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सैलानियों के लिए दुधवा नेशनल पार्क खुला
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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क का नवीन सत्र 15 नवंबर को शुरू होने जा रहा है। इसको लेकर तैयारियां मुक्कमल कर ली गईं हैं। 15 नवंबर को दुधवा नेशनल पार्क का नवीन सत्र शुरू हो जाएगा और सैलानियों के लिए दुधवा के द्वार खुल जाएंगे। बृहस्पतिवार को साफ-सफाई व रंगरोगन का कार्य देर शाम तक चलता रहा और दुधवा को नवीन पर्यटन के लिए तैयार किया गया।
गौरतलब है कि दुधवा नेशनल पार्क का सत्र 15 नवंबर से 15 जून तक चलता है। ऐसा मानसून सत्र के चलते होता है क्योंकि बारिश के सीजन में बारिश के कारण पार्क के कच्चे रास्ते खराब हो जाते हैं और वाहनों के फंसने का खतरा रहता है। वर्ष 2019 के नवीन सत्र के शुभारंभ की तैयारियां मुक्कमल कर ली गईं हैं और 15 नवंबर को नवीन सत्र का शुभारंभ फीता काटकर और विधि विधान से पूजन अर्चन के बाद कराया जाएगा। सुबह 10 बजे पार्क के द्वार सैलानियों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार वन निगम के जीएम केके सिंह भी पार्क के उद्घाटन में शामिल होंगे। इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को देर शाम तक साफ-सफाई, रंगरोगन, हटों की सफाई, हटों में मरम्मत आदि का कार्य चलता रहा।
ऐसे पहुंचे दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए सड़क यातायात से ही पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से आने वाले सैलानी बरेली, पीलीभीत, मैलानी होते हुए पलिया और यहां से दुधवा जा सकते हैं। दिल्ली से पलिया तक कई रोडवेज व प्राइवेट बसें भी चलती हैं जो सैलानियों के लिए यहां आने में मददगार होंगी। लखनऊ से भी निजी और यात्री वाहनों से दुधवा पहुंचा जा सकता है। इसके लिए लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, पलिया होते हुए दुधवा सैलानी जा सकते हैं। इसके अलावा लखनऊ से बड़ी रेल लाइन की ट्रेन द्वारा लखीमपुर आकर फिर सड़क यातायात से दुधवा पहुंचा जा सकता है।
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सैलानियों के स्वागत को तैयार ‘दुर्गा’
बिजनौर में जंगली हाथियों के झुंड से बिछड़ी छोटी हथिनी को दुधवा नेशनल पार्क लाया गया था। इस हथिनी का नाम पार्क प्रशासन ने दुर्गा रखा था। नन्हीं हथिनी को दुर्गा के नाम से जाना जाने लगा था। अब यह दुर्गा सबसे ज्यादा बच्चों में खासकर लोकप्रिय है। सैलानियों के लिए स्वागत को दुर्गा भी इस बार तैयार है जो सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
बाघ आदि जीवों समेत दुधवा की जैव विविधता को भी तरजीह
दुधवा में इस बार बाघ, गैंडा आदि जीवों के साथ उसकी जैव विविधता को भी तरजीह दी जाएगी। ओपनिंग सत्र में प्रशिक्षित गाडड सैलानियों को बाघ, गैंडों के साथ दुधवा की जैव विविधता के भी बाखूबी दर्शन कराएंगे। इसकी मुकम्मल तैयारियां कर ली गई हैं। इसके लिए पार्क की तरफ से नौ महिला गाइडों के साथ पुरुष गाइड शामिल हैं।
ठहरने की सुविधा
दुधवा नेशनल पार्क पर्यटन परिसर में वन विश्राम भवन के साथ ही 14 थारू हट व जनरल हॉल बना है। थारूहट दुधवा, वन विश्राम भवन बनकटी, किशनपुर, सोनारीपुर, बेलरायां, सलूकापुर में भी ठहरने की सुविधाएं हैं।
दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क
दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति तीन दिन 100 रुपये, विदेशी पर्यटक 800 रुपये
बच्चा 60 रुपये, विदेशी पर्यटक बच्चे 700 रुपये, अतिरिक्त दिन 40 रुपए, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
वन मार्ग शुल्क प्रति वाहन भारतीय व विदेशी तीन-तीन सौ रुपये
किशनपुर वन्यजीव विहार प्रवेश शुल्क।
प्रति व्यक्ति तीन दिन 50 रुपए, विदेशी पर्यटक 600 रुपये
बच्चा 30 रुपये, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
अतिरिक्त दिन 40 रुपये, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
छह वर्ष की हुई सुहेली व हाथी विनायक
पलियाकलां हथिनी सुहेली का जन्म वर्ष 2013 में 14 नवंबर को हुआ था। यहां ढाई तीन माह पूर्व नन्हें हाथी विनायक ने भी कदम रखा था। सुहेली दुधवा की पालतू हथिनी श्रीलोचना की तो विनायक चमेली की संतान हैं। दोनों स्वाभाव से काफी नटखट हैं और खूब अठखेलियां करते हैं। 14 नवंबर को वह छह वर्ष के हो गए हैं। 15 नवंबर से शुरू हो रहे दुधवा के नए सत्र में इन दोनों के एक बार फिर से पर्यटकों को अपनी ओर खींचने की पूरी संभावना है।
एक दिन पूर्व डीडी ने गाइडों संग की बैठक
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के शुभारंभ से एक दिन पूर्व बृहस्पतिवार को डिप्टी डायरेक्टर (डीडी) मनोज सोनकर ने गाइडों के साथ बैठक की। जिसमें उन्होंने गाइडों को संबोधित करते हुए सैलानियों से मृदुभाषी बने रहते हुए उचित व्यवहार करने, पार्क के वन एवं वन्यजीवों के बारे में सही जानकारी मुहैया कराने के दिशा-निर्देश दिए। बताया कि गाइड पर्यटन का महत्वपूर्ण अंग होते हैं और पार्क के बारे में जो संदेश व जानकारी गाइडों द्वारा सैलानियों को दी जाती हैं, उस जानकारी को ही सैलानी दूर-दूर तक प्रसारित करते हैं। दुधवा और बेलरायां के वार्डेन शशिकांत अमरेश ने गाइडों की समस्याएं सुनीं और डीडी के सहयोग से उनका निराकरण करने का भरोसा दिलाया। साथ ही पार्क में अनुशासन बनाए रखने और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की भी बात कही।
दुधवा पार्क के नए सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। सुबह 10 बजे सत्र का उद्घाटन होगा। - मनोज सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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गौरतलब है कि दुधवा नेशनल पार्क का सत्र 15 नवंबर से 15 जून तक चलता है। ऐसा मानसून सत्र के चलते होता है क्योंकि बारिश के सीजन में बारिश के कारण पार्क के कच्चे रास्ते खराब हो जाते हैं और वाहनों के फंसने का खतरा रहता है। वर्ष 2019 के नवीन सत्र के शुभारंभ की तैयारियां मुक्कमल कर ली गईं हैं और 15 नवंबर को नवीन सत्र का शुभारंभ फीता काटकर और विधि विधान से पूजन अर्चन के बाद कराया जाएगा। सुबह 10 बजे पार्क के द्वार सैलानियों के लिए खोल दिए जाएंगे। इस बार वन निगम के जीएम केके सिंह भी पार्क के उद्घाटन में शामिल होंगे। इससे एक दिन पहले बृहस्पतिवार को देर शाम तक साफ-सफाई, रंगरोगन, हटों की सफाई, हटों में मरम्मत आदि का कार्य चलता रहा।
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ऐसे पहुंचे दुधवा नेशनल पार्क
दुधवा नेशनल पार्क पहुंचने के लिए सड़क यातायात से ही पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से आने वाले सैलानी बरेली, पीलीभीत, मैलानी होते हुए पलिया और यहां से दुधवा जा सकते हैं। दिल्ली से पलिया तक कई रोडवेज व प्राइवेट बसें भी चलती हैं जो सैलानियों के लिए यहां आने में मददगार होंगी। लखनऊ से भी निजी और यात्री वाहनों से दुधवा पहुंचा जा सकता है। इसके लिए लखनऊ से सीतापुर, लखीमपुर, पलिया होते हुए दुधवा सैलानी जा सकते हैं। इसके अलावा लखनऊ से बड़ी रेल लाइन की ट्रेन द्वारा लखीमपुर आकर फिर सड़क यातायात से दुधवा पहुंचा जा सकता है।
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सैलानियों के स्वागत को तैयार ‘दुर्गा’
बिजनौर में जंगली हाथियों के झुंड से बिछड़ी छोटी हथिनी को दुधवा नेशनल पार्क लाया गया था। इस हथिनी का नाम पार्क प्रशासन ने दुर्गा रखा था। नन्हीं हथिनी को दुर्गा के नाम से जाना जाने लगा था। अब यह दुर्गा सबसे ज्यादा बच्चों में खासकर लोकप्रिय है। सैलानियों के लिए स्वागत को दुर्गा भी इस बार तैयार है जो सैलानियों के आकर्षण का केंद्र रहती है।
बाघ आदि जीवों समेत दुधवा की जैव विविधता को भी तरजीह
दुधवा में इस बार बाघ, गैंडा आदि जीवों के साथ उसकी जैव विविधता को भी तरजीह दी जाएगी। ओपनिंग सत्र में प्रशिक्षित गाडड सैलानियों को बाघ, गैंडों के साथ दुधवा की जैव विविधता के भी बाखूबी दर्शन कराएंगे। इसकी मुकम्मल तैयारियां कर ली गई हैं। इसके लिए पार्क की तरफ से नौ महिला गाइडों के साथ पुरुष गाइड शामिल हैं।
ठहरने की सुविधा
दुधवा नेशनल पार्क पर्यटन परिसर में वन विश्राम भवन के साथ ही 14 थारू हट व जनरल हॉल बना है। थारूहट दुधवा, वन विश्राम भवन बनकटी, किशनपुर, सोनारीपुर, बेलरायां, सलूकापुर में भी ठहरने की सुविधाएं हैं।
दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क
दुधवा नेशनल पार्क में प्रवेश शुल्क प्रति व्यक्ति तीन दिन 100 रुपये, विदेशी पर्यटक 800 रुपये
बच्चा 60 रुपये, विदेशी पर्यटक बच्चे 700 रुपये, अतिरिक्त दिन 40 रुपए, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
वन मार्ग शुल्क प्रति वाहन भारतीय व विदेशी तीन-तीन सौ रुपये
किशनपुर वन्यजीव विहार प्रवेश शुल्क।
प्रति व्यक्ति तीन दिन 50 रुपए, विदेशी पर्यटक 600 रुपये
बच्चा 30 रुपये, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
अतिरिक्त दिन 40 रुपये, विदेशी पर्यटक 350 रुपये
छह वर्ष की हुई सुहेली व हाथी विनायक
पलियाकलां हथिनी सुहेली का जन्म वर्ष 2013 में 14 नवंबर को हुआ था। यहां ढाई तीन माह पूर्व नन्हें हाथी विनायक ने भी कदम रखा था। सुहेली दुधवा की पालतू हथिनी श्रीलोचना की तो विनायक चमेली की संतान हैं। दोनों स्वाभाव से काफी नटखट हैं और खूब अठखेलियां करते हैं। 14 नवंबर को वह छह वर्ष के हो गए हैं। 15 नवंबर से शुरू हो रहे दुधवा के नए सत्र में इन दोनों के एक बार फिर से पर्यटकों को अपनी ओर खींचने की पूरी संभावना है।
एक दिन पूर्व डीडी ने गाइडों संग की बैठक
पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क के शुभारंभ से एक दिन पूर्व बृहस्पतिवार को डिप्टी डायरेक्टर (डीडी) मनोज सोनकर ने गाइडों के साथ बैठक की। जिसमें उन्होंने गाइडों को संबोधित करते हुए सैलानियों से मृदुभाषी बने रहते हुए उचित व्यवहार करने, पार्क के वन एवं वन्यजीवों के बारे में सही जानकारी मुहैया कराने के दिशा-निर्देश दिए। बताया कि गाइड पर्यटन का महत्वपूर्ण अंग होते हैं और पार्क के बारे में जो संदेश व जानकारी गाइडों द्वारा सैलानियों को दी जाती हैं, उस जानकारी को ही सैलानी दूर-दूर तक प्रसारित करते हैं। दुधवा और बेलरायां के वार्डेन शशिकांत अमरेश ने गाइडों की समस्याएं सुनीं और डीडी के सहयोग से उनका निराकरण करने का भरोसा दिलाया। साथ ही पार्क में अनुशासन बनाए रखने और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की भी बात कही।
दुधवा पार्क के नए सत्र के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गईं हैं। सुबह 10 बजे सत्र का उद्घाटन होगा। - मनोज सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क