बाढ़ का कहर: लखीमपुर खीरी के सिंधिया में 20 दिन पहले थी लोगों की चहल-पहल, अब वीरान हो गया ये गांव
लखीमपुर खीरी के सिंधिया गांव में शारदा नदी की बाढ़ ने ऐसा कहर बरपाया, जिससे पूरा गांव उजड़ गया। लोग घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए। अब सिर्फ गांव में कुछ बुजुर्ग रहते हैं, जो पशुओं और मकानों की देखभाल करते हैं।
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लखीमपुर खीरी के ब्लॉक बिजुआ और तहसील सदर की सीमा पर का एक गांव है सिंघिया, यह गांव ग्राम पंचायत गुजारा का मजरा है। शारदा नदी के किनारे बसा हुआ है। 20 दिन पहले सिंघिया गांव में काफी चहल-पहल थी, हर तरफ लोगों की चहलकदमी थी। सब ठीक-ठाक चल रहा था। अचानक शारदा नदी में आई बाढ़ से किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि कटकर नदी में समा गई, और धीरे-धीरे कटान करती हुई शारदा नदी गांव तक पहुंच गई।
बाढ़ और नदी के कटान का दंश झेल रहे लोगों ने अपना घरेलू सामान निकाल कर दूसरी जगह सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया। कटान होने से लगभग 10 घर नदी में समा गए। उसके बाद नदी का जलस्तर बढ़ गया और कटान रुक गया। जब भी जलस्तर कम होगा तो शारदा नदी का कटान फिर शुरू हो जाएगा और सिंधिया गांव में कितने घर कट जाएंगे, यह कहा नहीं जा सकता है। 80 घरों वाले मजरे में अब सिर्फ बड़े बुजुर्ग ही रहते हैं और पशुओं की देखभाल करते हैं।
कुछ पहले ही छोड़ चुके थे गांव
महिलाएं और बच्चे गांव छोड़कर दूसरी जगह चले गए हैं। कुछ लोगों को नदी से कटान का पहले ही अंदाजा था। उन लोगों ने दाउदपुर में जमीन खरीद कर अपने-अपने घर बना लिए हैं। कटान पीड़ितों को प्रशासन द्वारा बसाने के लिए अभी तक कोई प्रयास नहीं किया गया। सब मजबूरी में अपनी इधर-उधर गुजर बसर करने के लिए निकल गए हैं।
सिंधिया गांव अब वीरान नजर आ रहा है। पूरे गांव में कुछ बुजुर्ग बचे हैं, जो सिर्फ जानवरों और घरों की देखभाल कर रहे हैं। अधिकतर घर खाली पड़े हैं, जो लोगों को मुंह चढ़ा रहे हैं। लेखपाल राकेश शुक्ला से मालूम किया गया कि कटान पीड़ितों के लिए बसाने के लिए कोई जगह चिन्हित की गई है तो उन्होंने बताया कि अभी तक कहीं भी कोई जगह चिन्हित नहीं की गई है। गांव के बुजुर्ग अपनी कटी हुई कृषि भूमि को देख और कटे हुए मकानों को देखकर परेशान हो रहे हैं और अपने भाग्य को कोस रहे हैं।