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Lakhimpur Kheri News: गरीब बच्चों के लिए आरटीआई में आवेदन प्रक्रिया शुरू

Tue, 23 Jan 2024 11:55 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jan 2024 11:55 PM IST
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RTI application process started for poor children
लखीमपुर खीरी। निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला मिले इसको लेकर सरकार द्वारा राइट टू एजुकेशन (आरटीई) योजना चलाई जा रही है। इसके तहत पहले चरण में 20 जनवरी से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बता दें कि हर विद्यालय में 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत रिजर्व होती हैं। बावजूद इसके प्रवेश के पात्र होने के बाद भी कुछ स्कूल संचालक प्रवेश देने में आनाकानी करते हैं।
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हर साल नवीन सत्र की शुरुआत से पहले ही शिक्षा का अधिकार योजना के तहत गरीब और पढ़ाई का खर्च न उठा पाने वाले परिवारों से आवेदन मांगे जाते हैं। इस बार यह योजना बीस जनवरी से शुरू हो चुकी है। पोर्टल खुल जाने के बाद से लोगों ने आवेदन करने शुरू कर दिए हैं। प्रक्रिया चार चरणों में संपन्न होनी है।
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योजना पारदर्शिता के साथ संपन्न हो इसको लेकर लाटरी प्रक्रिया कराई जाएगी। पहले आओ पहले पाओ की तर्ज पर प्रवेश दिए जाएंगे। बता दें कि जिले की सभी तहसीलों में 700 से ज्यादा स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। नियमत: निजी स्कूलों में कुल 25 प्रतिशत सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश लिए जाते हैं।
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विभागीय कर्मचारियों का कहना है कि पहले चरण के आवेदन की लाटरी के लिए 18 फरवरी तक आवेदन लिए जाएंगे। इसके बाद लाटरी निकालकर प्रवेश दिलाए जाएंगे। यह प्रक्रिया छह मार्च तक पूरी कराने के आदेश हैं। वहीं दूसरे चरण में एक मार्च से 30 मार्च तक आवेदन और 17 अप्रैल तक प्रवेश प्रक्रिया, तीसरे चरण में 15 अप्रैल से आठ मई तक आवेदन और 23 मई तक दाखिले लिए जाएंगे। वहीं चौथे यानी अंतिम चरण में एक जून से 20 जून तक आवेदन फार्म लिए जाएंगे। इसके साथ ही सात जुलाई तक दाखिले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।


कुछ स्कूल करते हैं आनाकानी
बता दें कि आरटीई के तहत होने वाले आवेदन प्रक्रिया के बाद विभागीय जांच पड़ताल के बाद ही बच्चे को पात्र मानकर सहमति पत्र जारी होता है, लेकिन कुछ निजी स्कूल संचालक इस आवेदन के तहत प्रवेश देने से कतराते हैं। सूत्र बताते हैं कि निजी स्कूल संचालक अभिभावकों से मोटी फीस वसूलते हैं, लेकिन आरटीई के तहत शासन की ओर से निर्धारित रकम ही अदा की जाती है। वह भी बजट आने पर ही दी जाती है। कम फीस में बच्चोें का प्रवेश लेने में वित्तीय घाटा उठाते हैं, इसीलिए वह प्रवेश देने के नाम पर अभिभावकों से सैकड़ों चक्कर लगवाते हैं।


प्रवेश के नियम
शिक्षा के अधिकार योजना के तहत हर निजी स्कूल में निर्धारित संख्या की 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के लिए रिजर्व रखने के निर्देश हैं, लेकिन जिले में ऐसा होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है। स्कूल संचालकों की मनमानी के चलते हर साल सैकड़ों बच्चों को इस योजना का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसा नहीं है कि विभाग स्कूलों पर कार्रवाई नहीं करता है, विभाग की ओर से बाकायदा नोटिस जारी करते हुए उनके प्रत्यावेदन पर रोक लगाने तक की धमकी दी जाती है लेकिन ऊंची पहुंच के चलते आदेश का भी कोई असर होता हुआ नहीं दिखाई दे रहा है।



20 जनवरी से आरटीई के तहत आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस सत्र में पात्रता की श्रेणी में खरे उतरने वाले अभिभावकों को इस योजना का लाभ अवश्य दिलाया जाएगा। इस प्रक्रिया में यदि कोई भी स्कूल संचालक आनाकानी करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई तय है। किसी भी हाल में पात्र बच्चे का प्रवेश लेने से स्कूल संचालक मना नहीं कर सकते हैं। -प्रवीण कुमार तिवारी, बीएसए
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