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Lakhimpur Kheri News: जिले में लाइसेंस किसी का नहीं... सूदखोरी का धंधा चलाकर बांट रहे मौत

Thu, 28 Aug 2025 11:08 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 28 Aug 2025 11:08 PM IST
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No one has a license in the district... running a business of usury and distributing death
लखीमपुर खीरी। जरूरत पर लोग ब्याज पर रुपये तो लेते हैं, लेकिन मोटे ब्याज के चक्कर में फंसकर वह मूलधन तक नहीं लौटा पाते। सूदखोर 20 से 30 प्रतिशत का ब्याज वसूलते हैं। जिले में इसका काम करने के लिए एक भी लाइसेंस जारी नहीं किया गया है, लेकिन अवैध रूप से ब्याज पर पैसे दिए जा रहे हैं।
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सूदखोरों की धमकी और प्रताड़ना से परेशान होकर लोग आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं। एक दिन पहले ही पड़ोसी जिला शाहजहांपुर में एक व्यापारी ने सूदखोरों से परेशान होकर मासूम बेटे को जहर खिलाने के बाद पत्नी समेत आत्महत्या कर ली। जिले में भी पूर्व में ऐसी घटनाएं सामने आईं, जो इस सूदखोरों की कलई खोलती हैं। शिकायत न होने की बात कहकर पुलिस और जिला प्रशासन अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।
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शहर से लेकर पूरे जिले में सूदखोरों ने अपना जाल फैला रखा है। इन्हीं सूदखोरों ने कई जिंदगियां छीन लीं। बताया जाता है कि सूदखोर इतना ब्याज लगाते हैं कि जिसे दे पाना संभव नहीं होता और मौत को गले लगाना ही एक मात्र रास्ता पीड़ितों को दिखाई देता है। 2024 में जिला प्रशासन के पास 19 पजीकृत लोग ब्याज पर रुपये देने का काम करते थे, जो मात्र दो से तीन प्रतिशत तक ब्याज पर रकम उपलब्ध कराते थे।
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जिला प्रशासन ने सूदखोरी की प्रथा को समाप्त करने के लिए किसी भी ब्याज का काम करने वाले का लाइसेंस नवीनीकरण न करने का कदम उठाया, लेकिन इसके बाद भी जिले में यह धंधा बिना किसी डर के अवैध रूप से किया जा रहा है।
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केस : वन
मूलधन और ब्याज की रकम न लौटा पाने से मौत को लगाया गले
-वर्ष 2015 में सदर कोतवाली के मोहल्ला बहादुर नगर निवासी कृष्ण कुमार सोनी का परिवार सूदखोरों की धमकी और वसूले जा रहे ब्याज के चलते समाप्त हो गया। कृष्ण कुमार ने ढाई लाख रुपये का कर्ज सूदखोरों से लिया था। रुपये वापस न करने पर सूदखोरों ने घर आकर धमकाने और मारपीट जैसी घटनाओं को अंजाम देना शुरू कर दिया था। इस बात से आहत होकर कृष्ण कुमार सोनी ने पत्नी माया देवी, इंजीनियर बेटे अंकुर और बेटी रीशू को खाने में जहर दिया और उसके बाद खुद भी जहर खाकर जान दे दी थी। यह मामला काफी चर्चा में रहा था। हालांकि, बाद में मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
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केस : दो
सरेराह पिटाई के बाद फंदा लगाकर दी थी जान
-करीब छह महीने पहले मोहल्ला महराजनगर निवासी लल्लू कश्यप भी सूदखोरी का शिकार हो गए थे। ब्याज की रकम अदा न कर पाने की वजह से सूदखोरों ने लल्लू की जमकर पिटाई कर दी थी। इसका दर्द सहन न कर पाने से लल्लू ने घर में ही फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी।

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केस : थ्री
30 हजार रुपये नहीं चुकता कर पाए तो की थी आत्महत्या
-सदर कोतवाली के मोहल्ला कमलापुर शिव कॉलोनी निवासी रामासरे भी सूदखोरों की प्रताड़ना से परेशान थे। इसी के चलते उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। परिजनों के मुताबिक रामासरे ने किसी जरूरी काम के लिए 30 हजार रुपये ब्याज पर लिए थे। कई बार ब्याज की रकम भी दी, लेकिन सूदखोरों का ब्याज बढ़ता गया। रामासरे ब्याज का रुपया भी देते, लेकिन मोटे ब्याज के चलते वह उसे चुकता नहीं कर पा रहे थे, इसी को देखते हुए उन्होंने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
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