लखीमपुर में बाबा बर्फानी: प्राचीन मेंढक मंदिर में 21 कुंतल बर्फ से किया गया नर्मदेश्वर महादेव का श्रृंगार
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को मेंढक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर विशालकाय मेंढक की आकृतिनुमा चबूतरे पर बना हुआ है। कहा जाता है कि यहां भगवान शिव मेंढक की पीठ पर विराजमान हैं।
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भगवान भोलेनाथ की आराधना के पवित्र माह सावन में आस्था के अनूठे रंग देखने को मिल रहे हैं। कांवड़िये गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक कर रहे हैं तो मंदिरों में महादेव का भव्य श्रृंगार किया जा रहा है। सावन की शिवरात्रि पर लखीमपुर खीरी के ओयल कस्बा स्थित प्राचीन नर्मदेश्वर महादेव मंदिर में बाबा बर्फानी की तर्ज पर भगवान का 21 कुंतल बर्फ से श्रृंगार किया गया।
ओयल कस्बा के युवकों ने टोली बनाकर मोहल्ला शिवाला स्थित विख्यात नर्मदेश्वर महोदव मेंढक मंदिर में भगवान शंकर का 21 कुंतल से बाबा का बर्फानी श्रृंगार किया। नर्मदेश्वर महाराज का श्रृंगार युवकों ने दोपहर एक बजे से शुरू किया, जो रात करीब आठ बजे पूर्ण हुआ। श्रृंगार पूर्ण होने के बाद मंदिर में बाबा अमरनाथ बर्फानी के दर्शन-पूजन के लिए तांता लगा रहा। इस दौरान मंदिर के पुजारी शांति तिवारी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
यहां मेंढक की पाठ पर विराजमान हैं महादेव
नर्मदेश्वर महादेव मंदिर को मेंढक मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर ओयल कस्बे में मंडूक तंत्र और श्री यंत्र के आधार पर बना यह मंदिर अपनी अनूठी और अद्भुत वास्तु संरचना के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। इस मंदिर का निर्माण ओयल स्टेट के तत्कालीन शासकों ने करीब 200 साल पहले कराया था। मुख्य मंदिर एक विशालकाय मेंढक की पीठ पर बना हुआ है।
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