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Lakhimpur Kheri News: 15 सीएचसी में सिर्फ एक पर अल्ट्रासाउंड, जिला अस्पताल की दौड़ लगा रहे मरीज
Wed, 07 Oct 2026 11:33 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 07 Oct 2026 11:33 PM IST
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अनुराग आशुतोष शुक्ल
लखीमपुर खीरी। जिले में सुरक्षित मातृत्व के दावे तो खूब हैं, लेकिन गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सीएचसी पर सुविधा नहीं मिल रही।
15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ पलिया में जांच हो रही है। मोहम्मदी में आठ माह पहले मशीन जरूर आई, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के हटते ही वह धूल फांकने लगी। बाकी सीएचसी के मरीज 80 से 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल या निजी केंद्रों की दौड़ लगा रहे हैं।
मोहम्मदी सीएचसी में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने करीब आठ माह पहले विधायक निधि से अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी। स्वास्थ्य विभाग ने तीन दिन के लिए एक रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराया, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। इसके बाद से मशीन धूल फांक रही है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्र या जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
लोक निर्माण विभाग नहीं, स्वास्थ्य विभाग की इस व्यवस्था में सबसे बड़ी कमी विशेषज्ञ की उपलब्धता की है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सचिन गुप्ता के अनुसार, मोहम्मदी में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। किसी भी डॉक्टर को सोनोलॉजिस्ट की ट्रेनिंग भी नहीं कराई गई है। इस वजह से मरीजों को मशीन उपलब्ध होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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इन सीएचसी पर नहीं होती जांच
फरधान, गोला, पसगवां, बांकेगंज, नकहा, खमरिया, धौरहरा, निघासन, फूलबेहड़ और बेहजम समेत अन्य सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पाती है। इन क्षेत्रों के मरीजों को जांच के लिए करीब 80 से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच नहीं होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है। गर्भवतियों की जांच के लिए तीमारदारों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
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गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। जांच न होने की वजह से मरीजों को निजी पैथोलॉजी या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।
-अनुराग आशुतोष शुक्ल, पसगवां
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सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा होनी चाहिए। जांच न होने से गरीब तबके के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। उन्हें जांच के लिए निजी में महंगी जांच करानी पड़ रही है। शासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
-जुल्फिकार अली, पसगवां
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निजी सेंटर में जांच, विभाग देता है 300 रुपये : सीएमओ
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार, सीएचसी पर भले ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है, लेकिन मरीजों को उनके क्षेत्र के निजी सेंटर से निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है। इसके लिए मरीज को संबंधित सीएचसी से लिखवाकर क्यूआर कोड ले जाना होता है। निजी सेंटरों को 300 रुपये प्रति अल्ट्रासाउंड के हिसाब से विभाग भुगतान करता है।
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15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सिर्फ पलिया में जांच हो रही है। मोहम्मदी में आठ माह पहले मशीन जरूर आई, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट के हटते ही वह धूल फांकने लगी। बाकी सीएचसी के मरीज 80 से 100 किलोमीटर दूर जिला अस्पताल या निजी केंद्रों की दौड़ लगा रहे हैं।
मोहम्मदी सीएचसी में विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने करीब आठ माह पहले विधायक निधि से अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध कराई थी। स्वास्थ्य विभाग ने तीन दिन के लिए एक रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध कराया, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। इसके बाद से मशीन धूल फांक रही है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी केंद्र या जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
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लोक निर्माण विभाग नहीं, स्वास्थ्य विभाग की इस व्यवस्था में सबसे बड़ी कमी विशेषज्ञ की उपलब्धता की है। सीएचसी अधीक्षक डॉ. सचिन गुप्ता के अनुसार, मोहम्मदी में रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं है। किसी भी डॉक्टर को सोनोलॉजिस्ट की ट्रेनिंग भी नहीं कराई गई है। इस वजह से मरीजों को मशीन उपलब्ध होने के बावजूद अल्ट्रासाउंड जांच का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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इन सीएचसी पर नहीं होती जांच
फरधान, गोला, पसगवां, बांकेगंज, नकहा, खमरिया, धौरहरा, निघासन, फूलबेहड़ और बेहजम समेत अन्य सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पाती है। इन क्षेत्रों के मरीजों को जांच के लिए करीब 80 से 100 किलोमीटर की दूरी तय कर जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है।
सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड जांच नहीं होने के कारण मरीजों को निजी पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता है। गर्भवतियों की जांच के लिए तीमारदारों को 800 से 1000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। इससे मरीजों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
गर्भवती महिलाओं सहित अन्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड की जरूरत पड़ती है। जांच न होने की वजह से मरीजों को निजी पैथोलॉजी या जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। इससे समय के साथ आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है।
-अनुराग आशुतोष शुक्ल, पसगवां
सीएचसी में अल्ट्रासाउंड की सुविधा होनी चाहिए। जांच न होने से गरीब तबके के मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। उन्हें जांच के लिए निजी में महंगी जांच करानी पड़ रही है। शासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
-जुल्फिकार अली, पसगवां
निजी सेंटर में जांच, विभाग देता है 300 रुपये : सीएमओ
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता के अनुसार, सीएचसी पर भले ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था नहीं है, लेकिन मरीजों को उनके क्षेत्र के निजी सेंटर से निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलती है। इसके लिए मरीज को संबंधित सीएचसी से लिखवाकर क्यूआर कोड ले जाना होता है। निजी सेंटरों को 300 रुपये प्रति अल्ट्रासाउंड के हिसाब से विभाग भुगतान करता है।

अनुराग आशुतोष शुक्ल