादी से महज 70 से 80 मीटर दूर रह गई है। इससे ग्रामीणों की रातें डर के साये में गुजर रही हैं। सबसे मार्मिक तस्वीर गांव के एक किसान की है। जिस खेत में कुछ दिन पहले तक लहलहाती गन्ने की फसल देखकर उसके चेहरे पर उम्मीद थी, उसी खेत के किनारे बैठकर अब वह आंखों के सामने बर्बादी देख रहा है।
गन्ने की फसल धीरे-धीरे शारदा की तेज धारा में समाती जा रही है। किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। वह नदी की ओर टकटकी लगाए अपनी मेहनत को डूबता देख रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, नदी अब खेतों की मेड़ नहीं, गांव की तरफ बढ़ रही है। पिछले कई दिनों से कटान जारी है। जिस तेजी से नदी जमीन काट रही है, उससे ग्रामीणों को डर है कि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो खेतों के बाद घरों की बारी आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ग्राम प्रशासक प्रतिनिधि जगजीत सिंह के फार्म हाउस से नदी महज 50 मीटर दूर रह गई है।
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हल्का लेखपाल राजीव वर्मा ने बताया कि अब तक करीब 12 एकड़ गन्ने की फसल शारदा नदी में समा चुकी है। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। कटान अभी भी जारी है और नदी आबादी से करीब 80 मीटर दूर है।
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खेत गया तो घर कैसे बचेगा?
ग्रामीणों का कहना है कि किसानों की फसल पहले ही नदी की भेंट चढ़ रही है। अब आबादी की ओर बढ़ती नदी ने चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि बोल्डर और बाढ़ निरोधक कार्य में अब देरी हुई तो नुकसान सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने शासन-प्रशासन से कटान रोकने के साथ प्रभावित किसानों की बर्बाद फसल का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि रुरासुल्तानपुर में करीब चार हेक्टेयर भूमि का कटान हुआ है। शारदा नदी का जलस्तर घट रहा है। अगर आबादी का कटान होता है तो पड़ोस में बाढ़ राहत केंद्र बनाया गया है। वहां से कटान पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लेखपाल राजीव वर्मा लगातार मौके पर रहकर रिपोर्ट कर रहे हैं।
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कृषि भूमि को निगलती जा रही नदी
बिजुआ। ग्राम पंचायत शाहपुर के मजरा ढखिया खुर्द स्थित पलिया पुरवा में शारदा नदी की कटान ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन गई है। नदी की तेज धार कृषि भूमि को लगातार अपने आगोश में ले रही है। गांव के बाहर बना शिव मंदिर भी कटान की चपेट में आकर शारदा नदी में समा गया। पलिया तहसीलदार ज्योति वर्मा ने बताया कि कटान की सूचना मिली है। लेखपाल बलराम राना को मौके पर भेजा गया है। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर राहत की व्यवस्था की जाएगी। संवाद
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बाढ़ के बीच गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमें
लखीमपुर खीरी। जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष चिकित्सा शिविर लगाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं। मेडिकल टीमें गांव-गांव पहुंचकर मरीजों की जांच कर रही हैं और आवश्यक दवाएं बांट रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि नकहा, रमियाबेहड़, निघासन और बिजुआ के कुंवरपुर समेत विभिन्न ब्लॉकों के प्रभावित गांव और मजरे लगातार चिकित्सा टीमों की निगरानी में हैं। रमियाबेहड़ के बाढ़ प्रभावित कैलाश नगर गोड़ियाना और बंगाली कॉलोनी में सीएचसी की स्वास्थ्य टीम शिविर लगाकर चिकित्सा सेवाएं और आवश्यक दवाएं वितरित कर रही है।
सीएमओ ने अपील की है कि बाढ़ या जलभराव वाले क्षेत्रों में लोग पानी उबालकर पिएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। उल्टी, दस्त, बुखार या त्वचा संबंधी समस्या होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य शिविर या टीम से संपर्क करें। विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट और टीमें क्षेत्र में कार्यरत हैं। संवाद
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बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे एडीएम, सुनी समस्याएं, बांटे लंच पैकेट
लखीमपुर खीरी। एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह शनिवार को सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित रेहरिया कलां गांव पहुंचे। वह दो फुट बाढ़ के पानी में पैदल चलकर गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। एडीएम ने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। जरूरतमंदों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
एडीएम ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को लंच पैकेट बांटे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरत के अनुसार राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण में कमी न रहे। उन्होंने कहा कि आपदा में लोगों की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतें पूरी करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी गांव पहुंची। टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और जरूरतमंदों को दवाएं दीं। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जानीं और जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी। एडीएम ने स्वास्थ्य टीम को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
एडीएम ने पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था कराने और उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने को कहा। उन्होंने पशुधन के स्वास्थ्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।
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नदी अब आबादी से महज 70 से 80 मीटर दूर रह गई है। इससे ग्रामीणों की रातें डर के साये में गुजर रही हैं। सबसे मार्मिक तस्वीर गांव के एक किसान की है। जिस खेत में कुछ दिन पहले तक लहलहाती गन्ने की फसल देखकर उसके चेहरे पर उम्मीद थी, उसी खेत के किनारे बैठकर अब वह आंखों के सामने बर्बादी देख रहा है।
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गन्ने की फसल धीरे-धीरे शारदा की तेज धारा में समाती जा रही है। किसान कुछ नहीं कर पा रहे हैं। वह नदी की ओर टकटकी लगाए अपनी मेहनत को डूबता देख रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, नदी अब खेतों की मेड़ नहीं, गांव की तरफ बढ़ रही है। पिछले कई दिनों से कटान जारी है। जिस तेजी से नदी जमीन काट रही है, उससे ग्रामीणों को डर है कि समय रहते इसे नहीं रोका गया तो खेतों के बाद घरों की बारी आने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। ग्राम प्रशासक प्रतिनिधि जगजीत सिंह के फार्म हाउस से नदी महज 50 मीटर दूर रह गई है।
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हल्का लेखपाल राजीव वर्मा ने बताया कि अब तक करीब 12 एकड़ गन्ने की फसल शारदा नदी में समा चुकी है। इसकी रिपोर्ट प्रशासन को भेज दी गई है। कटान अभी भी जारी है और नदी आबादी से करीब 80 मीटर दूर है।
खेत गया तो घर कैसे बचेगा?
ग्रामीणों का कहना है कि किसानों की फसल पहले ही नदी की भेंट चढ़ रही है। अब आबादी की ओर बढ़ती नदी ने चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल मौके पर पहुंचकर कटान रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा कि बोल्डर और बाढ़ निरोधक कार्य में अब देरी हुई तो नुकसान सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने शासन-प्रशासन से कटान रोकने के साथ प्रभावित किसानों की बर्बाद फसल का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।
एसडीएम युगांतर त्रिपाठी ने बताया कि रुरासुल्तानपुर में करीब चार हेक्टेयर भूमि का कटान हुआ है। शारदा नदी का जलस्तर घट रहा है। अगर आबादी का कटान होता है तो पड़ोस में बाढ़ राहत केंद्र बनाया गया है। वहां से कटान पीड़ितों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लेखपाल राजीव वर्मा लगातार मौके पर रहकर रिपोर्ट कर रहे हैं।
कृषि भूमि को निगलती जा रही नदी
बिजुआ। ग्राम पंचायत शाहपुर के मजरा ढखिया खुर्द स्थित पलिया पुरवा में शारदा नदी की कटान ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन गई है। नदी की तेज धार कृषि भूमि को लगातार अपने आगोश में ले रही है। गांव के बाहर बना शिव मंदिर भी कटान की चपेट में आकर शारदा नदी में समा गया। पलिया तहसीलदार ज्योति वर्मा ने बताया कि कटान की सूचना मिली है। लेखपाल बलराम राना को मौके पर भेजा गया है। लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर राहत की व्यवस्था की जाएगी। संवाद
बाढ़ के बीच गांव-गांव पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीमें
लखीमपुर खीरी। जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग ने विशेष चिकित्सा शिविर लगाकर लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करानी शुरू कर दी हैं। मेडिकल टीमें गांव-गांव पहुंचकर मरीजों की जांच कर रही हैं और आवश्यक दवाएं बांट रही हैं।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि नकहा, रमियाबेहड़, निघासन और बिजुआ के कुंवरपुर समेत विभिन्न ब्लॉकों के प्रभावित गांव और मजरे लगातार चिकित्सा टीमों की निगरानी में हैं। रमियाबेहड़ के बाढ़ प्रभावित कैलाश नगर गोड़ियाना और बंगाली कॉलोनी में सीएचसी की स्वास्थ्य टीम शिविर लगाकर चिकित्सा सेवाएं और आवश्यक दवाएं वितरित कर रही है।
सीएमओ ने अपील की है कि बाढ़ या जलभराव वाले क्षेत्रों में लोग पानी उबालकर पिएं और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। उल्टी, दस्त, बुखार या त्वचा संबंधी समस्या होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य शिविर या टीम से संपर्क करें। विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट और टीमें क्षेत्र में कार्यरत हैं। संवाद
बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंचे एडीएम, सुनी समस्याएं, बांटे लंच पैकेट
लखीमपुर खीरी। एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह शनिवार को सदर तहसील के बाढ़ प्रभावित रेहरिया कलां गांव पहुंचे। वह दो फुट बाढ़ के पानी में पैदल चलकर गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। एडीएम ने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है। जरूरतमंदों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
एडीएम ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को लंच पैकेट बांटे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरत के अनुसार राहत सामग्री की उपलब्धता और वितरण में कमी न रहे। उन्होंने कहा कि आपदा में लोगों की सुरक्षा और बुनियादी जरूरतें पूरी करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की टीम भी गांव पहुंची। टीम ने ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और जरूरतमंदों को दवाएं दीं। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जानीं और जरूरी चिकित्सकीय सलाह दी। एडीएम ने स्वास्थ्य टीम को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए।
एडीएम ने पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था कराने और उनके स्वास्थ्य पर लगातार नजर रखने को कहा। उन्होंने पशुधन के स्वास्थ्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए।

रुरासुल्तानपुर में अपनी गन्ने की फसल शारदा में कटती देखता किसान। स्रोत: ग्रामीण

रुरासुल्तानपुर में अपनी गन्ने की फसल शारदा में कटती देखता किसान। स्रोत: ग्रामीण