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पीएचसी पर महिला डॉक्टर नहीं, कन्या इंटर कॉलेज में भी पड़ा ताला
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सिकंद्राबाद कस्बे में निर्माणाधीन कन्या इंटर कालेज
- फोटो : LAKHIMPUR
फैसल खान
सिकंद्राबाद। चुनाव आते ही मतदाताओं को अपनी आकर्षित करने के लिए विकास के लुभावने वादे कर रहे हैं। मगर, मतगणना के बाद वादे सिर्फ वादे रह जाते हैं। इसीलिए अभी तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंद्राबाद में न तो महिला चिकित्सक की तैनाती हो सकी है और न ही कस्बे का कन्या इंटर कॉलेज शुरू हो सका है। इससे महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के लिए कई किलोमीटर दूर सीएचसी गोला या फिर मितौली दौड़ना पड़ता है। साथ ही ‘पढ़ें बेटियां, बढ़े बेटियां’ की अवधारणा साकार नहीं हो पा रही है।
कस्बावासियों को बेहतर चिकित्सीय लाभ दिलाने के लिए सालों पहले गोला रोड पर बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात आज तक बदहाल हैं। न तो यहां पर्याप्त स्टाफ मिला और न ही डॉक्टर एवं दवाएं। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को है। पीएचसी पर महिला डॉक्टर न होने से सबसे ज्यादा दिक्क्त महिलाओं को है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को परेशानी ज्यादा होती है। समय समय पर होने वाली जांच से लेकर प्रसव आदि के लिए 15 किलोमीटर दूर सीएचसी गोला या फिर करीब 30 किलोमीटर दूर सीएचसी मितौली जाना पड़ता है। पीएचसी निर्माण से लेकर अब तक सरकारें आती जाती रहीं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने महिला डॉक्टर की तैनाती को न तो मुद्दा बनाया और न ही इसके लिए प्रयास किया। (संवाद)
अभी तक पूरा नहीं हो सका कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें आगे बढ़ाने को लेकर कस्बे में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से बालिका इंटर कॉलेज की मंजूरी मिली। दो साल बीतने के बाद भी विद्यालय अभी तक तैयार नहीं हो सका। ग्रामीणों की माने तो आस पास के तमाम गांवों में एक भी बालिका विद्यालय नहीं है। इससे छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पाती थी। इस विद्यालय के बनने से छात्राओं को पढ़ाई का बेहतर अवसर मिलता। यदि माननीय चेत जाते तो कॉलेज कब का तैयार हो गया था और छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक अच्छा विद्यालय मिल जाता है।
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बजट के अभाव में नहीं हो पा रहा निर्माण
कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरा है। जिम्मेदारों की माने तो कॉलेज के लिए दो करोड़ तैंतीस लाख का बजट था, लेकिन पूरा बजट न मिलने के कारण काम प्रभावित हो गया। यदि समय से बजट मिलता तो काम कबका पूरा हो गया होता।
सिकंद्राबाद निवासी विमला शुक्ला बताती हैं कि पीएचस सिर्फ नाम की है। न तो दवाएं होती है और न ही महिला डॉक्टर एवं स्टाफ। दवा के नाम पर सिर्फ सर्दी, जुकाम बुखार की गोली मिलती है। दिक्कत होने पर महिलाओं को मितौली और गोला ही जाना पड़ता है।
सिकंद्राबाद गांव निवासी निधि मिश्रा का कहना है कि महिलाओं को सेहतमंद बनाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। मगर, पीएचसी पर महिला डॉक्टर तक नहीं है, जिससे महिलाएं अपना इलाज करा सकें। प्रसव से लेकर अन्य बीमारियों होने पर महिलाओं को दूर दराज ही जाना पड़ता है।
अमेठी निवासी इरफान डंपी बताते हैं कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनो मामले में सिकंद्राबाद कस्बा क्षेत्र पीछे है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ नाम का है। सरकारी कॉलेज तक नहीं है। बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका।
अमेठी निवासी आशीष गुप्ता ने बताया कि जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बढ़ती आबादी को देखते हुए पीएचसी को सीएचसी में तब्दील कराने के साथ बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण पूरा कराकर पढ़ाई शुरू करानी चाहिए।
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सिकंद्राबाद। चुनाव आते ही मतदाताओं को अपनी आकर्षित करने के लिए विकास के लुभावने वादे कर रहे हैं। मगर, मतगणना के बाद वादे सिर्फ वादे रह जाते हैं। इसीलिए अभी तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिकंद्राबाद में न तो महिला चिकित्सक की तैनाती हो सकी है और न ही कस्बे का कन्या इंटर कॉलेज शुरू हो सका है। इससे महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के लिए कई किलोमीटर दूर सीएचसी गोला या फिर मितौली दौड़ना पड़ता है। साथ ही ‘पढ़ें बेटियां, बढ़े बेटियां’ की अवधारणा साकार नहीं हो पा रही है।
कस्बावासियों को बेहतर चिकित्सीय लाभ दिलाने के लिए सालों पहले गोला रोड पर बने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के हालात आज तक बदहाल हैं। न तो यहां पर्याप्त स्टाफ मिला और न ही डॉक्टर एवं दवाएं। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं को है। पीएचसी पर महिला डॉक्टर न होने से सबसे ज्यादा दिक्क्त महिलाओं को है। ऐसे में गर्भवती महिलाओं को परेशानी ज्यादा होती है। समय समय पर होने वाली जांच से लेकर प्रसव आदि के लिए 15 किलोमीटर दूर सीएचसी गोला या फिर करीब 30 किलोमीटर दूर सीएचसी मितौली जाना पड़ता है। पीएचसी निर्माण से लेकर अब तक सरकारें आती जाती रहीं, लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने महिला डॉक्टर की तैनाती को न तो मुद्दा बनाया और न ही इसके लिए प्रयास किया। (संवाद)
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अभी तक पूरा नहीं हो सका कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने और उन्हें आगे बढ़ाने को लेकर कस्बे में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से बालिका इंटर कॉलेज की मंजूरी मिली। दो साल बीतने के बाद भी विद्यालय अभी तक तैयार नहीं हो सका। ग्रामीणों की माने तो आस पास के तमाम गांवों में एक भी बालिका विद्यालय नहीं है। इससे छात्राओं की पढ़ाई नहीं हो पाती थी। इस विद्यालय के बनने से छात्राओं को पढ़ाई का बेहतर अवसर मिलता। यदि माननीय चेत जाते तो कॉलेज कब का तैयार हो गया था और छात्राओं को पढ़ाई के लिए एक अच्छा विद्यालय मिल जाता है।
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बजट के अभाव में नहीं हो पा रहा निर्माण
कन्या इंटर कॉलेज का निर्माण कार्य बजट के अभाव में अधूरा है। जिम्मेदारों की माने तो कॉलेज के लिए दो करोड़ तैंतीस लाख का बजट था, लेकिन पूरा बजट न मिलने के कारण काम प्रभावित हो गया। यदि समय से बजट मिलता तो काम कबका पूरा हो गया होता।
सिकंद्राबाद निवासी विमला शुक्ला बताती हैं कि पीएचस सिर्फ नाम की है। न तो दवाएं होती है और न ही महिला डॉक्टर एवं स्टाफ। दवा के नाम पर सिर्फ सर्दी, जुकाम बुखार की गोली मिलती है। दिक्कत होने पर महिलाओं को मितौली और गोला ही जाना पड़ता है।
सिकंद्राबाद गांव निवासी निधि मिश्रा का कहना है कि महिलाओं को सेहतमंद बनाने के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। मगर, पीएचसी पर महिला डॉक्टर तक नहीं है, जिससे महिलाएं अपना इलाज करा सकें। प्रसव से लेकर अन्य बीमारियों होने पर महिलाओं को दूर दराज ही जाना पड़ता है।
अमेठी निवासी इरफान डंपी बताते हैं कि स्वास्थ्य और शिक्षा दोनो मामले में सिकंद्राबाद कस्बा क्षेत्र पीछे है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ नाम का है। सरकारी कॉलेज तक नहीं है। बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ था, जो अब तक पूरा नहीं हो सका।
अमेठी निवासी आशीष गुप्ता ने बताया कि जनप्रतिनिधियों को स्वास्थ्य और शिक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए। बढ़ती आबादी को देखते हुए पीएचसी को सीएचसी में तब्दील कराने के साथ बालिका इंटर कॉलेज का निर्माण पूरा कराकर पढ़ाई शुरू करानी चाहिए।