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बर्फीली हवाओं ने तराई में बढ़ाया शीत लहर का प्रकोप
लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 21 Jan 2016 04:56 PM IST
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पिछले तीन दिनों से जारी शीत लहर का प्रकोप गुरुवार को और ज्यादा बढ़ गया। सुबह से आसमान में बादल छाए रहे। बर्फीली हवाएं चलने से गलन बढ़ गई। हाड़ कंपा देने वाली ठंड से पूरी तराई बेहाल है। बुधवार को जिले के कुछ क्षेत्रों में ओले गिरने से गलन में इजाफा हुआ है। आसमान में छाए बादलों के कारण सूरज नहीं निकला। बादल छंटने पर कुछ देर के लिए धूप निकली भी तो उसमें गर्माहट नहीं थी। इसके चलते ठंड से राहत नहीं मिल पाई।
गुरुवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 05 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आसपास के गांवों से मजदूरी करने के लिए शहर आने वाले मजदूर चौराहों पर अलाव तापकर ठंड से बचाव का प्रयास करते दिखे। एकाएक ठंड बढ़ने से बच्चे और बुजुर्ग सर्दी जनित बीमारियों की चपेट में हैं। बर्फीली हवाओं ने लोगों को कंपा कर रख दिया है। दिसंबर और आधी जनवरी के मौसम को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि इस बार ठंड नहीं पड़ेगी। लेकिन आधी जनवरी बीतने के बाद ठंड का जो दौर शुरू हुआ उससे सारी आशंकाएं धरी रह गईं।
ठंड बढ़ने और बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। तापमान में गिरावट से गेहूं की फसल को फायदा होने की उम्मीद है। लगातार बढ़ती ठंड में सर्दी से बचाव के लिए प्रशासनिक इंतजामों के दावों की पोल खुल गई है। शहर में अलाव जलाने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण मजदूरों, पल्लेदारों और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कंबल वितरण भी अब तक नहीं हो पाए है। बाढ़ और कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे झिल्लियां तान कर रहने को मजबूर हैं।
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गुरुवार को अधिकतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 05 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आसपास के गांवों से मजदूरी करने के लिए शहर आने वाले मजदूर चौराहों पर अलाव तापकर ठंड से बचाव का प्रयास करते दिखे। एकाएक ठंड बढ़ने से बच्चे और बुजुर्ग सर्दी जनित बीमारियों की चपेट में हैं। बर्फीली हवाओं ने लोगों को कंपा कर रख दिया है। दिसंबर और आधी जनवरी के मौसम को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि इस बार ठंड नहीं पड़ेगी। लेकिन आधी जनवरी बीतने के बाद ठंड का जो दौर शुरू हुआ उससे सारी आशंकाएं धरी रह गईं।
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ठंड बढ़ने और बारिश होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। तापमान में गिरावट से गेहूं की फसल को फायदा होने की उम्मीद है। लगातार बढ़ती ठंड में सर्दी से बचाव के लिए प्रशासनिक इंतजामों के दावों की पोल खुल गई है। शहर में अलाव जलाने की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण मजदूरों, पल्लेदारों और यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। कंबल वितरण भी अब तक नहीं हो पाए है। बाढ़ और कटान पीड़ित खुले आसमान के नीचे झिल्लियां तान कर रहने को मजबूर हैं।
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