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प्रवासी परिंदों से गुलजार होने लगे तराई के जलाशय

Mon, 07 Nov 2016 11:22 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी। Updated Mon, 07 Nov 2016 11:22 PM IST
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Migratory birds began buzzing from lowland reservoir
प्रवासी परिंदे - फोटो : अमर उजाला
मेहमानों के स्वागत, सुरक्षा के इंतजाम में जुटा वनविभाग
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शिकार रोकने को होगी जलाशयों की कड़ी निगरानी
बर्ड फ्लू को लेकर वन विभाग की टीमें रहेंगी एलर्ट

 ठंडे देशों से हजारों किलोमीटर की उड़ान भर कर प्रवासी परिंदों का तराई में आना शुरू हो गया है। हालांकि अब बहुत कम संख्या में प्रवासी पक्षी यहां पहुंचे हैं। 15 नवंबर के बाद तराई के जलाशय रंग-बिरंगे मेहमान पक्षियों की चहचहाट से गुलजार हो जाएंगे। करीब साढ़े तीन महीने के लिए मेहमान के रूप में यहां आने वाले इन प्रवासी परिंदों के स्वागत और सुरक्षा की तैयारियां वन विभाग ने पूरी कर ली हैं।  
सर्दी के मौसम में ठंडे देशों से हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षी हजारों किलोमीटर दूरी तय कर तराई के वेटलैंड में आते हैं। यह पक्षी नवंबर माह के मध्य से आना शुरू कर देते हैं। करीब तीन माह का प्रवास करने के बाद फरवरी माह में अंत तक अपने वतन लौट जाते हैं। इन प्रवासी परिंदों को तराई के जलाशयों में पसंदीदा भोजन के साथ-साथ प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण भी मिलता है। हालांकि पक्षी विशेषज्ञों का मानना है कि पक्षियों के प्राकृतिक आवास और अनुकूल वातावरण में कमी आ रही है। इससे प्रवासी पक्षियों में आमद भी कम हो रही है।
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जिले में यहां आते हैं प्रवासी पक्षी
नगरिया झील, सेमरई झील, किशनपुर सेंक्चुरी का झादी ताल, सुहेली नदी, ककरहा ताल, रमियाबेहड़ झील, शारदानहर का सीपेज क्षेत्र, शारदानगर, मैनहन झील, कठिना नदी, जालिमनगर के आसपास, अंबूपुर बहेरवा के निकट उल्लनदी। सीतापुर रोड पर महमदपुर झील। 
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तराई में आते हैं ये प्रवासी परिंदे

सर्दियों के मौसम में यूरोपीय और मध्य एशियाई देशों से बड़ी संख्या में ब्राह्मनी डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कांब डक, ग्रीव, बल्ेक हेडेड ओरियोल, ब्लक विल्ड स्टिल्ट, कामन मूरहेन, कामन विजन और पिलिकन आदि प्रवासी परिंदे तराई के जलाशयों में आते हैं। कभी साइबेरियन क्रेन बड़ी संख्या में आते थे लेकिन अनुकूल वातावरण में कमी होने से ये यहां पिछले 20 वर्षों से नहीं दिखाई दी है। इन प्रवासी परिंदों के साथ स्थानीय परिंदों का अच्छा तालमेल और मेलमिलाप दिखाई देता है।
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मेहमान पक्षियों की सुरक्षा के हैं ये इंतजाम
मेहमान पक्षियों की सुरक्षा को वन विभाग ने संरक्षित नगरिया और सेमरई झीलों के लिए वन विभाग की टीमें गठित की हैं। यह टीमें यह सुनिश्चित करेंगी कि पक्षियों का शिकार न होने पाए। उनके प्राकृतिक आवास में खलल न पड़े इसका भी ध्यान रखा जाएगा। इन झीलों के अलावा अन्य वेटलैंड की भी निगरानी बढ़ाई गई है। बर्ड फ्लू की आशंका को लेकर विशेष सतर्कता बरतने के लिए टीमों को अलर्ट किया गया है।

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सर्दियों के मौसम में तराई के जलाशयों में आने वाले प्रवासी परिंदों की सुरक्षा के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। वन विभाग जलाशयों की निगरानी करने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को पक्षियों की सुरक्षा के प्रति जागरूक कर रहा है।
-अखिलेश पांडेय, डीएफओ, साउथ खीरी।
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