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खीरी की बेटियों ने फतह की एलब्रुस की चोटी
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एलब्रुस की चोटी फतह करने वालीं आकांक्षा और अंजलि।
मोहल्ला शाहपुरा कोठी निवासी अंजली और आकांक्षा का अगला लक्ष्य एवरेस्ट फतह करना
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लखीमपुर खीरी। शहर की बेटियां पहाड़ों की बुलंदियां छू रही हैं। मोहल्ला शाहपुरा कोठी निवासी दिनेश चतुर्वेदी की बेटी अंजली और आकांक्षा ने हाल ही में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस को फतह किया है। अब एवरेस्ट फतह करने का इरादा रखती हैं।
लखीमपुर की अंजली (21) और आकांक्षा (15) पढ़ाई के सिलसिले में नैनीताल में रह रही हैं। पर्वतारोहण इनका शौक ही नहीं जुनून भी है। पर्वतारोहण की प्रेरणा इन्हें अपने पिता दिनेश चतुर्वेदी से मिली है। वह भी एक पर्वतारोही हैं। हालांकि अब वह पर्वतारोहण छोड़कर अपना व्यापार संभाल रहे हैं। मां सुधा चतुर्वेदी को भी पर्वतारोहण का शौक है। इसी माह आठ अक्तूबर को अंजली और आकांक्षा के ग्रुप ने सोवियत रूस में यूरोप की 5642 मीटर ऊंची पहाड़ की चोटी पर चढ़ाई पूरी की है। इस ग्रुप में गाइड समेत कुल पांच पर्वतारोही थे। इनमें अंजली और उनकी बहन आकांक्षा भी शामिल थी, जबकि दो सदस्य अन्य देशों के थे।
अंजली बताती हैं कि उनकी 15 वर्षीय बहन आकांक्षा इसी साल 23 अगस्त को लद्दाख की 6250 मीटर ऊंची कांगयातसे -01 चोटी पर चढ़कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा चुकी हैं। अंजली का कहना है पापा की प्रेरणा से उत्तराखंड में रहते हुए पर्वतारोहण का शौक लगा। पहले छोटे-छोटे पहाड़ों पर चढ़कर स्वत : प्रशिक्षण लिया। इसके बाद अधिक ऊंची चोटियों को अपना लक्ष्य बनाया। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची माउंट एवरेस्ट को फतह करने का है। उनका कहना है कि पहाड़ की ऊंची चोटियों पर चढ़कर बुलंदियां छूने का अहसास होता है। अपने देश के लिए गौरव का अनुभव होता है।
लखीमपुर की अंजली (21) और आकांक्षा (15) पढ़ाई के सिलसिले में नैनीताल में रह रही हैं। पर्वतारोहण इनका शौक ही नहीं जुनून भी है। पर्वतारोहण की प्रेरणा इन्हें अपने पिता दिनेश चतुर्वेदी से मिली है। वह भी एक पर्वतारोही हैं। हालांकि अब वह पर्वतारोहण छोड़कर अपना व्यापार संभाल रहे हैं। मां सुधा चतुर्वेदी को भी पर्वतारोहण का शौक है। इसी माह आठ अक्तूबर को अंजली और आकांक्षा के ग्रुप ने सोवियत रूस में यूरोप की 5642 मीटर ऊंची पहाड़ की चोटी पर चढ़ाई पूरी की है। इस ग्रुप में गाइड समेत कुल पांच पर्वतारोही थे। इनमें अंजली और उनकी बहन आकांक्षा भी शामिल थी, जबकि दो सदस्य अन्य देशों के थे।
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अंजली बताती हैं कि उनकी 15 वर्षीय बहन आकांक्षा इसी साल 23 अगस्त को लद्दाख की 6250 मीटर ऊंची कांगयातसे -01 चोटी पर चढ़कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम दर्ज करा चुकी हैं। अंजली का कहना है पापा की प्रेरणा से उत्तराखंड में रहते हुए पर्वतारोहण का शौक लगा। पहले छोटे-छोटे पहाड़ों पर चढ़कर स्वत : प्रशिक्षण लिया। इसके बाद अधिक ऊंची चोटियों को अपना लक्ष्य बनाया। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची माउंट एवरेस्ट को फतह करने का है। उनका कहना है कि पहाड़ की ऊंची चोटियों पर चढ़कर बुलंदियां छूने का अहसास होता है। अपने देश के लिए गौरव का अनुभव होता है।
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