फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   Private hospitals distributing death, action limited to locking

Lakhimpur Kheri News: मौत बांटते निजी अस्पताल, ताला डालने तक सीमित कार्रवाई

Wed, 19 Jul 2023 12:15 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Wed, 19 Jul 2023 12:15 AM IST
विज्ञापन
Private hospitals distributing death, action limited to locking
लखीमपुर खीरी। जिले में अवैध रूप से संचालित निजी अस्पताल मौत बांट रहे हैं। पिछले एक सप्ताह में दो निजी हॉस्पिटल में एक नवजात व एक महिला की मौत हो चुकी है। हालांकि इन दोनों अस्पतालों को सीज कर दिया गया है। क्योंकि मौके पर पहुंचे एसीएमओ को न तो इनमें डिग्रीधारी डॉक्टर मिले और न ही प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ। हैरानी की बात है कि मरीज के जान गंवाने के बाद ही अफसर हरकत में आते हैं और फिर अस्पताल सीज होने की कार्रवाई होती है, जो कि कुछ समय बाद फिर खुल जाते है।
विज्ञापन

बिना पंजीकरण के अस्पताल चलाना नियम विरुद्ध है, मगर फिर भी जिला मुख्यालय से लेकर कस्बा और गांवों में सैकड़ों की संख्या में अस्पताल चल रहे हैं। इन अस्पतालों के बाहर लगे बोर्ड पर एमबीबीएस से लेकर एमडी एवं सर्जन डॉक्टरों के एक दो नहीं, बल्कि पांच छह डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं।
विज्ञापन

इस तरह जिले भर में धड़ल्ले से खुल रहे इन अस्पतालों का कोई निरीक्षण करने वाला नहीं है। हालांकि जब इन अस्पतालों में किसी मरीज की मौत हो जाती है, तब विभागीय जिम्मेदार इनमें ताला डलवाकर जांच की कार्रवाई शुरू कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


गत सात दिन में दो अस्पताल हुए सीज
गत बुधवार को गोला सीएचसी क्षेत्र की एक महिला की मौत होने पर खीरी रोड स्थित विवेकानंद अस्पताल और रविवार को महेवागंज स्थित संजीवनी हॉस्पिटल में प्रसव के दौरान एक नवजात की मौत होने पर इन दोनों अस्पतालों को सीज कर दिया गया।
........
जुर्माना एवं शपथ पत्र देने पर खुल जाता है ताला
विभागीय लोग बताते हैं कि शिकायत मिलने पर अस्पताल की जांच कराई जाती है। पंजीकरण प्रपत्र न मिलने पर अस्पताल को सीज कर दिया जाता है। इसके बाद ताला तभी खुलता है जब वह निर्धारित जुर्माना जमा कर उसकी रशीद और मानक पूरा करने के बाद अस्पताल का संचालन करने या फिर अस्पताल न चलाने का शपथ पत्र देता है, जिससे अस्पताल में बंद वह अपना सामान निकाल सके। ताला जिला प्रशासन की अनुमति के बाद ही खुलता है।
......
वर्ष 2022-23 में पंजीकृत हॉस्पिटल- 173
नवीनीकरण हुआ- 00
जनवरी से अब तक सीज हुए अस्पताल- 55
शपथ पत्र के बाद ताला खुला- 20
= पंजीकृत से लेकर सीज व ताला खुलने वाले अस्पतालों की संख्या अनुमानित है।
.....
किराए की डिग्री पर खुल रहे अस्पताल
जिले में तमाम निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनमें लखनऊ आदि में रहने वाले डॉक्टरों की डिग्री किराए पर लगी है। एक डॉक्टर हर माह करीब 50 हजार रूपये इसके बदले में वसूल करता है। एक अस्पताल संचालक ने बताया कि पंजीकरण के लिए एमबीबीएस की डिग्री की जरूरत होती है। जो 40 से 50 हजार रूपये में आसानी से मिल जाती है।
.......
अधिकारियों की कमी के चलते नहीं हो पा रही कार्रवाई
विभागीय जिम्मेदार बताते हैं कि अस्पतालों का निरीक्षण करने के लिए एसीएमओ एवं डिप्टी साीएमओ चाहिए। सीएमओ कार्यालय में सिर्फ एक एसीएमओ और तीन डिप्टी सीएमओ तैनात है। ऐसे में एक-एक के पास कई कई जार्च हैं। ऐसे में अस्पतालों का निरीक्षण कराने में दिक्कत आती है। यदि निरीक्षण कराने में इनका लगा दिया जाए तो अन्य काम प्रभावित होगें।

......
वर्जन
जनवरी से लेकर अब तक करीब 55 हॉस्पिटल सीज किए गए हैं। इनमें से ताला उन्हीं का खोला गया है, जिनके भवन स्वामी ने मकान खाली कराने के लिए प्रार्थना पत्र दिया या फिर जिन्होंने मानक पूरा करने पर एवं भविष्य में अस्पताल न चलाने का शपथ पत्र दिया है। हालांकि इन सब मामलों में जुर्माना सभी से जमा कराया गया है।
डॉ. संतोष गुप्ता सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed