{"_id":"6a3ec524a0d2dabaa9013ddb","slug":"fear-of-monkeys-turns-house-into-cage-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1009-178467-2026-06-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Lakhimpur Kheri News: बंदरों के डर से पिंजरा बने घर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Lakhimpur Kheri News: बंदरों के डर से पिंजरा बने घर
Fri, 26 Jun 2026 11:59 PM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 26 Jun 2026 11:59 PM IST
विज्ञापन
मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद
लखीमपुर खीरी। शहर में बंदरों का आतंक अब लोगों की दिनचर्या और घरों का स्वरूप दोनों बदल रहा है। संकटा देवी, मिश्राना, महाराज नगर, बहादुर नगर, शाहपुरा कोठी, नई बस्ती और रानीगंज समेत कई मोहल्लों में लोग बंदरों से बचाव के लिए बालकनी, सीढ़ियों, खुली रेलिंग और कई घरों में छत तक जाने वाले रास्तों पर लोहे के जाल लगवा रहे हैं। इसके लिए 10 हजार से 60-70 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
बंदरों के डर से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का छत पर जाना मुश्किल हो गया है। महिलाओं का कहना है कि बंदर सूख रहे कपड़े फाड़ देते हैं या उठा ले जाते हैं। फल-सब्जियां, खाने-पीने का सामान और गमलों में लगे पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। हाल के दिनों में छतों पर लगे सोलर पैनलों को भी क्षतिग्रस्त किए जाने की शिकायतें बढ़ी हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बंदरों की बढ़ती संख्या की एक वजह लोगों द्वारा उन्हें नियमित भोजन कराना भी है। सब्जी मंडी, गल्ला मंडी और रिहायशी इलाकों में आसानी से भोजन मिलने से बंदरों ने शहर को स्थायी ठिकाना बना लिया है। फल, सब्जी, मिठाई और होटल कारोबारियों का कहना है कि उन्हें भी रोजाना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -
30 दिन में बंदरों के हमले के 250 से अधिक पीड़ित
जिला अस्पताल में पिछले 30 दिनों में करीब 1700 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। इनमें 250 से अधिक लोग बंदरों के हमले के शिकार थे। यह केवल जिला अस्पताल का आंकड़ा है। महिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर भी बड़ी संख्या में लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -
बंदरों से पूरा मोहल्ला परेशान है। बच्चों पर कई बार हमला कर चुके हैं। घर की महिलाएं छत पर जाने से डरती हैं। बंदरों को रोकने का प्रयास होना चाहिए।
-महेंद्र गुप्ता, मोहल्ला संकटा देवी
-- -- -- -- -- -
बाजार में दुकानों पर बंदरों से काफी नुकसान हो रहा है। नजर बचते ही दुकान का सामान उठा ले जाते हैं। कई बार मोबाइल और खाने-पीने की वस्तुएं भी ले गए।
-गोपाल कश्यप, व्यापारी
-- -- -- -- -- -- -- -शहर के अलावा जहां-जहां बंदरों का आतंक है, वहां की नगर पालिका और नगर पंचायत के अधिकारी पत्र लिखकर बंदरों को पकड़ने का आग्रह करें तो विभाग नियमानुसार अभियान चलाएगा।
-तापस मिहिर, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग
विज्ञापन
बंदरों के डर से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं का छत पर जाना मुश्किल हो गया है। महिलाओं का कहना है कि बंदर सूख रहे कपड़े फाड़ देते हैं या उठा ले जाते हैं। फल-सब्जियां, खाने-पीने का सामान और गमलों में लगे पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। हाल के दिनों में छतों पर लगे सोलर पैनलों को भी क्षतिग्रस्त किए जाने की शिकायतें बढ़ी हैं।
विज्ञापन
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, बंदरों की बढ़ती संख्या की एक वजह लोगों द्वारा उन्हें नियमित भोजन कराना भी है। सब्जी मंडी, गल्ला मंडी और रिहायशी इलाकों में आसानी से भोजन मिलने से बंदरों ने शहर को स्थायी ठिकाना बना लिया है। फल, सब्जी, मिठाई और होटल कारोबारियों का कहना है कि उन्हें भी रोजाना आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
विज्ञापन
30 दिन में बंदरों के हमले के 250 से अधिक पीड़ित
जिला अस्पताल में पिछले 30 दिनों में करीब 1700 लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। इनमें 250 से अधिक लोग बंदरों के हमले के शिकार थे। यह केवल जिला अस्पताल का आंकड़ा है। महिला अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों पर भी बड़ी संख्या में लोग एंटी रैबीज इंजेक्शन लगवा रहे हैं।
बंदरों से पूरा मोहल्ला परेशान है। बच्चों पर कई बार हमला कर चुके हैं। घर की महिलाएं छत पर जाने से डरती हैं। बंदरों को रोकने का प्रयास होना चाहिए।
-महेंद्र गुप्ता, मोहल्ला संकटा देवी
बाजार में दुकानों पर बंदरों से काफी नुकसान हो रहा है। नजर बचते ही दुकान का सामान उठा ले जाते हैं। कई बार मोबाइल और खाने-पीने की वस्तुएं भी ले गए।
-गोपाल कश्यप, व्यापारी
-तापस मिहिर, डीएफओ दक्षिण खीरी वन प्रभाग

मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद

मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद

मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद

मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद

मोहल्ला शाहपुरा कोठी में छत की रेलिंग पर बैठे बंदर। संवाद