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लखीमपुर में बाबा बर्फानी: प्राचीन मेंढक मंदिर में 21 कुंतल बर्फ से किया गया नर्मदेश्वर महादेव का श्रृंगार

Sun, 16 Jul 2023 05:49 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Published by: मुकेश कुमार Updated Sun, 16 Jul 2023 05:49 PM IST
सार

नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को मेंढक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर विशालकाय मेंढक की आकृतिनुमा चबूतरे पर बना हुआ है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं। 

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Narmadeshwar Mahadev was decorated with 21 quintals of snow in the ancient medak temple
भक्तों ने किए बाबा बर्फानी के दर्शन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भगवान भोलेनाथ की आराधना के पवित्र माह सावन में आस्था के अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। कांवड़िये गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं तो मंदिरों में  महादेव का भव्य श्रृंगार किया जा रहा है। सावन की शिवरात्रि पर लखीमपुर खीरी के ओयल कस्बा स्थित प्राचीन नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में बाबा बर्फानी की तर्ज पर भगवान का 21 कुंतल बर्फ से श्रृंगार किया गया। 

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ओयल कस्बा के युवकों ने टोली बनाकर मोहल्ला शिवाला स्थित विख्यात नर्मदेश्वर महोदव मेंढक मंदिर में भगवान शंकर का 21 कुंतल से बाबा का बर्फानी श्रृंगार किया। नर्मदेश्वर महाराज का श्रृंगार युवकों ने दोपहर एक बजे से शुरू किया, जो रात करीब आठ बजे पूर्ण हुआ। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद मंदिर में बाबा अमरनाथ बर्फानी के दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा। इस दौरान मंदिर के पुजारी शांति तिवारी सहित कई लोग उपस्थित रहे।

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यहां मेंढक की पाठ पर विराजमान हैं महादेव 

नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को मेंढक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर ओयल कस्बे में मंडूक तंत्र और श्री यंत्र के आधार पर बना यह मंदिर अपनी अनूठी और अद्भुत वास्तु संरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के तत्कालीन शासकों ने करीब 200 साल पहले कराया था। मुख्य मंदिर एक विशालकाय मेंढक की पीठ पर बना हुआ है।

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Narmadeshwar Mahadev was decorated with 21 quintals of snow in the ancient medak temple
मेंढक शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मेंढक की पीठ पर काफी ऊंचा अष्टकोणीय चबूतरा है। गर्भ गृह में पहुंचने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। इस अष्टकोणीय चबूतरे का आकार श्री यंत्र जैसा है। सबसे ऊपर गर्भ गृह है। गर्भ गृह में सफेद संगमरमर का करीब तीन फिट ऊंचा अरघा है। जिस पर नर्मदेश्वर शिवलिंग स्थापित है। अरघे पर सहस्त्रदल कमल की आकृति बनी हुई है। गर्भगृह का द्वार पूरब की ओर है। गर्भगृह के बाहर परिक्रमा पथ भी बना है।

खड़ी मुद्रा में नंदी महाराज की प्रतिमा 

आम तौर से शिव मंदिरों में भगवान शिव के वाहन नंदी की मूर्ति बैठी मुद्रा में स्थापित होती है लेकिन ओयल के इस अद्भुत मेंढक शिव मंदिर में नंदी की प्रतिमा खड़ी मुद्रा में स्थापित है। बताया जाता है कि ओयल का मेंढक शिव मंदिर एकलौता ऐसा शिव मंदिर है, जहां नंदी खड़ी मुद्रा में स्थापित हैं। यह इस मंदिर की एक बड़ी विशेषता है। मंदिर की देखरेख और रखरखाव का काम ओयल राजपरिवार के लोग करते हैं।
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