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समूह की चार हजार महिलाओं ने तैयार की 40 लाख गन्ने की पौध
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तैयार गन्ने की पौध के साथ समूह की महिलाएं।
202 महिला समूहों को मिला गन्ने की पौध उत्पादन का काम
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लखीमपुर खीरी। कोरोना काल में गन्ना विकास विभाग ने मिशन शक्ति के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का जो अभियान चलाया था, जिसका असर अब दिखने लगा है। गन्ना पौध उत्पादन में महिलाओं ने उपलब्धि हासिल करते हुए 40.50 लाख से अधिक गन्ने की पौध तैयार की है, जिसकी बिक्री से महिला समूहों की आय में वृद्घि होगी।
गन्ना विभाग ने गांवों में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करके उन्हें गन्ने की पौध तैयार करने का काम सौंपा था, जिसका परिणाम है इस वर्ष लक्ष्य 195 के सापेक्ष 202 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि 202 समूहों से जुड़ी 4002 महिलाओं द्वारा अब तक 40.50 लाख से अधिक गन्ना पौध का उत्पादन किया जा चुका है। इन समूहों द्वारा गन्ने की नवीनतम किस्मों सहित विभिन्न किस्मों की पौध का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समूहों द्वारा तैयार पौध को 1.50 रुपये की दर से किसानों को बेचा जाएगा। जबकि प्रति पौध पर 1.50 रुपये (सिंगल बड़ चिप से तैयार पौध पर) और 1.30 रुपये (सिंगल बड़ से तैयार पौध पर) रुपये अनुदान दिया जाएगा।
गन्ना विभाग ने गांवों में महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन करके उन्हें गन्ने की पौध तैयार करने का काम सौंपा था, जिसका परिणाम है इस वर्ष लक्ष्य 195 के सापेक्ष 202 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा चुका है। जिला गन्ना अधिकारी ब्रजेश कुमार पटेल ने बताया कि 202 समूहों से जुड़ी 4002 महिलाओं द्वारा अब तक 40.50 लाख से अधिक गन्ना पौध का उत्पादन किया जा चुका है। इन समूहों द्वारा गन्ने की नवीनतम किस्मों सहित विभिन्न किस्मों की पौध का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि समूहों द्वारा तैयार पौध को 1.50 रुपये की दर से किसानों को बेचा जाएगा। जबकि प्रति पौध पर 1.50 रुपये (सिंगल बड़ चिप से तैयार पौध पर) और 1.30 रुपये (सिंगल बड़ से तैयार पौध पर) रुपये अनुदान दिया जाएगा।
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