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Lakhimpur Kheri News: साफ-सफाई और चौड़े रास्तों के लिए जाना जाता है मियांपुर कॉलोनी गांव

Thu, 02 Oct 2025 11:20 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Thu, 02 Oct 2025 11:20 PM IST
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Mianpur Colony village is known for its cleanliness and wide roads
गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद
मोहम्मदी (खीरी)। क्षेत्र के गोमती नदी के किनारे बसा मियांपुर कॉलोनी गांव अपने इतिहास और विकास के लिए जाना जाता है। खास बात यह है कि यहां हर यहां घर में मंदिर है। हर गली की अपनी पहचान है। हालांकि, नाली की व्यवस्था नहीं है। घरों में सोखता बनाकर गंदे पानी का निस्तारण किया जाता है। इसके बाद भी गांव स्वच्छ और व्यवस्थित है।
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यह गांव सन 1962-63 में पाकिस्तान से आए लोगों के लिए बसाया गया था। शुरू में इनमें से कुछ लोग रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप में आकर बसे थे। वर्ष 1964 में यहां भेजे गए। फिर यहां से कुछ लोग पीलीभीत, बरेली, लखीमपुर और शाहजहांपुर जिलों में भी गए। कांग्रेस सरकार में उस समय विधायक रहे बंशीधर राज ने उनके रहने-खाने की व्यवस्था करवाई।
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शुरुआत में यह लोग अलग भाषा बोलते थे। आसपास के ग्रामीणों से उनका मेल-जोल कम था, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने स्थानीय लोगों के साथ घुल-मिलकर समाज में अपनी जगह बनाई। वर्तमान में यहां की आबादी लगभग 5 हजार है, जिसमें छोटे-छोटे तीन-चार उपगांव भी शामिल है।
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सन 1964 में अमूल मास्टर ने यहां एक विद्यालय खोला, जो आज मान्यता प्राप्त हो गया है। उस समय गांव में जंगल और झाड़-झंखड़ थे, लेकिन निवासियों ने मेहनत करके इसे सुंदर गांव में बदल दिया। आज मियांपुर कॉलोनी में लगभग सभी लोग शिक्षित हैं। कई लोग विदेशों में चीनी मिलों की चिमनी बनाने, डॉक्टर, टीचर, अधिकारी और हस्तशिल्प कार्यों में माहिर हैं।
गांव की सामाजिक और सांस्कृतिक एकता भी तारीफ के योग्य है। आपसी झगड़े होते हैं, लेकिन बैठकों से उनका हल निकाला जाता है। इसलिए आज तक गांव में पुलिस चौकी की जरूरत नहीं पड़ी। जमुनिया घाट का पुल बनने से रात-दिन वाहनों का आवागमन होता है। इसके लिए गांव में पुलिस चौकी की मांग अब की गई है।
यहां बाजार भी नियमित लगता है। आसपास के दुकानदार यहां आते हैं। स्वच्छता और सामाजिक गतिविधियों के लिए प्रधान और पूर्व प्रधान को केंद्र सरकार से पुरस्कार मिल चुके हैं। मियांपुर कॉलोनी न केवल अपने विकास बल्कि शिक्षा, स्वच्छता और एकता के लिए भी मिसाल बन चुका है।

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नंबरों से होती है गलियों की पहचान
अक्सर देखा गया है कि गांव में बहुत ही तंग रास्ते होते हैं। दोनों तरफ नालियां टूटी और उनका पानी सड़क तक फैला या भरा रहता है, लेकिन मियांपुर गांव में ऐसा कुछ नहीं है। गांव में अंदर के रास्ते इतने चौड़े हैं कि दो वाहन आसानी से निकल सकते हैं। सड़क के दोनों तरफ नालियां भी दिखाई नहीं देतीं। गांव में गलियों की पहचान के लिए हर गली का नंबर है। सड़कें एकदम साफ-सुथरी नजर आती है, जो अन्य गांव से अलग अपनी मिसाल पेश करता दिखाई देता है।

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गांव में लड़ाई-झगड़े होते हैं, जो आपस में बैठकर निपटा लिए जाते हैं। जमुनिया घाट का पुल बनने से रात-दिन सड़क चलती है। इसलिए पुलिस चौकी होनी चाहिए।

-परमानंद घोष, ग्रामवासी
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मियांपुर काॅलोनी गांव साफ-सफाई के लिए जानी जाती है। यहां का हर व्यक्ति जिम्मेदारी से अपने घर के आसपास स्वच्छता रखता है। यह औरों के लिए भी प्रेरणा है।
- तपन विश्वास, ग्रामवासी

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

गांव के अंदर चौड़े रास्ते। संवाद

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