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लखीमपुर खीरी: दूसरी एफआईआर में प्रदर्शनकारियों के भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का उल्लेख, किसानों की मौत का जिक्र नहीं

Sun, 10 Oct 2021 05:38 PM IST
अनुराग सक्सेना पीटीआई, लखीमपुर खीरी
पीटीआई, लखीमपुर खीरी Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 10 Oct 2021 05:38 PM IST
सार

यह एफआईआर सुमित जायसवाल नाम के व्यक्ति ने दर्ज कराई थी, जिसका दावा था कि उन गाड़ियों में से एक में बैठा था, जिनकी टक्कर से चार किसानों की मौत हो गई थी।

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Second FIR says protesters attacked BJP workers but no mention of killing of farmers in lakhimur kheri voilance
लखीमपुर खीरी में हिंसा - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लखीमपुर हिंसा में दूसरी एफआईआर दर्ज की गई है। इसमें दावा किया गया है कि कृषि कानून आंदोलनकारियों के बीच मौजूद अराजक तत्वों ने गाड़ी में बैठे भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर दिया। हालांकि इस एफआईआर में किसानों पर गाड़ी चढ़ाने या एक कार में केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष के होने का जिक्र नहीं है।

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पहली एफआईआर में आशीष मिश्र को नामजद किया गया था, जो कथित रूप से उन कारों में से एक में था, जिनकी टक्कर से चार किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद चार अक्टूबर को तिकोनिया पुलिस थाने में दर्ज इस एफआईआर में भाजपा कार्यकर्ताओं की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या का आरोप लगाया गया था। दूसरी एफआईआर में सिर्फ एक अज्ञात दंगाई का उल्लेख है, जिस पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 324 (खतरनाक हथियार से नुकसान पहुंचाना) व अन्य के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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यह एफआईआर सुमित जायसवाल नाम के व्यक्ति ने दर्ज कराई थी, जिसका दावा था कि दंगल कार्यक्रम का उद्घाटन करने आ रहे उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के स्वागत में जाने वाले भाजपा कार्यकर्ताओं में वह भी शामिल था। दंगल कार्यक्रम केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के पैतृक गांव बनवीरपुर में आयोजित हुआ था। अजय मिश्र के बेटे आशीष उर्फ मोनू को शनिवार को चार किसानों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया है।

तिकोनिया क्षेत्र में तीन अक्तूबर को प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में कुल आठ लोगों की मौत हुई थी। इनमें चार किसानों के अलावा दो भाजपा कार्यकर्ता, गाड़ी का ड्राइवर और एक पत्रकार थे। जायसवाल के अनुसार, पत्रकार रमन कश्यप, कार ड्राइवर हरि ओम और भाजपा कार्यकर्ताओं- शुभम मिश्रा और श्याम सुंदर की प्रदर्शनकारियों ने पीट-पीटकर हत्या की थी। हालांकि पत्रकार के परिजनों का आरोप है कि पत्रकार की मौत भी कथित रूप से किसी गाड़ी की टक्कर से ही हुई थी।

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जायसवाल द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ आवेदनकर्ता काले शरण चौक जा रहे थे और ये लोग महिंद्रा थार (यूपी 31 एएस 1000) में मौजूद थे। गाड़ी चला रहा हरिओम और मेरा दोस्त शुभम मिश्र मुख्य अतिथि का स्वागत करने जा रहे थे। किसान आंदोलन के बीच मौजूद अराजक तत्वों ने गाड़ी पर लाठियों, ईटों और पत्थरों से हमला कर दिया, जिससे ड्राइवर चोटिल हो गया और उसने सड़क के एक किनारे गाड़ी खड़ी कर दी।

जायसवाल ने एफआईआर में आरोप लगाया, इसके बाद कथित प्रदर्शनकारियों ने हरिओम को कार से बाहर निकाला और उसपर लाठियों और तलवार से हमला कर दिया। हम पर पत्थरों से हमला किया गया था और वहां से भागने की कोशिश में कथित प्रदर्शनकारियों ने मेरे दोस्त शुभम मिश्रा को पकड़ लिया और उसे पीटने लगे।

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जायसवाल ने दावा किया कि वह किसी तरह मौके से भागने में कामयाब रहा नहीं तो उसकी भी हत्या कर दी जाती। जायसवाल ने कहा कि उन्हें बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से पता चला कि हरिओम और शुभम मिश्रा की हत्या कर दी गई और दो अज्ञात भाजपा कार्यकर्ताओं की मौत हो गई है।

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि उसने दोनों एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की है। अधिकारियों के अनुसार, पहली एफआईआर में दर्ज केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष समेत तीन अभियुक्त गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

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