{"_id":"62040bd87cde38497426bdbf","slug":"many-governments-came-could-not-fulfill-the-dreams-of-the-players-lakhimpur-news-bly4750031196","type":"story","status":"publish","title_hn":"आती जाती रहीं सरकारें, खिलाड़ियों के अरमान रह गए अधूरे के अधूरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आती जाती रहीं सरकारें, खिलाड़ियों के अरमान रह गए अधूरे के अधूरे
विज्ञापन
गोला का आधा अधूरा स्वर्गीय राजेंद्र गिरी स्टेडियम
- फोटो : LAKHIMPUR
गोला गोकर्णनाथ। नगर के पब्लिक इंटर कॉलेज का स्व. राजेंद्र गिरि स्टेडियम डेढ़ दशक से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी पूर्णता की बाट जोह रहा है। इस दौरान सपा की तीन और भाजपा की एक बार सरकारें बनीं, लेकिन लेकिन नगर व क्षेत्र के खिलाड़ियों के सपने पूरे नहीं कर पाईं।
वर्ष 2003 में पब्लिक इंटर कॉलेज की प्रबंध कमेटी की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद पांच नवंबर 2003 को सपा सरकार के संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री आजम खां ने स्टेडियम का शिलान्यास किया था। तत्कालीन सपा से विधायक अरविंद गिरी ने वर्ष 2004 विधायक निधि से 10 लाख रुपये का प्रस्ताव किया।
2005 में स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ, उसके बाद 2006 में 19.95 लाख, 2007 में 20 लाख, 2008 में 17.7 3 लाख, 2010 में 18.51 लाख रुपये सहित 86 लाख से अधिक की विधायक निधि देकर कार्यदायी संस्था नगर पालिका द्वारा मुख्य गेट, 5 द्वार, मंच और आधे मैदान की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया। उसके बाद से धनाभाव के चलते खेल प्रतिभाओं के लिए यह ड्रीम प्रोजेक्ट आज भी आधा अधूरा पड़ा है। इस दौरान सपा की तीन और भाजपा की एक सहित चार सरकारें आईं, लेकिन युवाओं को सपने दिखाने वाली यह सभी सरकार खिलाड़ियों के इस सपने को साकार नहीं कर पाईं।
विज्ञापन
नगर के मोहल्ला पश्चिमी दीक्षिताना निवासी अवनीश गुप्ता का कहना है कि स्टेडियम पर सुबह और शाम आर्मी और पुलिस के लिए तैयारी करते हैं। लेकिन या स्टेडियम आज भी अधूरा पड़ा है।
अखिलेश कुमार बाबरपुर गांव निवासी अखिलेश कुमार का कहना है कि वह गोला में रहकर पढ़ाई और आर्मी की तैयारी करते हैं। युवाओं को इस स्टेडियम से काफी उम्मीदें थी।
छेदीपुर निवासी हरिओम का कहना है कि खिलाड़ियों, युवाओं के लिए गोला का स्टेडियम आशा की किरण है। यदि जनप्रतिनिधि ध्यान देते तो यह स्टेडियम कब का प्रदेश में अपनी पहचान बना चुका होता।
स्टेडियम पर खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करा रहे कोच आबिद का कहना है कि यहां आर्मी और पुलिस का सपना संजोए युवाओं को फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। चुनाव में पार्टियां युवाओं को सपने तो दिखाती है लेकिन कई वर्षों से आर्मी में कोई भर्ती नहीं निकली।
विज्ञापन
वर्ष 2003 में पब्लिक इंटर कॉलेज की प्रबंध कमेटी की बैठक में प्रस्ताव पारित होने के बाद पांच नवंबर 2003 को सपा सरकार के संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री आजम खां ने स्टेडियम का शिलान्यास किया था। तत्कालीन सपा से विधायक अरविंद गिरी ने वर्ष 2004 विधायक निधि से 10 लाख रुपये का प्रस्ताव किया।
विज्ञापन
2005 में स्टेडियम का निर्माण शुरू हुआ, उसके बाद 2006 में 19.95 लाख, 2007 में 20 लाख, 2008 में 17.7 3 लाख, 2010 में 18.51 लाख रुपये सहित 86 लाख से अधिक की विधायक निधि देकर कार्यदायी संस्था नगर पालिका द्वारा मुख्य गेट, 5 द्वार, मंच और आधे मैदान की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया। उसके बाद से धनाभाव के चलते खेल प्रतिभाओं के लिए यह ड्रीम प्रोजेक्ट आज भी आधा अधूरा पड़ा है। इस दौरान सपा की तीन और भाजपा की एक सहित चार सरकारें आईं, लेकिन युवाओं को सपने दिखाने वाली यह सभी सरकार खिलाड़ियों के इस सपने को साकार नहीं कर पाईं।
विज्ञापन
नगर के मोहल्ला पश्चिमी दीक्षिताना निवासी अवनीश गुप्ता का कहना है कि स्टेडियम पर सुबह और शाम आर्मी और पुलिस के लिए तैयारी करते हैं। लेकिन या स्टेडियम आज भी अधूरा पड़ा है।
अखिलेश कुमार बाबरपुर गांव निवासी अखिलेश कुमार का कहना है कि वह गोला में रहकर पढ़ाई और आर्मी की तैयारी करते हैं। युवाओं को इस स्टेडियम से काफी उम्मीदें थी।
छेदीपुर निवासी हरिओम का कहना है कि खिलाड़ियों, युवाओं के लिए गोला का स्टेडियम आशा की किरण है। यदि जनप्रतिनिधि ध्यान देते तो यह स्टेडियम कब का प्रदेश में अपनी पहचान बना चुका होता।
स्टेडियम पर खिलाड़ियों को प्रैक्टिस करा रहे कोच आबिद का कहना है कि यहां आर्मी और पुलिस का सपना संजोए युवाओं को फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं। चुनाव में पार्टियां युवाओं को सपने तो दिखाती है लेकिन कई वर्षों से आर्मी में कोई भर्ती नहीं निकली।