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बगैर किताबों के बच्चों का बीता आधा शिक्षण सत्र
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
Updated Thu, 11 Aug 2016 11:33 PM IST
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आखिर कब तक मिलेंगी बच्चों को किताबें
- सिर्फ कक्षा एक के विद्यार्थियों को मिली एक किताब
- 3941 विद्यालयों में पंजीकृत हैं 5.64 लाख विद्यार्थी
सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग ने पैटर्न जरूर बदला है, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं बदल सके हैं। शिक्षण सत्र का करीब आधा साल बीत चुका है, लेकिन स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किताबें, यूनिफार्म, खाना और पढ़ाई सब नि:शुल्क है, जिसके बावजूद हकीकत इसके उलट है। इसे गरीब परिवारों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं तो और क्या कहेंगे कि सिर्फ कक्षा एक के विद्यार्थियों को एक किताब कलरव का वितरण कराया गया है। जबकि कक्षा दो से आठ तक के बच्चों को एक भी किताब नहीं मिल सकी है। बच्चे बिना किताब के पढ़ाई में कितनी रूचि लेंगे, जिसका जवाब अफसरों के पास भी नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर अप्रैल से ही सत्र का आगाज कर दिया था। 3941 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के 5.64 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिन्हें किताबों के वितरण के लिए डिमांड भी देर से की गई। सूत्र बताते हैं कि जुलाई में किताबों की डिमांड की गई। जिले में किताबों की आपूर्ति के लिए नोएडा के एक प्रकाशक और लखनऊ के दो प्रकाशकों को टेंडर दिया जा चुका है। करीब एक माह बीतने के बाद कक्षा एक की हिंदी कलरव की 63 हजार प्रतियां प्राप्त हुईं, जिनका वितरण कराने के दावे विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया शासन स्तर यानी लखनऊ से की गई है, जहां पर देरी से कार्रवाई होने की बात कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। अभी तक किताबों की दूसरी खेप नहीं आई है। ऐसे में समय बीतता जा रहा है। कब किताबें आएंगी और कब तक विद्यार्थियों के पास पहुंचेगी? इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है, क्योंकि जिम्मेदारी की गेंद लखनऊ में बैठे आला अधिकारियों के पाले में जो है।
मामला हाईकोर्ट में होने के कारण टेंडर प्रक्रिया देरी से हुई थी। किताबों का आर्डर दिया जा चुका है। प्रकाशकों को 19 सितंबर 2016 तक सभी किताबों की आपूर्ति करने का समय दिया गया है। फिलहाल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी, जिसके लिए पुरानी किताबों की मदद ली जा रही है।
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- संजय कुमार शुक्ला, बीएसए
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- सिर्फ कक्षा एक के विद्यार्थियों को मिली एक किताब
- 3941 विद्यालयों में पंजीकृत हैं 5.64 लाख विद्यार्थी
सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर बेसिक शिक्षा विभाग ने पैटर्न जरूर बदला है, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं बदल सके हैं। शिक्षण सत्र का करीब आधा साल बीत चुका है, लेकिन स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को अभी तक किताबें नहीं मिल सकी हैं। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में किताबें, यूनिफार्म, खाना और पढ़ाई सब नि:शुल्क है, जिसके बावजूद हकीकत इसके उलट है। इसे गरीब परिवारों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं तो और क्या कहेंगे कि सिर्फ कक्षा एक के विद्यार्थियों को एक किताब कलरव का वितरण कराया गया है। जबकि कक्षा दो से आठ तक के बच्चों को एक भी किताब नहीं मिल सकी है। बच्चे बिना किताब के पढ़ाई में कितनी रूचि लेंगे, जिसका जवाब अफसरों के पास भी नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर अप्रैल से ही सत्र का आगाज कर दिया था। 3941 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा एक से आठ तक के 5.64 लाख विद्यार्थी पंजीकृत हैं, जिन्हें किताबों के वितरण के लिए डिमांड भी देर से की गई। सूत्र बताते हैं कि जुलाई में किताबों की डिमांड की गई। जिले में किताबों की आपूर्ति के लिए नोएडा के एक प्रकाशक और लखनऊ के दो प्रकाशकों को टेंडर दिया जा चुका है। करीब एक माह बीतने के बाद कक्षा एक की हिंदी कलरव की 63 हजार प्रतियां प्राप्त हुईं, जिनका वितरण कराने के दावे विभागीय अधिकारी कर रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया शासन स्तर यानी लखनऊ से की गई है, जहां पर देरी से कार्रवाई होने की बात कहकर अधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं। अभी तक किताबों की दूसरी खेप नहीं आई है। ऐसे में समय बीतता जा रहा है। कब किताबें आएंगी और कब तक विद्यार्थियों के पास पहुंचेगी? इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। अधिकारियों ने अपनी जवाबदेही से पल्ला झाड़ लिया है, क्योंकि जिम्मेदारी की गेंद लखनऊ में बैठे आला अधिकारियों के पाले में जो है।
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मामला हाईकोर्ट में होने के कारण टेंडर प्रक्रिया देरी से हुई थी। किताबों का आर्डर दिया जा चुका है। प्रकाशकों को 19 सितंबर 2016 तक सभी किताबों की आपूर्ति करने का समय दिया गया है। फिलहाल विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी जाएगी, जिसके लिए पुरानी किताबों की मदद ली जा रही है।
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- संजय कुमार शुक्ला, बीएसए