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आज होगा नंद के घर आनंद, तैयारियां पूरी
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Wed, 24 Aug 2016 10:03 PM IST
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जन्मोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
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कृष्ण जन्माष्टमी से पहले उत्साह से लबरेज हुआ शहर, सजा बाजार
मंदिरों और घरों में सजी झांकियां, बाजार में खूब बिकीं लड्डू गोपाल की मूर्तियां
जन्माष्टमी बृहस्पतिवार को है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए शहर भर में उत्साह का माहौल है। मंदिरों को भव्यता के साथ सजाया जा रहा है। मंदिरों ओर घरों में झांकियां सजने लगी हैं। लड्डू गोपाल की आकर्षक मूर्तियों से बाजार भरा पड़ा है। लड्डू गोपाल के कपड़ों, झूलों के अलावा भोग लगाने के लिए दूध, दही, फल, मिठाइयों से बाजार सजा है। शहर के मंदिर जन्माष्टमी के एक दिन पहले से बिजली की रंगविरंगी झालरों से जगमगाने लगे हैं।
रामनवमी मंदिर, भुइफोरवानाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, पुलिस लाइन स्थित मंदिर और लक्ष्मीनरायन मंदिर में बुधवार को दिन भर कलाकार झांकियां सजाने में जुटे रहे। मंदिरों का रंग रोगन करने के बाद उनको बिजली की रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया है। बुधवार को लोग घरों में भी झांकियां सजाने में व्यस्त रहे।
बाजार में बुधवार को लड्डू गोपाल की चांदी, पीतल, तांबे के अलावा प्लास्टर आफ पेरिस और मिट्टी की मनमोहक मूर्तियों के अलावा लकड़ी प्लास्टिक और धातुओं से बने कान्हा के झूले और रंगबिरंगे कपड़ों की खूब बिक्री हुई। झांकी सजाने में इस्तेमाल होने वाले कागज के फूलों की लड़ियां और झालर के अलावा भगवान कृष्ण के चित्र और अन्य सजावटी सामान की सजी दुकानों पर खरीदारों की खूब भीड़ रही। इसके चलते बाजार में दिन भर काफी रौनक रही।
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लड्डू गोपाल को भोग लगाने में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवे, मिठाइयों और फलों की दुकानों पर बुधवार को अच्छी बिक्री हुई। बाजार में दोपहर बाद ही खीरा गायब हो गया। जन्माष्टमी के दिन दूध दही और मावा की किल्लत की आशंका के चलते लोगों ने बुधवार को ही लोगों ने जरूरत भर का सामान खरीदा ताकि त्योहार के दिन दिक्कत न हो।
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में भी बुधवार को काफी रौनक रही। कान्हा के जन्मदिवस के जश्न में बुधवार से पूरा जिला डूबा दिखाई दे रहा था। स्कूल कॉलेजों में गुरुवार को जन्माष्टमी की छुट्टी के चलते बुधवार को ही बच्चों ने उत्साहपूर्वक जन्माष्टमी का पर्व मनाया। कहीं रूप सज्जा प्रतियोगिता हुई तो कहीं दधिहांडी फोड़ने का कार्यक्रम हुआ।
क्या-क्या है बाजार में
शृंगार सामग्री : मुकुट, मोती जड़ित परिधान मोपंखा, पगड़ी, माला, कंगन, बिंदी, छड़ी, कुंडली, परिधान, आसन, चौकी, सोफा सेट पालना, लकड़ी, मेटल, पीतल और चांदी मूर्तियां। स्टोन के माखन चोर, पीतल के लड्डू गोपाल, राधाकृष्ण, सांई बाबा, भगवान गणेश, हनुमान और दुर्गा मां की प्रतिमाएं।
क्या हैं रेंज :
तैयार लड्डू गोपाल की मूर्ति-180 रुपये से दो हजार रुपये तक।
शृंगार सामग्री : 50 रुपये से 400 रुपये तक।
माला : 50 से 300 रुपये।
वस्त्र : 20 से 800 रुपये।
ब्रज की कला का हुनर है लड्डू गोपाल की पोशाक
लड्डू गोपाल की पोशाक बृज की शिल्पकला की पहचान हैं। बृज की यह कला इन पोशाकों के जरिए दूर-दूर तक पहुंच रही है। यहां के कारोबारी यह पोशाकें मथुरा से लाते हैं। शहर के कारोबारी मनोज कश्यप बताते हैं कि गोल पोशाक पूरी तरह हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित की जाती हैं। इसमें मशीन का प्रयोग नहीं होता। पोशाक पर जर्किन नग, पेस्टिंग आदि के काम में बहुत समय लगता है। एक पोशाक तैयार करने में एक कारीगर का पूरा दिन लग जाता है। गोल पोशाक 20 रुपये से लेकर 2000 रुपये या इससे भी अधिक कीमत के बनते हैं। मथुरा में तैयार लड्डू गोपाल एवं राधाकृष्ण की पोशाक में ब्रज कला की झलक मिलती है। यही कारण है कि देश भर में इस पोशाक की मांग रहती है।
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मंदिरों और घरों में सजी झांकियां, बाजार में खूब बिकीं लड्डू गोपाल की मूर्तियां
जन्माष्टमी बृहस्पतिवार को है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए शहर भर में उत्साह का माहौल है। मंदिरों को भव्यता के साथ सजाया जा रहा है। मंदिरों ओर घरों में झांकियां सजने लगी हैं। लड्डू गोपाल की आकर्षक मूर्तियों से बाजार भरा पड़ा है। लड्डू गोपाल के कपड़ों, झूलों के अलावा भोग लगाने के लिए दूध, दही, फल, मिठाइयों से बाजार सजा है। शहर के मंदिर जन्माष्टमी के एक दिन पहले से बिजली की रंगविरंगी झालरों से जगमगाने लगे हैं।
रामनवमी मंदिर, भुइफोरवानाथ मंदिर, राधा कृष्ण मंदिर, पुलिस लाइन स्थित मंदिर और लक्ष्मीनरायन मंदिर में बुधवार को दिन भर कलाकार झांकियां सजाने में जुटे रहे। मंदिरों का रंग रोगन करने के बाद उनको बिजली की रंग बिरंगी झालरों से सजाया गया है। बुधवार को लोग घरों में भी झांकियां सजाने में व्यस्त रहे।
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बाजार में बुधवार को लड्डू गोपाल की चांदी, पीतल, तांबे के अलावा प्लास्टर आफ पेरिस और मिट्टी की मनमोहक मूर्तियों के अलावा लकड़ी प्लास्टिक और धातुओं से बने कान्हा के झूले और रंगबिरंगे कपड़ों की खूब बिक्री हुई। झांकी सजाने में इस्तेमाल होने वाले कागज के फूलों की लड़ियां और झालर के अलावा भगवान कृष्ण के चित्र और अन्य सजावटी सामान की सजी दुकानों पर खरीदारों की खूब भीड़ रही। इसके चलते बाजार में दिन भर काफी रौनक रही।
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लड्डू गोपाल को भोग लगाने में इस्तेमाल होने वाले सूखे मेवे, मिठाइयों और फलों की दुकानों पर बुधवार को अच्छी बिक्री हुई। बाजार में दोपहर बाद ही खीरा गायब हो गया। जन्माष्टमी के दिन दूध दही और मावा की किल्लत की आशंका के चलते लोगों ने बुधवार को ही लोगों ने जरूरत भर का सामान खरीदा ताकि त्योहार के दिन दिक्कत न हो।
शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र की बाजारों में भी बुधवार को काफी रौनक रही। कान्हा के जन्मदिवस के जश्न में बुधवार से पूरा जिला डूबा दिखाई दे रहा था। स्कूल कॉलेजों में गुरुवार को जन्माष्टमी की छुट्टी के चलते बुधवार को ही बच्चों ने उत्साहपूर्वक जन्माष्टमी का पर्व मनाया। कहीं रूप सज्जा प्रतियोगिता हुई तो कहीं दधिहांडी फोड़ने का कार्यक्रम हुआ।
क्या-क्या है बाजार में
शृंगार सामग्री : मुकुट, मोती जड़ित परिधान मोपंखा, पगड़ी, माला, कंगन, बिंदी, छड़ी, कुंडली, परिधान, आसन, चौकी, सोफा सेट पालना, लकड़ी, मेटल, पीतल और चांदी मूर्तियां। स्टोन के माखन चोर, पीतल के लड्डू गोपाल, राधाकृष्ण, सांई बाबा, भगवान गणेश, हनुमान और दुर्गा मां की प्रतिमाएं।
क्या हैं रेंज :
तैयार लड्डू गोपाल की मूर्ति-180 रुपये से दो हजार रुपये तक।
शृंगार सामग्री : 50 रुपये से 400 रुपये तक।
माला : 50 से 300 रुपये।
वस्त्र : 20 से 800 रुपये।
ब्रज की कला का हुनर है लड्डू गोपाल की पोशाक
लड्डू गोपाल की पोशाक बृज की शिल्पकला की पहचान हैं। बृज की यह कला इन पोशाकों के जरिए दूर-दूर तक पहुंच रही है। यहां के कारोबारी यह पोशाकें मथुरा से लाते हैं। शहर के कारोबारी मनोज कश्यप बताते हैं कि गोल पोशाक पूरी तरह हस्तशिल्पियों द्वारा निर्मित की जाती हैं। इसमें मशीन का प्रयोग नहीं होता। पोशाक पर जर्किन नग, पेस्टिंग आदि के काम में बहुत समय लगता है। एक पोशाक तैयार करने में एक कारीगर का पूरा दिन लग जाता है। गोल पोशाक 20 रुपये से लेकर 2000 रुपये या इससे भी अधिक कीमत के बनते हैं। मथुरा में तैयार लड्डू गोपाल एवं राधाकृष्ण की पोशाक में ब्रज कला की झलक मिलती है। यही कारण है कि देश भर में इस पोशाक की मांग रहती है।