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Lakhimpur Kheri News: सरकार ने अपनी पीठ थपथपाई, गन्ना किसानों ने निराशा जताई

Tue, 06 Feb 2024 01:07 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 06 Feb 2024 01:07 AM IST
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Government pats its back, sugarcane farmers express disappointment
श्री कृष्ण वर्मा
लखीमपुर खीरी। विधानसभा में बजट पढ़ते हुए वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को गन्ना किसानों को लेकर सरकार की पीठ भले थपथपाई हो, लेकिन जिले के गन्ना किसान सरकार की नीतियों से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि बजट में कोई राहत नहीं मिली है। अब तक सरकारी नियमों के मुताबिक 14 दिन के अंदर भुगतान की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। जनपद में बजाज ग्रुप की तीनों चीनी मिलों पर कुल 625.55 करोड़ रुपया भुगतान बकाया है, जिसे सरकार नहीं दिला पा रही है।
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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि वर्ष 2017 से 29 जनवरी 2024 तक लगभग 48 लाख गन्ना किसानों को 2 लाख 33 हजार 793 करोड़ रुपये से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान कराया गया, जो कि 22 सालों के कुल गन्ना मूल्य से भी 20,274 करोड़ रुपये अधिक है। वहीं पेराई सत्र 2023-2024 के लिए गन्ने की अगैती प्रजाति का मूल्य 350 रुपये से बढ़ाकर 370 रुपये, सामान्य प्रजाति का 340 रुपये से बढ़ाकर 360 रुपये व अनुपयुक्त प्रजाति का मूल्य 335 रुपये से बढ़ाकर 355 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है, लेकिन सरकार की घोषणा से किसान नेताओं ने असहमति जताई है।
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गन्ने की लागत के हिसाब से मूल्य संशोधन में मिली नाउम्मीदी
आशा थी कि बजट में गन्ने की लागत को दृष्टिगत रखकर भाव में संशोधन कर मूल्य बढ़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। गन्ना किसानों का भुगतान कैसे हो, इसकी कोई व्यवस्था नहीं बनाई गई। किसानों के विकास के लिए कोई नई योजना नहीं बनाई गई। घाटा सहकर फसलें बेच रहे किसानों को बैंक कर्ज से मुक्ति मिलने की उम्मीद थी किंतु उनके कर्ज माफी के लिए बजट में कोई प्रबंध नहीं किया गया। - पटेल श्रीकृष्ण वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान शक्ति संगठन
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आय दोगुनी नहीं हुई, किसानों पर बढ़ गया कर्ज
किसानों को इस बार चुनावी वर्ष के बजट से काफी उम्मीद थी। किसान अपनी फसल की एमएसपी गारंटी मांग रहा है। सरकार ने वादा किया था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी, लेकिन आय दोगुनी होने के बजाय उल्टा कर्ज चढ़ गया है। किसानों की फसल अच्छे दामों पर बिके इस पर काम करना चाहिए ना की उनको कर्ज देकर कर्ज के दलदल में धकेला जाए। कर्ज बढ़ने पर आत्महत्या ही किसान के लिए आखिरी रास्ता बचता है। - अमनदीप संधू, प्रदेश महासचिव, भारतीय किसान यूनियन (टिकैत)


गन्ना मूल्य से नाखुश दिखे किसान, बोले- 400 से ऊपर होना चाहिए था दाम


पलिया के पतवारा गांव निवासी किसान तेजिंदर सिंह तेजी ने कहा कि इस बजट से किसान काफी नाखुश है। किसानों को उम्मीद थी कि बजट में गन्ने का समर्थन मूल्य चार सौ रुपये पार करेगा, लेकिन केवल 20 रुपये की मामूली बढ़ोतरी की गई है। पंजाब की तरह ही यहां भी 400 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से मिलना चाहिए।





राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के तहसील अध्यक्ष तरसेम सिंह ने कहा कि बजट से निराशा हाथ लगी है, सरकार ने गन्ने के खर्च के हिसाब पर डेढ़ गुना देने की बात कही थी। 325 रुपयेे बोवाई में खर्च आता है, लेकिन मिल क्या रहा है 370 रुपयेे। ऐसे में किसान गन्ने का समर्थन मूल्य डेढ़ गुना के हिसाब से 480 रुपयेे क्विंटल चाह रहा है। क्षेत्रीय मिलें भुगतान नहीं कर रहीं, 200 करोड़ का बकाया है।

श्री कृष्ण वर्मा

श्री कृष्ण वर्मा

श्री कृष्ण वर्मा

श्री कृष्ण वर्मा

श्री कृष्ण वर्मा

श्री कृष्ण वर्मा

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