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मजिस्ट्रेट-सीओ से पहले पहुंच गई छापे की सूचना
ब्यूरो/अमर उजाला, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 15 Apr 2016 11:40 PM IST
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पलिया शुगर मिल
- फोटो : अमर उजाला
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मजिस्ट्रेट-सीओ से पहले पहुंच गई छापे की सूचना
मिलों को लॉक कर दिया गया, अध्यासी भागे
लखीमपुर खीरी। भले ही डीएम किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान दिलाना शासन की प्राथमिकता बता रहे हैं और उन्होंने सख्त रुख अपनाने के बाद अधिकारियों को छापा मारने का आदेश दिया हो लेकिन प्रशासन के बीच में ही कोई खोटा सिक्का भी है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एसडीएम और सीओ अपने क्षेत्रों को चीनी मिलों में बाद में पहुंचे लेकिन डीएम के निर्देश पर छापे की मिलों तक पहले पहुंच गई। नतीजा यह हुआ कि मिलों के गेट पर ताला मार दिया गया। अधिकारी रात भर दौड़भाग करते रहे लेकिन किसी भी मिल में अध्यासी नहीं मिले। कहीं से एचआर मैनेजर को उठाया तो कहीं से केन मैनेजर को। सोमवार से भुगतान किए जाने का आश्वासन मिला तो सभी को छोड़ दिया गया। डीएम आकाशदीप ने भी माना है कि शायद मिल प्रबंधन को छापे की जानकारी हो गई थी। चेक कराया जा रहा है कि सूचना कहां से लीक हुुई है। कोई भी कर्मचारी अधिकारी जिम्मेदार होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
छापा-1
खंभारखेड़ा में दो बार छापा
महेवागंज। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल और सीओ सिटी एमपी सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ खंभारखेड़ा चीनी मिल पर गुरुवार की रात दो बार छापा मारा लेकिन मिल के अध्यासी/यूनिट हेड एनसी अग्रवाल सहित कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला। ऐसे में पुलिस टीम वापस लौट आई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि मिल में सिक्योरिटी गार्ड और इंजीनियरिंग विभाग के लोग ही मिले इसलिए किसी से बात नहीं हो पाई। इस मिल पर एक अरब 37 करोड़ 93 लाख दो हजार रुपये बकाया है।
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छापा-2
पलिया में एचआर हेड को थाने में बैठाया
पलियाकलां। स्थानीय चीनी मिल में रात भर पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां दौड़ती रहीं लेकिन कोई भी हाथ नहीं लगा। यहां एसडीएम आलोक वर्मा, सीओ एलडी भारती, गन्ना समिति सचिव वीपी श्रीवास्तव, एसओ केपी सिंह ने दबिश दी थी। सुबह मिल के एचआर हेड हरीश ज्याला को दबाव बनाने के लिए थाने लाया गया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात कराई। बकौल पुलिस, मिल के उच्च प्रबंधन ने सोमवार तक भुगतान का वायदा किया है। एचआर हेड को दोपहर में छोड़ दिया गया। इस मिल पर एक अरब 37 करोड़ 97 लाख 64 हजार रुपये बकाया है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मिल बंद होने पर पूरा भुगतान किया जाना था लेकिन बाद में सहमति बनी थी कि बेची गई चीनी का 85 फीसदी हिस्सा गन्ना मूल्य भुगतान में खर्च होगा लेकिन मिल इस राशि को अन्य मदों में ले लिया।
छापा-3
गोला में गन्ना प्रबंधक को कोतवाली लाई पुलिस
गोला गोकर्णनाथ। इस चीनी मिल पर सबसे अधिक एक अरब 66 करोड़ 36 लाख 82 हजार रुपये का बकाया है। बकाए का भुगतान न करने के कारण मिल अध्यासी ओमपाल सिंह पर दर्ज मुकदमे के बाद गुरुवार की रात एसडीएम विनोद कुमार गुप्त, सीओ अवनीश्वरचंद श्रीवास्तव के नेतृत्व में कोतवाल एसएन द्विवेदी ने रात लगभग 11 बजे पुलिस और पीएसी के साथ चीनी मिल में छापा मारा। यहां भी चीनी मिल का मुख्य द्वार, रोज खुला रहने वाला छोटा द्वार भी बंद मिला। अधिकारियों को दरवाजा खुलवाने में 25 मिनट लग गए। यहां गन्ना प्रबंधक विनय सिंह मिले जिन्हें पुलिस कोतवाली ले आई। कोतवाल ने बताया कि अध्यासी ओमपाल सिंह के न मिलने पर विनय सिंह को कोतवाली लाया गया। उनसे पूछताछ और बयान के बाद वापस भेज दिया गया।
....और पकड़े गए डॉयरेक्टर अशोक गुप्ता
लखीमपुर। एसडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता ने बताया जब वह गोला मिल के कैंपस में बने अध्यासी ओमपाल सिंह के आवास पर गए तो उसमें ताला लटक रहा था। पास बने बड़े बंगले की बाबत पूछा तो सिक्योरिटी गार्ड ने उसे मिल के डायरेक्टर ग्रुप एंड ऑपरेशन्स अशोक गुप्ता का बताया। सीओ के साथ मय फोर्स बंगले के बाहर पहुंचे तो एसी चलता देख फिर पूछा, इसमें कौन है। गार्ड ने बताया चपरासी शंकरलाल सो रहा है। शक हुआ कि निदेशक के बेडरूम में चपरासी एसी चलाकर कैसे सो सकता है। कई बार दरवाजा खटखटाया और शंकरलाल नाम लेकर कई बार पुकारा लेकिन जवाब नहीं मिला तो दरवाजा जुड़वा दिया। अंदर अशोक गुप्ता बेड पर मिले। बकौल एसडीएम, अशोक गुप्ता ने दवाइयों से भरा डिब्बा दिखाते हुए बताया कि वह हार्ट के मरीज हैं। दवाई खाकर सो गए थे, जान नहीं पाए। मिल भुगतान का प्रयास कर रही है। सोमवार तक कुछ करेंगे। एसडीएम ने बताया कि हार्ट का मरीज होने के कारण निदेशक को छोड़ दिया गया। केन जीएम को साथ लाया गया और लिखापढ़ी के बाद उन्हें भी जाने दिया गया क्योंकि तलाश अध्यासी की थी।
शहर विधायक आंदोलन पर अड़े
शहर विधायक उत्कर्ष वर्मा ने किसानों का गन्ना भुगतान न होने पर 20 अप्रैल से आंदोलन की चेतावनी दी थी। डीएम की छापामार कार्रवाई पर उन्होंने खुशी जाहिर की है लेकिन यह भी कहा है कि जब तक भुगतान नहीं हो जाता, वह अपना प्रस्तावित आंदोलन नहीं टालेंगे। उन्होंने 20 अप्रैल को सभी किसानों से मौजी नसीरुद्दीन भवन मैदान पहुंचने का आह्वान किया है।
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मिलों को लॉक कर दिया गया, अध्यासी भागे
लखीमपुर खीरी। भले ही डीएम किसानों को गन्ना मूल्य भुगतान दिलाना शासन की प्राथमिकता बता रहे हैं और उन्होंने सख्त रुख अपनाने के बाद अधिकारियों को छापा मारने का आदेश दिया हो लेकिन प्रशासन के बीच में ही कोई खोटा सिक्का भी है।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, एसडीएम और सीओ अपने क्षेत्रों को चीनी मिलों में बाद में पहुंचे लेकिन डीएम के निर्देश पर छापे की मिलों तक पहले पहुंच गई। नतीजा यह हुआ कि मिलों के गेट पर ताला मार दिया गया। अधिकारी रात भर दौड़भाग करते रहे लेकिन किसी भी मिल में अध्यासी नहीं मिले। कहीं से एचआर मैनेजर को उठाया तो कहीं से केन मैनेजर को। सोमवार से भुगतान किए जाने का आश्वासन मिला तो सभी को छोड़ दिया गया। डीएम आकाशदीप ने भी माना है कि शायद मिल प्रबंधन को छापे की जानकारी हो गई थी। चेक कराया जा रहा है कि सूचना कहां से लीक हुुई है। कोई भी कर्मचारी अधिकारी जिम्मेदार होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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छापा-1
खंभारखेड़ा में दो बार छापा
महेवागंज। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अंकित अग्रवाल और सीओ सिटी एमपी सिंह ने पुलिस फोर्स के साथ खंभारखेड़ा चीनी मिल पर गुरुवार की रात दो बार छापा मारा लेकिन मिल के अध्यासी/यूनिट हेड एनसी अग्रवाल सहित कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं मिला। ऐसे में पुलिस टीम वापस लौट आई। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि मिल में सिक्योरिटी गार्ड और इंजीनियरिंग विभाग के लोग ही मिले इसलिए किसी से बात नहीं हो पाई। इस मिल पर एक अरब 37 करोड़ 93 लाख दो हजार रुपये बकाया है।
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छापा-2
पलिया में एचआर हेड को थाने में बैठाया
पलियाकलां। स्थानीय चीनी मिल में रात भर पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां दौड़ती रहीं लेकिन कोई भी हाथ नहीं लगा। यहां एसडीएम आलोक वर्मा, सीओ एलडी भारती, गन्ना समिति सचिव वीपी श्रीवास्तव, एसओ केपी सिंह ने दबिश दी थी। सुबह मिल के एचआर हेड हरीश ज्याला को दबाव बनाने के लिए थाने लाया गया। उन्होंने उच्चाधिकारियों से बात कराई। बकौल पुलिस, मिल के उच्च प्रबंधन ने सोमवार तक भुगतान का वायदा किया है। एचआर हेड को दोपहर में छोड़ दिया गया। इस मिल पर एक अरब 37 करोड़ 97 लाख 64 हजार रुपये बकाया है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि मिल बंद होने पर पूरा भुगतान किया जाना था लेकिन बाद में सहमति बनी थी कि बेची गई चीनी का 85 फीसदी हिस्सा गन्ना मूल्य भुगतान में खर्च होगा लेकिन मिल इस राशि को अन्य मदों में ले लिया।
छापा-3
गोला में गन्ना प्रबंधक को कोतवाली लाई पुलिस
गोला गोकर्णनाथ। इस चीनी मिल पर सबसे अधिक एक अरब 66 करोड़ 36 लाख 82 हजार रुपये का बकाया है। बकाए का भुगतान न करने के कारण मिल अध्यासी ओमपाल सिंह पर दर्ज मुकदमे के बाद गुरुवार की रात एसडीएम विनोद कुमार गुप्त, सीओ अवनीश्वरचंद श्रीवास्तव के नेतृत्व में कोतवाल एसएन द्विवेदी ने रात लगभग 11 बजे पुलिस और पीएसी के साथ चीनी मिल में छापा मारा। यहां भी चीनी मिल का मुख्य द्वार, रोज खुला रहने वाला छोटा द्वार भी बंद मिला। अधिकारियों को दरवाजा खुलवाने में 25 मिनट लग गए। यहां गन्ना प्रबंधक विनय सिंह मिले जिन्हें पुलिस कोतवाली ले आई। कोतवाल ने बताया कि अध्यासी ओमपाल सिंह के न मिलने पर विनय सिंह को कोतवाली लाया गया। उनसे पूछताछ और बयान के बाद वापस भेज दिया गया।
....और पकड़े गए डॉयरेक्टर अशोक गुप्ता
लखीमपुर। एसडीएम गोला विनोद कुमार गुप्ता ने बताया जब वह गोला मिल के कैंपस में बने अध्यासी ओमपाल सिंह के आवास पर गए तो उसमें ताला लटक रहा था। पास बने बड़े बंगले की बाबत पूछा तो सिक्योरिटी गार्ड ने उसे मिल के डायरेक्टर ग्रुप एंड ऑपरेशन्स अशोक गुप्ता का बताया। सीओ के साथ मय फोर्स बंगले के बाहर पहुंचे तो एसी चलता देख फिर पूछा, इसमें कौन है। गार्ड ने बताया चपरासी शंकरलाल सो रहा है। शक हुआ कि निदेशक के बेडरूम में चपरासी एसी चलाकर कैसे सो सकता है। कई बार दरवाजा खटखटाया और शंकरलाल नाम लेकर कई बार पुकारा लेकिन जवाब नहीं मिला तो दरवाजा जुड़वा दिया। अंदर अशोक गुप्ता बेड पर मिले। बकौल एसडीएम, अशोक गुप्ता ने दवाइयों से भरा डिब्बा दिखाते हुए बताया कि वह हार्ट के मरीज हैं। दवाई खाकर सो गए थे, जान नहीं पाए। मिल भुगतान का प्रयास कर रही है। सोमवार तक कुछ करेंगे। एसडीएम ने बताया कि हार्ट का मरीज होने के कारण निदेशक को छोड़ दिया गया। केन जीएम को साथ लाया गया और लिखापढ़ी के बाद उन्हें भी जाने दिया गया क्योंकि तलाश अध्यासी की थी।
शहर विधायक आंदोलन पर अड़े
शहर विधायक उत्कर्ष वर्मा ने किसानों का गन्ना भुगतान न होने पर 20 अप्रैल से आंदोलन की चेतावनी दी थी। डीएम की छापामार कार्रवाई पर उन्होंने खुशी जाहिर की है लेकिन यह भी कहा है कि जब तक भुगतान नहीं हो जाता, वह अपना प्रस्तावित आंदोलन नहीं टालेंगे। उन्होंने 20 अप्रैल को सभी किसानों से मौजी नसीरुद्दीन भवन मैदान पहुंचने का आह्वान किया है।