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मामूली बारिश और तेज हवा से लौटी ठंड
लखीमपुर खीरी।
Updated Sun, 21 Feb 2016 11:48 PM IST
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बसंत ऋतु में अचानक छाए बादलों, तेज हवाओं और मामूली बारिश गेहूं फसल के लिए वरदान साबित हुई है। इससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। हालांकि मसूर, मटर और आम के बौर को मामूली नुकसान हुआ है। बढ़ रही गर्मी से भी कुछ हद तक राहत मिली है। जंगल और बस्तियों में आग लगने का खतरा भी फिलहाल टल गया है।
बांकेगंज। पिछले साल जहां अप्रैल माह में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ था, वहीं इस बार समय से बारिश होने के कारण फसलों को फायदा पहुंचा है। किसानों के खेतों में खड़ी लहलहाती गेहूं फसल को इस समय पानी की जरूरत थी। यह पानी गेहूं के लिए अमृत साबित होगा। इस बार सर्दी न पड़ने से जहां गेहूं फसल में उत्पादन कम होने की आशंका बढ़ गई थी, वहीं गेहूं फसल में बालियां आने के समय हुई बारिश यह खतरा भी टल गया है।
ममरी। शनिवार की सायं गरज चमक के साथ हुई बरसात से मसूर, गेहूं, चना, मटर की फसलों को लाभ पहुंचा है। वहीं, खेतों में तैयार खड़ी लाही और आम के बौर को क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि सर्वाधिक फायदा पिछैती गेहूं और गन्ने की फसल को हुआ है। पूरे सीजन के बाद पहली बार हुई बरसात किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों ने खाली पड़े खेतों की जुताई कर बसंत कालीन गन्ने की बुवाई शुरू कर दी है।
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क्या कहते हैं कृषि वैैैज्ञानिक
शनिवार हुई बारिश के संबंध में कृषि वैैैज्ञानिक डॉ. सुहैल ने बताया कि इस समय हुई बारिश से रबी सीजन में बुवाई की जाने वाली फसलों गेहूं, मसूर, चना आदि को काफी फायदा हुआ है। उनका कहना है कि बारिश से आम और मटर फसल को मामूली नुकसान पहुंचा है। डॉ. सुहैल ने बागबानों से बारिश से आम बौर में होने वाले नुकसान की रोकथाम के उपाय करने की बात कही है।
आम की फसल को बचाने का उपाय
बारिश के बाद आम बौर में हुए नुकसान की रोकथाम को लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहैल ने बागबानों से दो ग्राम सल्फर के साथ क्यूनालफॉस या ट्राइजोफस का दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी घोल बनाकर आवश्कतानुसार छिड़काव करने की सलाह दी है।
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बांकेगंज। पिछले साल जहां अप्रैल माह में तेज हवाओं के साथ हुई बारिश और ओलावृष्टि से रबी फसलों को भारी नुकसान हुआ था, वहीं इस बार समय से बारिश होने के कारण फसलों को फायदा पहुंचा है। किसानों के खेतों में खड़ी लहलहाती गेहूं फसल को इस समय पानी की जरूरत थी। यह पानी गेहूं के लिए अमृत साबित होगा। इस बार सर्दी न पड़ने से जहां गेहूं फसल में उत्पादन कम होने की आशंका बढ़ गई थी, वहीं गेहूं फसल में बालियां आने के समय हुई बारिश यह खतरा भी टल गया है।
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ममरी। शनिवार की सायं गरज चमक के साथ हुई बरसात से मसूर, गेहूं, चना, मटर की फसलों को लाभ पहुंचा है। वहीं, खेतों में तैयार खड़ी लाही और आम के बौर को क्षति पहुंची है। किसानों का कहना है कि सर्वाधिक फायदा पिछैती गेहूं और गन्ने की फसल को हुआ है। पूरे सीजन के बाद पहली बार हुई बरसात किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। किसानों ने खाली पड़े खेतों की जुताई कर बसंत कालीन गन्ने की बुवाई शुरू कर दी है।
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क्या कहते हैं कृषि वैैैज्ञानिक
शनिवार हुई बारिश के संबंध में कृषि वैैैज्ञानिक डॉ. सुहैल ने बताया कि इस समय हुई बारिश से रबी सीजन में बुवाई की जाने वाली फसलों गेहूं, मसूर, चना आदि को काफी फायदा हुआ है। उनका कहना है कि बारिश से आम और मटर फसल को मामूली नुकसान पहुंचा है। डॉ. सुहैल ने बागबानों से बारिश से आम बौर में होने वाले नुकसान की रोकथाम के उपाय करने की बात कही है।
आम की फसल को बचाने का उपाय
बारिश के बाद आम बौर में हुए नुकसान की रोकथाम को लेकर कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुहैल ने बागबानों से दो ग्राम सल्फर के साथ क्यूनालफॉस या ट्राइजोफस का दो मिली लीटर प्रति लीटर पानी घोल बनाकर आवश्कतानुसार छिड़काव करने की सलाह दी है।