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अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर विशेष: ऊपरी हवा का चक्कर नहीं, मस्तिष्क विकार है मिर्गी
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Health
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लखीमपुर खीरी। मिर्गी एक ऐसा रोग है, जिसका समय पर इलाज न हो तो यह खतरनाक रूप भी ले सकती है, जबकि समय से इलाज मिलने पर पीड़ित ठीक हो सकता है। इस बीमारी से जिले में कई लोग पीड़ित हैं। इसका प्रमाण जिला अस्पताल के मानसिक विभाग में रोजाना दवा लेने के लिए आने वाले 10 से 15 पीड़ित हैं।
मिर्गी से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका इलाज भी संभव है और दवाइयां भी उपलब्ध हैं, जिसके साइड इफेक्ट भी कम हैं। बशर्ते इसे ऊपरी हवा न समझें और समस्या होने पर बिना देर किए मनोचिकित्सक को दिखाकर इलाज कराएं। मिर्गी रोग से छुटकारा दिलाने के लिए ही स्वास्थ्य महकमा हर साल 11 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाता है, जिससे लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके।
देश भर में ही नहीं, बल्कि जिले में तमाम लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। सही जानकारी न होने से यह संख्या बढ़ती जाती है और बाद में यह बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच जाती हैं। मिर्गी दो प्रकार की होती है। एक आंशिक और दूसरी व्यापक। आंशिक मिर्गी में दिमाग के एक भाग में दौरा पड़ता है, लेकिन व्यापक में दिमाग के पूरे भाग में दौरा पड़ता है। स्थिति कोई भी हो, सबका इलाज है। इसलिए बिना देर किए मनोचिकित्सक को दिखाकर विधिवत इलाज कराएं। डॉक्टरों का कहना है कि समय से इलाज शुरू होने पर लोग दवाओं से ही ठीक हो जाते हैं। जबकि देरी होने पर ऑपरेशन की नौबत आती है।
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क्यों होती मिर्गी
दिमाग में आठ बिलियन न्यूरॉन होते हैं। न्यूरॉन में इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है। इसका प्रभाव बाहर न निकलें इसलिए हर न्यूरो के चारो ओर माइलिन शीट होती है। मिर्गी के रोगियों में कुछेक न्यूरॉन की माइलिन शीट टूट जाती है, जिससे करंट बाहर आकर अन्य न्यूरॉन को झटके देता है, एक तरह का शार्ट सर्किट हो जाता है। मिर्गी रोग का पता ईईजी एवं एमआरआई और सिटी स्कैन से चलता है।
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क्या किया जाए बचाव
-मिर्गी का दौरा आने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लिटा दें।
-खुली हवा में रखें, आस पास भीड़ न लगाएं
-मिर्गी के दौरे के समय रोगी के मुंह में कुछ न डालें
-मिर्गी से पीड़ित लोग लंबी ड्राइविंग न करें।
-सोने का समय निश्चित करें और भरपूर नींद लें।
-ज्यादा टीवी और मोबाइल का इस्तेमाल न करें।
-अल्कोहल से बचें या फिर इसे सीमित रखें।
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जादू टोने के चक्कर में न पड़ें
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि रोजाना 10 से 15 मरीज मिर्गी के दौरों का इलाज कराने आते हैं। मिर्गी एक मस्तिष्क विकार है। मगर, लोग दौरा पड़ने पर अंधविश्वास में फंसकर ऊपरी हवा या फिर जादू टोना समझकर झाड़ फूंक कराने लगते हैं। जबकि यह गलत है। इसके चक्कर में न पड़कर पीड़ित का इलाज कराएं, क्योंकि इलाज में जितनी देर होगी बीमारी उतनी ही गंभीर होती जाएगी। संवाद
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मिर्गी से घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इसका इलाज भी संभव है और दवाइयां भी उपलब्ध हैं, जिसके साइड इफेक्ट भी कम हैं। बशर्ते इसे ऊपरी हवा न समझें और समस्या होने पर बिना देर किए मनोचिकित्सक को दिखाकर इलाज कराएं। मिर्गी रोग से छुटकारा दिलाने के लिए ही स्वास्थ्य महकमा हर साल 11 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाता है, जिससे लोगों को इसके प्रति जागरूक किया जा सके।
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देश भर में ही नहीं, बल्कि जिले में तमाम लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। सही जानकारी न होने से यह संख्या बढ़ती जाती है और बाद में यह बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच जाती हैं। मिर्गी दो प्रकार की होती है। एक आंशिक और दूसरी व्यापक। आंशिक मिर्गी में दिमाग के एक भाग में दौरा पड़ता है, लेकिन व्यापक में दिमाग के पूरे भाग में दौरा पड़ता है। स्थिति कोई भी हो, सबका इलाज है। इसलिए बिना देर किए मनोचिकित्सक को दिखाकर विधिवत इलाज कराएं। डॉक्टरों का कहना है कि समय से इलाज शुरू होने पर लोग दवाओं से ही ठीक हो जाते हैं। जबकि देरी होने पर ऑपरेशन की नौबत आती है।
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क्यों होती मिर्गी
दिमाग में आठ बिलियन न्यूरॉन होते हैं। न्यूरॉन में इलेक्ट्रिसिटी पैदा होती है। इसका प्रभाव बाहर न निकलें इसलिए हर न्यूरो के चारो ओर माइलिन शीट होती है। मिर्गी के रोगियों में कुछेक न्यूरॉन की माइलिन शीट टूट जाती है, जिससे करंट बाहर आकर अन्य न्यूरॉन को झटके देता है, एक तरह का शार्ट सर्किट हो जाता है। मिर्गी रोग का पता ईईजी एवं एमआरआई और सिटी स्कैन से चलता है।
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क्या किया जाए बचाव
-मिर्गी का दौरा आने पर रोगी को सुरक्षित जगह पर एक करवट लिटा दें।
-खुली हवा में रखें, आस पास भीड़ न लगाएं
-मिर्गी के दौरे के समय रोगी के मुंह में कुछ न डालें
-मिर्गी से पीड़ित लोग लंबी ड्राइविंग न करें।
-सोने का समय निश्चित करें और भरपूर नींद लें।
-ज्यादा टीवी और मोबाइल का इस्तेमाल न करें।
-अल्कोहल से बचें या फिर इसे सीमित रखें।
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जादू टोने के चक्कर में न पड़ें
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश शुक्ला बताते हैं कि रोजाना 10 से 15 मरीज मिर्गी के दौरों का इलाज कराने आते हैं। मिर्गी एक मस्तिष्क विकार है। मगर, लोग दौरा पड़ने पर अंधविश्वास में फंसकर ऊपरी हवा या फिर जादू टोना समझकर झाड़ फूंक कराने लगते हैं। जबकि यह गलत है। इसके चक्कर में न पड़कर पीड़ित का इलाज कराएं, क्योंकि इलाज में जितनी देर होगी बीमारी उतनी ही गंभीर होती जाएगी। संवाद